मनुष्य रूप धारण कर पृथ्वी पर आने के लिए देवता भी लालायित रहते है:मानस माधुरी अखिलेश्वरी देवी

मनुष्य रूप धारण कर पृथ्वी पर आने के लिए देवता भी लालायित रहते है:मानस माधुरी अखिलेश्वरी देवी

श्रीनारद मीडिया‚ ए गुप्ता‚ तरैया‚ सारण (बिहार)

प्रखण्ड के परौना गाँव में आयोजित शतचण्डी महायज्ञ के पाँचवे दिन प्रवचन के दौरान मानस माधुरी अखिलेश्वरी देवी ने कहा कि मनुष्य रूप धारण कर पृथ्वी पर आने के लिए देवता भी लालायित रहते है।और सोचते है कि अगर मानव रूप धारण कर पृथ्वी पर जाते तो सतसंग सुनने को मिलता और राम नाम कहने तथा भक्ति करने को मिलता।राम नाम कहने से ही शरीर का विकार दूर हो जाता है।”रा”के कहने से मन के विकार(मन का मैल)शरीर से बाहर निकल जाता है।और “म”कहने से दोनो ओष्ठ बन्द हो जाते है तो बाहर का विकार मन के अंदर नही जाता है।इतनी राम नाम की महिमा बताई गयी है।

 

 

राम नाम की महिमा की जाप  शंकर भगवान भी काशी में किये थे।जिस जाप से सभी जीवों को मुक्ति मिली थी।काशी में मरने से मनुष्य परमगति को प्राप्त करता है।मगर सबको यह सौभाग्य नही मिलता है।यह सौभाग्य पूर्व जन्म में किये गए दान-पुण्य और भक्ति के आधार पर प्राप्त होता है।अभी जो समय है वह चला जायेगा और जो समय चला जायेगा वह फिर नही आयेगा।जिंदगी भर काम करते रह गये मगर काम खत्म नही होगा।जबतक जिन्दगी है।काम से फुरसत नही होगा।इसलिए काम से ऐसा समय निकालिए की प्रेम हो जाय राम से।यह मानव शरीर अत्यंत ही दुर्लभ है।तुलसी दास जी भी रामायण में लिखे है।बड़े भाग मानुष तन पावा।सुर,नर, मुनि सब बखान गावा।इसलिए मानव तन मिला है तो भगवान की भक्ति कर लीजिए।भक्ति ही आपको इस संसार रूपी भवसागर से पार निकालेगा।राम नाम की महिमा से परमगति प्राप्त होता है।तथा जीवन सर्वदा सुखी व आनन्दमय होता है।इस दुनिया मे आप सबसे मिलिए भाई न जाने किस रूप में मिल जाय नारायण।नारायण इस यज्ञ में भी आये है।आपके आस-पास ही है मगर आप उन्हें पहचान नही पा रहे है।इसके लिए आपके मन मे प्रेम,श्रद्धा व अनुराग चाहिए।भगवान प्रेम से प्रकट होते है।जिनके पास श्रद्धा,प्रेम व अनुराग नही है वह जिन्दगी भर इस दुनिया मे भटकते रहते है।प्रेम,श्रद्धा,अनुराग दुकान में नही मिलते है यह हृदय से उत्पन्न होते है।जबतक मन मे अनुराग नही होगा प्रभु नही मिलेंगे।स्वर्ग भी यही है और नर्क भी यही है।जो सद्गुरु के दिये गए ज्ञान से भक्ति करते है।उन्हें प्रभु की कृपा प्राप्त होती है।उनके लिए स्वर्ग यही है।हमे सद्गुरु की जरूरत है।वही हमे दिव्य दृष्टि देंगे।जिसकी सहायता से हम अपने मन के जरिये दूसरे के मन की बात जान जायेंगे।तब हमें प्रभु की कृपा प्राप्त होगी।जो मनुष्य भगवान की भक्ति नही करता है वह विभिन्न जोनियों में जन्म लेकर भटकता रहता है।जबतक आपकी आँखे खुली है तबतक सब आपका है।जब आपकी आँख बंद हो जाता है तो सारा संसार शून्य हो जाता है।सब यही पर रह जाता है जो आँख से दिखाई देता है।जो आँख से दिखाई नही दे रहा है वही आपका अपना है।भगवान राम आपके अपने है।यहाँ जीवित रहने पर भी वही सुख देते है और मरने के बाद भी वही सुख देते है।इसलिए मनुष्य को राम की भक्ति करनी चाहिए, धर्म करना चाहिए,संतो की सेवा करनी चाहिए तथा दान करना चाहिए एवं अच्छा आचरण करना चाहिए इससे जीवन सार्थक हो जाता है।

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