बिहार में अबतक कोरोना के चार पॉजिटिव मामले मिले

 

बिहार में अबतक कोरोना के चार पॉजिटिव मामले मिले

राज्‍य में अब तक कोरोना संक्रमण के आाधा दर्जन मामले सामने आ चुके

श्रीनारद मीडिया‚ राकेश सिंह‚ स्टेट डेस्क

बिहार में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यहां दो दिनों में तीन नए मामले मिलने से हड़कम्‍प मच गया है। इसके पहले रविवार को एक ही दिन तीन मरीजों के मिलने और उनमें से एक की मौत के साथ कोराना ने बिहार में दस्‍तक दी थी। राज्‍य में अब तक कोरोना संक्रमण के आाधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं।पटना के राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इस्‍टीच्‍यूट (RMRI) के निदेशक डॉ. प्रदीप दास ने देर शाम बताया कि मुंगेर के रहने वाले दो लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। उनमें एक बच्चा और एक महिला शामिल है। दोनों शनिवार को मृत मुंगेर के कोरोना पॉजिटिव युवक के परिवार से हैं। उक्‍त युवक की मौत पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) में इलाज के दौरान हो गई थी।इसके एक दिन पहले मंगलवार को पटना के संक्रामक रोग अस्पताल (IDH) में भर्ती तथा गुजरात से लौटा पटना सिटी का एक युवक कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) मिला था। चिंताजनक बात यह है कि बिहार में कोरोना की जांच के एकमात्र अधिकृत संस्‍थान आरएमआरआइ की जांच में युवक की रिपोर्ट पहले निगेटिव आई थी। लेकिन बाद में बीमारी के लक्षणों को देखकर जांच के लिए जब सैंपल पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी लैब (National Virology Lab) भेजा गया, जब मंगलवार की देर शाम वहां की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्‍या आरएमआरआइ की अन्‍य किसी जांच रिपोर्ट में गलती नहीं हुई है?

मौत के बाद मिली युवक की जांच रिपार्ट

बीते रविवार को पटना एम्‍स में मृत मुंगेर का युवक कतर से लौटा था। पटना एम्‍स के निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंह के अनुसार उसकी मौत शनिवार को दिन में हुई, जबकि उसके कोरोना संक्रमित होने की रिपोर्ट शनिवार रात आई। एम्‍स प्रशासन ने जांच सैंपल भेजने में विलंब से इन्‍कार किया, उसके अनुसार रिपोर्ट आने में विलंब हुआ।

फिलहाल इन मरीजों का चल रहा इलाज

फिलहाल, बिहार के तीन कोरोना पॉजिटिव मरीजों में शामिल गुजरात से लौटा पटना सिटी का युवक आइडीएच में भर्ती है। आइडीएच में पहले से ही भर्ती स्कॉटलैंड से लौटे फुलवारीशरीफ निवासी कोरोना संक्रमित छात्र की तबीयत में सुधार हो रहा है। उधर, एम्‍स में भी एक मरीज का इलाज चल रहा है। बुधवार को जिन दो लोगों के सैंपल कोरोना पॉजिटिव पाए गए, वे मुंगेर के कोरोना संक्रमित मृतक के स्‍वजन होने के कारण आइसोलेशन में हैं। अब उनका इलाज आरंभ होगा। कोरोना पॉजिटिव मुंगेर की महिला और बच्‍चे के सैंपल वहीं से आए थे। उन्‍हें वहां 39 लोगों के साथ आइसोलेशन में रखा गया है।

 

कोरोना के खिलाफ चल रही जंग को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। वहीं बिहार में अबतक कोरोना के चार पॉजिटिव मामले मिले हैं, जिनमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है। इसके बाद बिहार सरकार ने कोरोना के संक्रमण के मद्देनजर एहतियातन कई सख्त कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां पूरे बिहार में लॉकडाउन को लेकर पुलिस की टीम अपना काम मुस्तैदी से कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर भी संकट की घड़ी में मुस्तैदी से अपने कर्तव्य का निर्वहण करने में लगे हैं।

