महाभारत कालीन   अर्जुन के द्वारा स्वर्ग लोक से लाये वृक्ष में खिले फूल

महाभारत कालीन   अर्जुन के द्वारा स्वर्ग लोक से लाये वृक्ष में खिले फूल

श्रीनारद मीडिया‚ लक्ष्मण सिंह‚ बाराबंकी यूपी:

बाराबंकी  जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूरी तहसील क्षेत्र सिरौलीगौसपुर से लगभग 4 किलोमीटर दूर बरौलिया में स्थित वृक्ष परिजात धाम महाभारत कालीन का बताया जा रहा है। कुंतेश्वर धाम में भगवान शिव की पूंजा करने के लिए माता कुंती ने स्वर्ग से पारिजात पुष्प लाऐ जाने की इच्छा अपने बेटे अर्जुन से जाहिर की थी।
माता की इच्छाअनुसार अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लाकर किन्तूर स्थित बरौलिया गांव में स्थापित कर दिया। इसके पुष्प जून, जुलाई, के महीने में लगते हैं। इस वृक्ष के पुष्प रात्रि में ही पुष्पित होते हैं और प्रातः काल मुरझा जाते हैं रात्रि के समय पुष्प पुष्पित होने पर इसकी सुगंध दूर-दूर तक फैल जाती है लोग इसे आस्था स्वरूप पूंजते हैं.।
यह पारिजात वृक्ष लगभग 6 हजार 6 सौ 72 वर्ष पुराना बताया जा रहा है।


इसकी पौराणिक मान्यता यह है कि एक बार श्रीकृष्ण अपनी पटरानी रुकमणी के साथ व्रतोद्यापन समारोह में रैवतक पर्वत पर आ गए। उसी समय नारद अपने हाथ में पारिजात का पुष्प लिए हुए आ गये। नारद ने इस पुष्प को श्रीकृष्ण को भेंट कर दिया। श्रीकृष्ण ने इस पुष्प को रुकमणी को दे दिया और रुकमणी ने इसे अपने बालों के जूड़े में लगा लिया इस पर नारद ने प्रशंसा करते हुए कहा कि फूल को जूड़े में लगाने से रुकमणी अपनी सौतों से हजार गुना सुन्दर लगने लगी हैं। पास में खडी़ हुई सत्यभामा की दासियों ने इसकी सूचना सत्यभामा को दे दी। श्री कृष्ण जब द्वारिका में सत्यभामा के महल में पहुंचे तो सत्यभामा ने पारिजात वृक्ष लाने के लिए हठ किया। सत्यभामा को प्रसन्न करने के लिए स्वर्ग में स्थित पारिजात पुष्प को लाने के लिए देवराज इंद्र पर आक्रमण करके पारिजात वृक्ष को द्वारिका ले और वहां से अर्जुन ने अपनी माता के लिए अपने.बाण से इस पारिजात वृक्ष को किन्तूर स्थिति बरौलिया में स्थापित कर दिया।

जिसे लोग देश विदेश से इसके दर्शन के लिए आते हैं लोगो का कहना है इसके दर्शन मात्र से दुख दूर होते हैं.।

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