अंधेरा गहराने का संकेत तो नहीं!

अंधेरा गहराने का संकेत तो नहीं!

श्रीनारद मीडिया, पटना (बिहार):
वर्षों से हम सबसे जुड़े पत्रकार आशुतोष कुमार आर्य हिंदुस्तान अख़बार के नालंदा के ब्यूरो चीफ हैं। अश्विनी उनका इकलौता पुत्र था। बमुश्किल 16 वर्ष की उम्र होगी। उसे क्रूरता पूर्वक मार डाला गया। मारने के पहले आंखे फोड़ दी गई थीं। अब अश्विनी कभी नहीं लौटेगा। उसकी सिर्फ यादें रह गई हैं। घरवाले इस सदमें से पता नहीं कब उबरेंगे।

हालांकि जो जानकारी सामने आ रही है उसमें इस नृशंस हत्या में किसी नजदीकी परिजन के शामिल होने की बात कही जा रही है। जितनी जल्द हत्यारे पकडे जायें, उतना अच्छा। लेकिन यह घटना यह साबित करती है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उनमें शासन और न्यायपालिका का भय नहीं है। उन्हें लगता है कि सब कुछ आसानी से अपने पक्ष में कर लेंगे। यह धारणा सम्पूर्ण व्यवस्था के लिए भयावह है।

हमारे लिए ,आपके लिए ,राजनेताओं के लिए , न्यायपालिका के लिए और पुलिस के लिए भी। इसलिए कानून का शासन स्थापित करना और अपराधियों में उसका खौफ पैदा करना जरुरी है। तभी हम सभ्य कहलाने के अधिकारी होंगे। जहाँ कानून का खौफ न हो वहां जंगलराज आते देर नहीं लगती।

अभी कुछ ही दिनों पूर्व बिहार के पुलिस प्रमुख गुप्तेश्वर पांडेय ने सभी जिलों के एस पी को पत्र लिखकर पत्रकारों और उनके परिवार की सुरक्षा और सम्मान पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया था। अभी शायद 10 दिन भी नहीं बीते होंगे कि नालंदा से पत्रकार- पुत्र की हत्या की खबर आई है। नालंदा मुख्यमंत्री का गृह जिला है। यहां से ऐसी खबर की उम्मीद शायद डीजीपी को भी नहीं होगी। मगर डीजीपी महोदय से एक सहज सवाल तो बनता है, क्या यह अंधेरा गहराने का संकेत नहीं है?

Leave a Reply