कांग्रेस को हर स्तर पर अपने कामकाज के तरीके को बदलना होगा-गुलाम नबी आज़ाद

कांग्रेस को हर स्तर पर अपने कामकाज के तरीके को बदलना होगा-गुलाम नबी आज़ाद

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक हम हर स्तर पर अपने कामकाज के तरीके को नहीं बदलेंगे, चीजें नहीं बदलेंगी। हमारे लोगों का ब्लॉक स्तर पर, जिला स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन टूट गया है। जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है।

कांग्रेस पार्टी लगातार आंतरिक कलह से जूझ रही है। लगातार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से बयानबाजी का दौर जारी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भी अपनी राय रखते हुए साफ किया है कि वह बिहार में पार्टी के प्रदर्शन का आरोप नेतृत्व पर नहीं लगा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने पार्टी नेताओं की व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं कोविड-19 महामारी के कारण गांधी परिवार को क्लीन चिट दे रहा हूं क्योंकि वे अभी बहुत कुछ नहीं कर सकते। हमारी मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वे हमारी अधिकांश मांगों के लिए सहमत हो गए हैं। हमारे नेतृत्व में चुनाव होने चाहिए यदि वे राष्ट्रीय विकल्प बनना चाहते हैं और पार्टी को पुनर्जीवित करना चाहते हैं।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आजाद ने कहा ‘जब तक 5 स्टार कल्चर को खत्म नहीं किया जाता, कोई भी चुनाव नहीं जीत सकता है। जब तक हम हर स्तर पर अपने कामकाज के तरीके को नहीं बदलेंगे, चीजें नहीं बदलेंगी। हमारे लोगों का ब्लॉक स्तर पर, जिला स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन टूट गया है। जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है, वो समझता है बस मेरा काम ख़त्म हो गया, काम तो उस समय से शुरू होना चाहिए। हमारा ढ़ांचा कमजोर है, हमें ढ़ांचा पहले खड़ा करना पड़ेगा। फिर उसमें कोई भी नेता हो चलेगा। सिर्फ नेता बदलने से आप कहेंगे कि पार्टी बदल जाएगी, बिहार आएगा, मध्य प्रदेश आएगा, उत्तर प्रदेश आएगा, नहीं वो सिस्टम से बदलेगा।

सलमान खुर्शीद ने नेतृत्व संकट नकारा

इससे पहले पार्टी नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि पार्टी में नेतृत्व का कोई संकट नहीं है और सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के लिए पार्टी में पूरे सहयोग को ‘‘हर वह व्यक्ति देख सकता है, जो नेत्रहीन नहीं है।’’ गांधी परिवार के निकट समझे जाने वाले नेताओं में शामिल खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस में विचार रखने के लिए पर्याप्त मंच उपलब्ध है और पार्टी के बाहर विचार व्यक्त करने से इसे ‘‘नुकसान पहुंचता’’ है।

भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 और उसके बाद सरकार बनाने में विफल रहने वाले महागठबंधन के लिए कांग्रेस को ‘बहुत बड़ी शर्मिंदगी’ करार दिया. साथ ही कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा के साथ सीटों की साझेदारी के दौरान ‘अधिक यथार्थवादी’ रुख अपनायेगी.

दीपांकर भट्टाचार्य ने  कहा कि उन्हें पक्का यकीन है कि सबसे पुरानी पार्टी (कांग्रेस) भी बिहार में अपने खराब प्रदर्शन की समीक्षा कर रही होगी. वह राजनीतिक रूप से संवेदनशील पश्चिम बंगाल, जहां भगवा ब्रिगेड सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी प्रयास कर रहा है, में सीटों के बंटवारे के दौरान वह युक्तिसंगत रहेगी.

बिहार के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए श्री भट्टाचार्य ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी को पश्चिम बंगाल में माकपा-कांग्रेस गठबंधन में अगुवा नहीं होना चाहिए.’ हाल के बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों की साझेदारी के तहत कांग्रेस ने कुल 243 सीटों में 70 पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जबकि वह महज 19 सीट ही जीत पायी.

दूसरी तरफ, महागठबंधन के घटक भाकपा (माले) 19 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी और उसने 12 सीटें जीतीं. उधर, भाकपा और माकपा ने भी दो-दो सीटें हासिल कीं. ऐसा नहीं है कि केवल बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन में गिरावट आयी, बल्कि वर्ष 2014 के बाद से लोकसभा चुनाव एवं हाल के वर्षों में विधानसभा चुनावों में उसकी सीटें घटी हैं.

श्री भट्टाचार्य ने कहा, ‘कांग्रेस, बिहार में महागठबंधन के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी थी. सीटों का बंटवारा अधिक यथार्थवादी होना चाहिए था. कांग्रेस की सफलता दर सबसे कम रही. मुझे यकीन है कि पार्टी भी अपने प्रदर्शन की समीक्षा कर रही होगी.’ उन्होंने कहा, ‘मैं आशा करता हूं कि कांग्रेस हाल ही में संपन्न बिहार के चुनाव से सबक लेगी और पश्चिम बंगाल में सीटों के बंटवारे के दौरान अधिक यथार्थवादी रुख अपनायेगी.’

वैसे भाकपा माले पश्चिम बंगाल में माकपा, भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी के वाममोर्चा का हिस्सा नहीं है, लेकिन वह राज्य में कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारती रही है. हालांकि, उसे सफलता नहीं मिली है. बिहार में अपने प्रदर्शन से उत्साहित चरमपंथी वाम संगठन इस बार फिर बंगाल में चुनाव में और जोश-खरोश से उतरने की तैयारी कर रहा है.

दीपांकर भट्टाचार्य से जब पश्चिम बंगाल में भाजपा को टक्कर देने के लिए भाकपा माले और तृणमूल कांग्रेस के बीच किसी सहमति की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने उसका जवाब नहीं में दिया. कहा कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाकपा माले पश्चिम बंगाल में माकपा नीत गठबंधन का हिस्सा होगी. बंगाल में अगले वर्ष अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं.

Rajesh Pandey

Leave a Reply

Next Post

बच्चों को अनाथ कर चल बसीं रेशम

Sun Nov 22 , 2020
बच्चों को अनाथ कर चल बसीं रेशम # डायरिया पीड़ित थी मवि, ककरहट की रसोइया, पति 2013 में ही चल बसा था श्रीनारद मीडिया‚ विपिन कुमार‚ दरियापुर‚ सारण (बिहार) सारण जिले के दरियापुर प्रखंड क्षेत्र का ककरहट पंचायत! छठ व्रत का उत्सवी वातावरण शुक्रवार को उदास हो गया, जब रोते […]

Breaking News

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
error: Content is protected !!