जल्द 6 सरकारी बैंक हो जाएंगे खत्म, करोड़ों ग्राहकों को हो सकती हैं ये 15 परेशानियां

जल्द 6 सरकारी बैंक हो जाएंगे खत्म, करोड़ों ग्राहकों को हो सकती हैं ये 15 परेशानियां

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

अर्थव्यस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है। इस फैसले का बैंक ग्राहक, निवेशक, कारोबारी और कर्मचारियों पर व्यापक असर पड़ने वाला है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में आईएफएससी कोड सहित कई  बदलाव होंगे। विलय के बाद होने वाले बदलावों पर पेश है एक रिपोर्ट।

बैंक ग्राहक हैं तो…
बचत खाताधारक
* अगर आपका बचत खाता विलय होने वाले सरकारी बैंक में है तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
* अगर जिस बैंक का विलय हो रहा है उस बैंक के बचत बैंक खाताधारक हैं तो खाता संख्या में बदलाव हो सकता है।
* आपको नए बैंक से नई चेकबुक लेनी पड़ सकती है।
* नई पासबुक और नया एटीएम कार्ड भी बनवाना पड़ सकता है।
* बैंक जो भी फैसले लेंगे उसके बारे में ग्राहकों को पहले सूचित करेंगे और इसके लिए समय भी देंगे।

सावधि जमा
बड़े बैंक सामान्यत: सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज कम देते हैं और छोटे बैंक ज्यादा देते हैं। पहले से कराई गई एफडी पर कोई असर नहीं होगा। लेकिन, नई कराने पर कम ब्याज मिल सकता है क्योंकि, एफडी की दर बैंकों में अलग-अलग है। ऐसे में नई एफडी पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पुराने कर्ज पर राहत संभव
बड़े बैंको की कर्ज पर ब्याज दरें छोटे बैंकों के मुकाबले कम हैं। ऐसे में आपने जिस बैंक से कर्ज लिया है और उसका विलय  किसी बड़े बैंक में हो रहा है तो आपको फायदा हो सकता है। कर्ज पर आपको ब्याज कम चुकाना पड़ेगा जिससे ईएमआई घट सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन सेवा (ईसीएस)
* आपने आवास ऋण (होम लोन), कार लोन या किसी अन्य तरह का कर्ज लिया है जिसकी मासिक किस्त (ईएमआई) ईसीएस से चुकाते हैं या बिजली-पानी, टेलीफोन बिल का भुगतान ईसीएस के जरिये करते हैं तो  बैंकों के विलय के बाद उसमें कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।
* किसी भी तरह के बदलाव या नई चेकबुक लेनी पड़ती है तो ईसीएस के लिए उसे तुरंत अपडेट कराना होगा जिससे ईएमआई समय पर जाए और कोई परेशानी नहीं हो।

आईटीआर में दर्ज कराना होगा नया विवरण
आयकर रिटर्न भरते समय सभी खातों की जानकारी देने के साथ उनमें से एक खाते का रिफंड के लिए भी चयन करना पड़ता है। विलय के बाद आपकी खाता संख्या, आईएफएससी कोड या कोई अन्य बदलाव होता है तो उसकी जानकारी रिटर्न भरते समय देनी पड़ेगी।

नौकरीपेशा हैं तो एचआर को सूचना देनी होगी
बैंक खाता में किसी भी तरह के बदलाव की स्थिति में आपको अपने नियोक्ता को उसकी जानकारी देनी होगी। अपने एचआर को नए बदलाव के बारे में अवगत कराना होगा जिससे आपका वेतन सही समय पर उस खाते में दिया जा सके।

आईएफएससी कोड में बदलाव संभव
* विलय के बाद बैंकों की शाखाओं के आईएफएससी कोड बदल सकते हैं।
* बैंकों के विलय के बाद आस-पास की शाखाओं को भविष्य में आपस में जोड़ा या एक किया जा सकता है।
* अगर बैंक ऐसा करता है तो इस बारे में ग्राहकों को पहले से जानकारी देगा।

जीवन-स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भुगतान
* आप स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा का प्रीमियम ईसीएस के जरिये चुकाते हैं तो बैंक खाता या उसमें किसी भी बदलाव की जानकारी बीमा कंपनी को तुरंत देनी पड़ेगी।
* जीवन बीमा पॉलिसी के मामले में परिपक्वता के बाद या दावा निपटान (क्लेम सेटलमेंट) के लिए जिस बैंक और खाता संख्या को आपने दिया है उसमें कोई बदलाव आता है तो उसकी जानकारी भी आपको बीमा कंपनी को देनी पड़ेगी। नॉमिनी के मामले भी ऐसा ही करना होगा।

बदल सकता है लॉकर का स्थान
* विलय के बाद बैंक एक ही जगह की आसपास की शाखाओं को आपस में जोड़ता है या एक करता है तो लॉकर भी नई शाखा में शिफ्ट हो सकता है। इसके बारे में बैंक ग्राहकों को पहले से सूचित करेगा।
* अलग-अलग बैंकों में लॉकर के लिए शुल्क की दर भिन्न है। ऐसे में आपको नई दर से भुगतान करना पड़ सकता है।
* बैंक लॉकर के शुल्क के लिए भी खाता से सीधे राशि काटने का विकल्प देते हैं जो ईसीएस के जरिये होता है। बदलाव की स्थिति में आपको इसे  भी अपडेट करवाना होगा।

