वाराणसी में लॉक डाउन का पालन करते हुए ब्रेथ ईजी ने किया वर्चुअल चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन

वाराणसी में लॉक डाउन का पालन करते हुए ब्रेथ ईजी ने किया वर्चुअल चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन

श्रीनारद मीडिया ब्यूरो प्रमुख / सुनील मिश्रा वाराणसी (यूपी)

वाराणसी / ब्रेथ ईजी चेस्ट फाउंडेशन फॉर ह्यूमैनिटी व ब्रेथ ईजी टी.बी, चेस्ट, एलर्जी केयर अस्पताल (अस्सी, वाराणसी) के संयुक्त तत्वाधान से 27 जून 2020 को ऑनलाइन के मध्यम से एक वर्चुअल चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमे विश्व विख्यात चिकित्सकों ने वर्तमान स्थिति के सबसे गंभीर व महत्वपूर्ण विषय को चुनते हुए कोरोना व गंभीर श्वांस की बीमारी पर परिचर्चा की I इस वर्चुअल कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. रनदीप गुलेरिया (डायरेक्टर, एम्स) व राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत बी.सी रॉय अवार्ड – डॉ राजेंद्र प्रसाद (प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष – एरा मेडिकल कॉलेज) के साथ-साथ देश के अलग अलग हिस्से से जैसे लखनऊ से डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी (प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष के.जी.एम्.यू), डॉ. तारिक महमूद (प्रयागराज मेडिकल कॉलेज), डॉ आशीष टंडन (प्रयागराज), डॉ. ऋचा गुप्ता (सी.एम्.सी, वेल्लोर), डॉ प्रिन्स जेम्स (सी.एम्.सी, वेल्लोर), डॉ. मोनिका गुप्ता (वाराणसी), डॉ अलोक सिंह (वाराणसी), डॉ. एम्.के श्रीवास्तव (वाराणसी), व डॉ. एस.के पाठक ( ओर्गानिज़िंग सेक्रेटरी, रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव कांफ्रेंस 2020) से जुड़े व परिचर्चा की I रेस्पिरेटरी कानक्लेव कांफ्रेंस 2020 के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेट्ररी व् वरिष्ठ श्वांस एवं टी.बी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के पाठक ने बताया कि “ब्रेथ ईजी के प्रयास से भारत में पांचवी बार इस चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया हैं, परन्तु लॉकडाउन की वजह से ये कार्यक्रम पहली बार वर्चुअल किया गया है, जिसका उद्देश्य चिकित्सको को गंभीर श्वांस बीमारी के प्रति नयी पद्दिती की जानकारी के बारे में अवगत कराना हैं, जिससे मरीजों को श्वांस जैसी गंभीर बिमारियों से कम समय तथा कम खर्च में आसानी से ईलाज मिल सके I”एम्स के डायरेक्टर डॉ रनदीप गुलेरिया ने बताया कि –“इस चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन, ब्रेथ ईजी के प्रयास से एक सराहनीय कार्य हैं I यह चिकित्सीय संगोष्ठी पूर्वांचल के चिकित्सको को गंभीर श्वांस के बीमारी के प्रति अपडेट करने में सहायक होगी I विगत दस वर्षो में ब्रेथ ईजी व डॉ. एस.के पाठक का चिकित्सीय क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु भारत सरकार के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की मुलाकात एक गौरवपूर्ण बात हैं I”डॉ. गुलेरिया ने आगे बताया कि –“लॉक डाउन के बाद भी ऐसे चिकित्सीय संगोष्ठी ऑनलाइन के मध्यम से लगातार होने चाहिए, जिसमे चिकित्सकों को नयी पद्दिती द्वारा गंभीर श्वांस के मरीजों को अवगत कराया जाता हैं, चुकी इस समय कोरोना ने पुरे विश्व सहित भारत को भी अपने आगोश में कर रखा है। और अब तो धीरे धीरे सबकुछ अनलॉक भी हो रहा है। इसलिए हमे खुद ही अब अपनी सुरक्षा का जिम्मा लेना होगा व डब्लू.एच.ओ द्वारा निर्देशित चीजो. का पालन करना होगा।डॉ. राजेंद्र प्रसाद (प्रो. एवं विभागाध्यक्ष – एरा मेडिकल कॉलेज) ने बताया कि – “श्वसन चिकित्सा – श्वसन पथ से सम्बन्धित रोगों की चिकित्सा की विशिष्टता का क्षेत्र है।यह आन्तरिक चिकित्सा की एक शाखा है। तथा सघन देख-भाल चिकित्सा से संबंधित है।इसमें प्रायः ऐसे रोगियों की चिकित्सा करनी होती है। जिनको जीवनरक्षक और यांत्रिक श्वसन की आवश्यकता होती है। श्वसनचिकित्सक विशेष रूप से न्युमोनिया, दमा (आस्थमा), क्षयरोग, एम्फीसेमा, छाती के जटिल संक्रमणों आदि की चिकित्सा के लिए प्रशिक्षित किये जाते हैं।रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव कांफ्रेंस 2020 के ओर्गैनिज़िंग सेक्रेटरी डॉ. एस.के पाठक ने ऑनलाइन के मध्यम से जुड़े हुए सभी मेडिकल एवं नॉन मेडिकल लोगो को जुड़ने के लिए धन्यवाद किया और बताया –“लॉक डाउन होना निष्क्रिय होना नही है, हमे हर तरफ मौको को तलाशते रहना चाहिए। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए इस कार्यक्रम को ओर्गानिज़े करना मेरे लिए व मेरे टीम मेम्बेर्स के लिए बड़ी गर्व की बात है I आशा करता हूँ भविष्य में भी हमेशा कुछ नया करता रहूँगा जिससे हम सभी का ज्यादा से ज्यादा भला हो सके I

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