कड़े कदमों के बावजूद दुनियाभर में Coronavirus से हो सकती हैं 18 लाख से ज्यादा मौतें

कड़े कदमों के बावजूद दुनियाभर में Coronavirus से हो सकती हैं 18 लाख से ज्यादा मौतें.

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज के एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में व्यापक रूप से कोरोनोवायरस महामारी से होने वाली मौत की संख्या दुनिया भर में 18 लाख तक पहुंच सकती है। गुरुवार को प्रकाशित किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि वायरस को रोकने के लिए किए गए तेज और कड़े उपायों के बावजूद यह संख्या बढ़ सकती है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर सरकार परीक्षण, क्वारेंटाइन और व्यापक सामाजिक मेल-जोल को रोकने सहित कठोर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को अपनाने के लिए तेजी से कार्य करती है, तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

इंपीरियल कॉलेज लंदन की ताजी रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या पांच लाख से ऊपर हो चुकी है और मृतकों का आंकड़ा 22,000 से अधिक हो चुका है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के पिछले शोध के बाद ब्रिटिश सरकार ने वायरस पर अंकुश लगाने के प्रयासों को बढ़ा दिया था

इंपीरियल कॉलेज मॉडलिंग सिमुलेशन वायरस की गंभीरता के बारे में वर्तमान आंकड़ों पर आधारित है। इसकी संक्रामकता और अनुमानित मृत्यु दर का अंदाजा रिपोर्ट में मौजूदा आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर सरकारों ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया होता और COVID-19 को अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो इस साल के अंत तक धरती पर मौजूद लगभग सभी लोग इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं और करीब 4 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है।

रिपोर्ट में सरकारों की प्रतिक्रिया के विभिन्न स्तरों को दिखाया गआ है, जिसमें सहज सामाजिक दूरी बनाने से लेकर कुछ सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में वर्तमान में लागू किए गए कठिन लॉक डाउन उपायों तक को शामिल किया गया है, जिन्हें 202 देशों में लागू किया गया है।

पिछले साल के अंत में चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में फैल चुका है। कोरोना के सबसे अधिक पॉजिटिव केसों के मामलों में अमेरिका पहले स्थान पर पहुंच गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 81,321 हो गई है।

तकरीबन 33 करोड़ की जनसंख्या वाले अमेरिका ने कोरोना वायरस के मरीजों के मामले में चीन और इटली को पीछे छोड़ दिया है। इटली में अब तक 80,539 और चीन में 81,285 कोरोना के पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।

न्यूयॉर्क इस बीमारी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। शहर के विशाल कन्वेंशन सेंटर को अस्पताल में बदला जा रहा है। राज्य में 350 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। यूरोप में स्पेन ऐसा देश है, जहां इसका प्रकोप सबसे तेजी से फैल रहा है।

वहीं, दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या गुरुवार को पांच लाख के पास पहुंच गई। इस बीच 33 लाख अमेरिकियों ने एक सप्ताह के अंदर बेरोजगारी लाभ के लिए आवेदन किया है। इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का पता लगता है।

इस बीमारी के कारण यूरोप और न्यूयॉर्क की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गयी हैं। अमेरिका में कारोबारियों,अस्पतालों और सामान्य नागरिकों की मदद करने के लिए अभूतपूर्व 2,200 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज को मंजूरी दी गयी है। इस योजना में हर वयस्क को 1,200 डॉलर और बच्चे को 500 डॉलर दिए जाएंगे।

दुनिया भर में कम से कम 2.8 अरब लोग यानी धरती की एक तिहाई से अधिक आबादी पर लॉकडाउन की वजह से यात्रा करने पर रोक लगी हुई है। उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरस के खिलाफ लड़ाई में कीमती समय बर्बाद करने के लिए दुनिया के नेताओं को फटकार लगाई और कहा कि हमने पहले मौके को गंवा दिया और अब यह दूसरा अवसर है जिसे नहीं गंवाना चाहिए। इस बीमारी के कारण 22,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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