अनोखी है मैरवा के दिव्यांग सान्वी की कहानी

श्रीनारद मीडिया, मैरवा: रविवार रामजानकी मंदिर में प्रतिभा खोज प्रतियोगिता के सफलतम छात्रों को जब सम्मानित किया जा रहा था तभी पाँचवी वर्ग की दिव्यांग छात्रा सान्वी कुमारी को उनके अनोखे पहल के लिए सम्मान ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सान्वी के दिव्यांग और इतने कम उम्र के होने के बावजूद छोटे बच्चों को निःशुल्क पढ़ना और उनको पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना वाकई आकर्षण और सराहनीय है। जब सान्वी को सम्मानित किया गया तब सान्वी के अभिभावक तथा लोगो के लिए सुखद पल था परंतु उतनी ही दुःखद उसके जिंदिगी की कहानी है। दस वर्ष की सान्वी का एक और नाम विद्या है जो कि अभिभावकों और दोस्तो में पसंदीदा है। विद्या का जन्म नौतन थाना क्षेत्र के सेमरिया गावँ में हुआ । घर वालो को जब पता चला कि बेटी हुई है और देख नही सकती तो घर वालो ने सान्वी को अपनाने से मना कर दिया । मजबूरी में सान्वी के माँ को अपने घर बिस्वार पंचायत के मझवालिया गांव आ कर रहना पड़ा। परंतु सान्वी की माँ ने हिम्मत नही हारी ।सान्वी की माँ ने जीविका चलाने के लिए मैरवा में अपना एक निजी पार्लर खोला तथा अपनी बेटी का ईलाज करना शुरू किया इधर- उधर ईलाज कराने के बाद जब सिमा देवी को सफलता नही मिली तो उन्होंने दिल्ली ईलाज कराना शुरू किया मेहनत रंग लाई और विद्या को थोड़ा दिखना शुरू हुआ।

विद्या अपना निःशुल्क विद्यालय अपने नानी के आवास मझवालिया में ही चलाती है जहाँ अभी करीब पच्चास बच्चे हैं। विद्या पास के एक कान्वेंट स्कूल में पाँचवी वर्ग में पढ़ती है। विद्यालय से समय निकाल कर विद्या प्रतिदिन शाम को दो घंटे बच्चो को निःशुल्क पढ़ाती है। इतना ही नही बच्चो को पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री किताब, नोट बुक पेंसिल इत्यादि भी अपने खर्च पर उपलब्ध कराती है। इस नेक कार्य मे उसके अभिभावकों का भी पूरा सहयोग मिलता है।

विद्या की इस नेक कार्य को देख कर जहा मन उसके प्रति सम्मान से भर जाता है वही दूसरी तरफ समाज के कुछ लोगो के दकियानूसी सोच को देख कर मन व्यथित हो उठता है । समाज मे आज भी कुछ लोग बेटे और बेटियों इतना फर्क समझते है कि अपने खून को ही अपनाने से मना कर देते हैं। बहरहाल विद्या उर्फ सान्वी उन लोगो के मुह पर करारा तमाचा है जो ऐसी संकुचित सोच रखते हैं।

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