नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है:क्यों

नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है:क्यों

दशहरे पर नीलकंठ पक्षी देखने का महात्म्य है. हिंदू मतों के अनुसार, विजयादशमी के दिन जब भगवान राम जी रावण का संहार करने जा रहे थे, तो उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे. इसके बाद श्रीराम को रावण पर विजय मिली थी. यही वजह है कि नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है.

नीलकंठ तुम नीले रहियो…

सावन माह में अगर किसी भी स्थिति में नीलकंठ का दर्शन हो जाये, तो वह सुख-सौभाग्य समृद्धिवर्द्धक ही होता है. उत्तर भारत में यह कहावत भी प्रचलित है- ‘नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोज करियो, हमरी बात राम से कहियो.’

नीलकंठ (Coracias Benghalensis), जिसे इंडियन रोलर बर्ड (The Indian Roller) या ब्लू जे (Blue Jay) कहते हैं, एक भारतीय पक्षी है. यह उष्णकटिबंधीय दक्षिणी एशिया में इराक से थाईलैंड तक पाया जाता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह पक्षी दुर्लभ हो गया है. भला हो ज्ञान के सागर सोशल मीडिया का, जो दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन कराता आ रहा है|

शिव जी का स्वरूप

नीलकंठ का नाम उसके शरीर के नीले रंग की वजह से पड़ा है. इसकी सिर, पंख और पूंछ नीली होती है. कंठ पर खास तरह की नीलिमा होती है. इस पक्षी को भगवान शिव से जोड़ कर भी देखा जाता है. चूंकि भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान किया था, जिसे उन्होंने कंठ में ही रोक लिया.
इससे उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा.

इसलिए नीलकंठ पक्षी को शिव जी का प्रिय पक्षी, उनका स्वरूप और धरती पर उनका प्रतिनिधि माना जाता है. श्रीमद्भागवत के चौथे अध्याय में ‘तत्पहेमनिकायाभं शितिकण्ठं त्रिलोचनम्’ कह कर भगवान शिव के नीलकंठ वाले सौम्य रूप का वर्णन किया गया है.

दर्शन के महात्म्य

हिंदू धर्म में मान्यता है कि सुबह-सुबह नीलकंठ के दर्शन हो जायें, तो दिन शुभ हो जाता है. दशहरे पर इन्हें देखे जाने का महत्व कुछ विशेष होता है. कहा जाता है दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. लेकिन इस बार यह पक्षी केवल व्हाट्सऐप पर ही देखा गया.

किसान का सच्चा दोस्त

नीलकंठ पक्षी हमारी संस्कृति में केवल धार्मिक वजह से ही नहीं रचा-बसा है. खेत में फसल पर लगनेवाले कीड़ों को नीलकंठ कीड़ों को खाकर फसल की रक्षा करता है और इस तरह यह किसान के सच्चे दोस्त का धर्म निभाता है.

संकट के साये में नीलकंठ

बिहार, कर्नाटक, ओड़िशा, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश राज्यों का राज्य पक्षी होने के बावजूद आज यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर है. दक्षिणी राज्यों में अब भी कभी-कभार नीलकंठ दिख जाते हैं. यहां इनकी तादाद 50 पक्षी प्रति वर्ग किलोमीटर है, लेकिन लगातार संकट के साये में है.

उत्तर भारत के कुछ इलाकों में पक्षी पकड़नेवाले, नीलकंठ को घर-घर ले जाकर, लोगों का उनके दर्शन करा, पैसे कमाते हैं. लेकिन स्थानीय लोगों की मानें, तो इस साल नीलकंठ के दर्शन करानेवाला कोई नहीं आया.

आभार: प्रभात खबर

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