डॉक्टरों के भरोसे ही आज राज्‍य का हर एक नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है, लेकिन जब डॉक्टर ही जब सुरक्षित ना हों तो बिहार कोरोना के खिलाफ कैसे जंग जीत सकेगा? डॉक्टर सोशल मीडिया पर अपने असुरक्षित होने की बात बता रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि वे मरीज का इलाज कैसे कर सकेंगे? पटना मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल (पीएमसीएच) तथा कोरोना अस्‍पताल घोषित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल (एनएमसीएच) में तो कोरोना से बचाव के सेफ्टी किट ही उपलब्‍ध नहीं हैं। वे एचआइवी किट के सहारे इलाज कर रहे हैं।पटना के पीएमसीएच की एक डॉक्टर ने फेसबुक के जरिए सरकार से गुहार लगाई है और कहा है कि अगर अस्पताल में कोरोना के लिए पीपीई किट के बदले हमें अगर आप एचआइवी किट देंगे तो हम कैसे इस बीमारी से खुद को सुरक्षित रख सकेंगे और कैसे किसी मरीज का इलाज कर सकेंगे।पीएमसीएच की रेसिडेंट डॉक्टर बिनीता चौधरी ने ये पोस्ट लिखा है और अपनी व्यथा सुनाई है। उन्होंने लिखा है कि सुसाइड स्क्वॉड # इमरजेंसी में काम कर रहा है @ पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल, बिहार .. हमें पीपीई की जगह hiv किट दी जा रही है। इससे हम कोरोना के रोगी का इलाज करने जा रहे हैं !! यह वास्तव में एक आत्महत्या है जिसे हमने खुद के लिए चुना है। एक बार जब हम संक्रमित हो जाते हैं, तो हम दूसरों को भी संक्रमित कर देंगे .. कोई सुविधाएं नहीं, कोई उपकरण नहीं, कोई प्रक्षेपास्त्र नहीं खाली बोतलों से अधिक, जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं !!

जहां चिकित्सा अधीक्षक अपने दोपहर के भोजन के लिए बिहार के सीएम के साथ अधिक चिंतित हैं, तो हमें लगता है कि हम पर एफआईआर की धमकी दी जा रही है यदि हम इस स्थिति में ड्यूटी करने से इनकार करते हैं, तो अपना काम करते हुए खुशी से आत्महत्या कर लेते।

तो वहीं, नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की एक जूनियर डॉक्टर ने दैनिक जागरण को फोन पर बताया कि हमारे अस्पताल को कोरोना अस्पताल घोषित कर दिया गया है, लेकिन इस अस्पताल में कोई सुविधा अबतक नहीं दी गई है। हमारे पास पीपीई किट नहीं है और हमने जब इसकी मांग की तो अजीबोगरीब बात कही गई कि आप पॉजिटिव मरीज का इलाज नहीं कर रहे हैं तो आपको किट की चिंता क्यों है?

डॉक्टर ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि जब कोई मरीज जांच के लिए आता है, माना कि उसे सर्दी-जुकाम फ्लू ही हुआ है, पर किसी के चेहरे पर तो लिखा नहीं है कि वो कोरोना पॉजिटिव है या नहीं। हमारी पहली जिम्मेदारी बनती है कि उसकी जांच करें। उसका इलाज करें। हम डॉक्टर हैं और हम अपना कर्तव्य निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन अगर किसी योद्धा को बिना हथियार के युद्ध के मैदान में भेज देंगे तो वो कैसे लड़ाई लड़ेगा?

उन्‍होंने कहा कि हमारी इतनी मांग है कि हमें किट मुहैया करायी जाए, क्योंकि हम भी इंसान हैं और हम भी कोरोना से संक्रमित हो सकतेे हैं। अस्पताल की जो बुनियादी जरूरते हैं उनपर ध्यान दिया जाए।

जूनियर डॉक्टर ने बताया कि हमने अस्पताल प्रबंधन से मांग भी की है कि हमें भी क्वारेंटाइन की अनुमति दी जानी चाहिए। इस संबंध में डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भी लिखा है।बता दें कि पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को कोरोना अस्पताल बना दिया गया है। बिहार में कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी।

एनएमसीएच में सिर्फ कोरोना संदिग्ध और इस बीमारी से पीड़ित मरीजों का ही इलाज होगा। अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों को इलाज के लिए पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में शिफ्ट किया जाएगा। सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया है। मंगलवार शाम से ही फैसले को लागू कर दिया गया है।

इसके बाद पीएमसीएच और एनएमसीएच के डॉक्टरों की इस गुहार पर स्वास्थ्य विभाग को ध्यान देना चाहिए।

कोरोना से बिहार में एक मौत, दो पॉजिटिव

बिहार में कोरोनावायरस की पहली खबर मौत से आई। रविवार को एम्स में इस बीमारी से एक युवक की मौत हो गई थी। दो मरीज की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। रविवार को भी 127 लोगों की रिपोर्ट आई जिसमें सभी निगेटिव हैं।

31 मार्च तक लॉकडाउन करने का फैसला

बता दें कि कोरोनावायरस को लेकर बिहार सरकार ने 31 मार्च तक राज्य को लॉकडाउन करने का फैसला किया है। हालांकि, डेयरी, दवा दुकान और राशन की दुकानें खुली रहेंगी। आम लोगों को घर में बंद रहने का आदेश दिया गया है। लोग सिर्फ जरूरी काम से ही घर से निकल सकेंगे।

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