कोरोना काल में मंदा है पतंग का धंधा, चाइनीज़ मांझे की जगह बरेली के मांझे की हो रहे बिक्री

कोरोना काल में मंदा है पतंग का धंधा, चाइनीज़ मांझे की जगह बरेली के मांझे की हो रहे बिक्री

श्रीनारद मीडिया ब्यूरो प्रमुख / सुनील मिश्रा वाराणसी (यूपी)

वाराणसी / कोरोना काल के बाद पड़े मकर संक्रांति त्यौहार पर नभ में पतंग का संसार सा वाराणसी के आसमान पर नज़र आता है, पर इस वर्ष कोरोना काल में पतंग का धंधा मंदा नज़र आ रहा है। आकाश से पतंग गायब है और दुकानों से खरीदार। शहर के चौक, औरंगाबाद आदि प्रमुख पतंग बाज़ारों में ग्राहकों की आवाजाही कम है और ना ही कोई डिमांड है। दुकानदारों की माने तो इस वर्ष बहुत काम डिमांड मिली है। इसके अलावा प्रतिबंधित चाइनीज़ मांझे की जगह एक बार फिर लोग बरेली के मंझे को तरजीह दे रहे हैं। कातिल मांझा दुकानों से गायब है।औरंगाबाद के दुकानदार राकेश गुप्ता ने बताया कि पतंग के सीज़न में हमारे पास इतना समय नहीं होता था कि हम किसी से बात कर पाए पर कोरोना काल और उसमे लॉकडाउन की वजह से लोगों की कमर टूट गयी है। लोग दुकानों पर कम से कम माल खरीदने के लिए आ रहे हैं। मांझे में लोग चाइनीज़ की जगह एक बार फिर बरेली का मांझा ले जा रहे हैं।विकास ने कहा कि चाईनीज़ मांझा बहुत खतरनाक है और जानलेवा, इसलिए हमने उसे अपनी दूकान में नहीं रखा है और आस पास के लोगों को भी उस ना बेचने के लिए समझाते हैं। वहीं दुकानदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि प्रिंटेड पतंगों और मोदी जी की पुरानी पतंगों को ही ग्राहक ले जा रहे हैं, जहां व्यापारी 5 से 10 ग्रूस माल ले जाता था आज एक या दो ग्रूस में सिमट गया है। मार्केट बहुत डाउन है लोग बस खानापूर्ति करने मार्केट में आ रहे हैं।

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