06 महीने कम से लगेंगे बैंकों की विलय प्रक्रिया पूरी होने में बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार।

बैंक कर्मचारी  पर यह होगा असर
देश के 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने के फैसले के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वस्त किया है कि किसी बैंक कर्मचारी की छंटनी नहीं की जाएगी। हालांकि, काम के समय में बदलाव हो सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय होने के बाद इन दोनों बैंकों के कर्मचारियों को काम के घंटे मे बदलाव करने को कहा गया था। विलय से पहले देना बैंक और विजया बैंक में काम करने का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे था जिसे बदलकर सुबह 9 बजे से  शाम 4 बजे कर दिया गया था। इसके अलावा तबादले के लिए बैंक कर्मचारियों को तैयार रहना होगा। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को किसी दूसरे शाखा या शहर में तबादला किया जा सकता है।

निवेशक शेयरधारक पर यह होगा असर
उदाहरण  से इस तरह समझें, अगर आपके पास सिंडिकेट या ओरियंटल बैंक का शेयर है तो इसके बाद आपको केनरा बैंक या पीएनबी का शेयर मिलेगा। नया शेयर आपके निवेश मूल्य के आधार पर विनिमय अनुपात साझा कर जारी किया जाएगा। इसको ऐसे समझें कि अगर आपके पास मौजूदा बैंक के 100 शेयर हैं जिसका बाजार मूल्य 15,000 रुपये है तो प्रति शेयर भाव 150 रुपये हुआ। वहीं नए बैंक के शेयर मूल्य 300 रुपये है तो आपको 50 शेयर जारी किए जाएंगे। बैंकों के विलय के बाद डीमैट और ट्रेडिंग खाताधारकों पर भी असर होगा। बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे बैंक (विलय होने वाले बैंक) के खाताधारकों पर ज्यादा असर होगा। बैंक दस्तावेज जमा करने की सूचना भी देंगे।

कारोबारी पर यह होगा असर, बदलनी होगी जानकारी
आप कारोबारी हैं और बैंक में आपका चालू खाता (करंट अकाउंट) है तो उसमें किसी भी तरह के बदलाव की सूचना उन सभी संस्थानों को देनी होगी जिनसे आप कारोबार करते हैं। बैंकों के विलय से चालू खाता में जमा रखने की सीमा और शुल्क में बदलाव हो सकता है। इसके साथ ही बड़ी लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले आरटीजीएस की बदली जानकारी साझा करनी पड़ सकती है। वहीं, चेकबुक, पासबुक में भी नए बैंक के अनुसार बदलाव करना होगा। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अभी पुराने बैंक का ही इस्तेमाल होता रहेगा। जब विलय प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो नए बैंक का एटीएम, चेकबुक, पासबुक आदि जारी किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए बैंक से आपको सूचना मिलेगी।

बदलाव पर एक नजर
* 10 सरकारी बैंकों को मिलकार चार बड़े बैंक बनाए जाएंगे।
* 51 फीसदी से हिस्सेदारी कम नहीं होगी बैंकों में सरकार की।
* 70 हजार करोड़ की पूंजी सरकारी बैंकों को देगा केंद्र।
* 12 अंकों का बैंक खाता है तो वह 16 नंबर में बदल सकता है।
* 27 थी सरकारी बैंकों की संख्या साल 2017 में।
* 05 लाख करोड़ का कर्ज बांटने में सक्षम होंगे सरकारी बैंक।

सलाह
1. विलय के नाम पर फर्जीवाड़े से बचें
रिजर्व बैंक की पिछले दिनों जारी सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों में फर्जीवाड़ा बढ़ा है। बैंकों के विलय के बाद फर्जीवाड़ा करने वाले इसका भी फायदा उठा सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के एक शीर्ष बैंकर ने कहा कि बैंकों के विलय के बाद यदि किसी उपभोक्ता को बैंक के नाम पर खाता नंबर और उससे जुड़ी जानकारी के लिए कॉल आती है तो सावधान हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कॉल का जवाब नहीं दें और ईमेल पर भी कोई जानकारी मांगी जाती है या फोन पर कोई लिंक भेजा जाता है तो उसे भी क्लिक नहीं करें। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सीधे बैंक की शाखा में जाकर जानकारी की जांच करें।

2. घबराने की जरूरत नहीं
बैंकों के विलय के बाद रातों-रात सभी चीजें नहीं बदलने जा रही हैं और इसको लेकर उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। एक शीर्ष बैंकर ने कहा कि इसमें वक्त लगेगा और प्रथमिकता एवं सुविधा के आधार पर इसे धीरे-धीरे इस तरह लागू किया जाएगा जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं हो। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत के मुताबिक बैंक भी अपने उपभोक्ताओं से बदलाव के लिए संपर्क करेंगे।

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