मेरे कार्यकाल में ही हुआ है अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज का संपूर्ण विकास – सुरेंद्र सिंह

मेरे कार्यकाल में ही हुआ है अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज का संपूर्ण विकास – सुरेंद्र सिंह

श्रीनारद मीडिया‚ प्रतीक कुमार सिंह‚ मोतिहारी‚ (बिहार):

मोतिहारी शहर के बीचों-बीच स्थित अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज में इंटर तक कि संबद्धता प्राप्त है । अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मेरे प्रचार्य बनने के पहले इस कॉलेज की मान्यता पर भी संकट के बादल मँडराते थे । कई बार यह कॉलेज बंद हुआ । परंतु जब से मैंने इस कॉलेज में प्राचार्य के पद पर कामकाज संभाला है , तब से इस कॉलेज का जीर्णोद्धार हुआ है । मेरे कॉलेज में आने के बाद ही छात्र-छात्राओं का नामांकन, परीक्षा, शिक्षण व्यवस्थाएं सुचारु रुप से चालू हुई है । मेरे द्वारा काफी संघर्ष करने के बाद कॉलेज को राजभवन से मान्यता प्राप्त हुई है । जिसके बाद अब कॉलेज की दशा एवं दिशाए बदल चुकी है । कॉलेज के धरातल पर मैंने कई कार्य किए हैं प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जब मैं महाविद्यालय का प्राचार्य बना तो महाविद्यालय भवन, व एक भी उपकरण नहीं था । सरकारी अनुदान भी नहीं मिलता था । न क्लासरूम थी, ना लैब , न द्वार , और ना कुछ व्यवस्था, सभी आवश्यक वस्तुओं का निर्माण व वयस्था मेरे द्वारा एवं कॉलेज के अध्यक्ष , सचिव एवं कुछ सदस्यों के सहयोग से पूर्ण हुआ । आज इस महाविद्यालय में कुल 40 कर्मचारी हैं । जिनका वेतन महाविद्यालय से हो रहे आए से दिया जाता है। अपनी आपबीती बताते हुए प्रचार्य ने बताया कि वर्ष 1991 में अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय में व्याख्याता के पद पर नियुक्त हुए। वहीँ वर्ष 2013 में वे महाविद्यालय के सचिव प्राचार्य बनाए गए । इनके कार्यकाल में इंटर काउंसिल से अस्थाई संबद्धता भी प्राप्त हुई जो पहले नहीं थी । वर्तमान व्यवस्था में अभी 3 मंजिला बिल्डिंग है ,शौचालय है, स्टाफ हैं । और साथ में कई सहयोगियों की भी उपलब्ध है । निकट भविष्य में विद्यालय प्रांगण में पार्किंग की सुविधाएं ,कॉलेज भवन, लैब एवं कई स्टाफ की नियुक्ति भी की जा रही है । साथ ही लाइब्रेरी एवं आगे कंप्यूटर के शिक्षक भी देने का प्रयास किया जायेगा। मेरा यह प्रयास होगा कि जिले में अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज के नाम की प्रसिद्धि प्राप्त हो । हालांकि प्राचार्य ने बताया कि मेरे ऊपर भी कई विरोधियों ने कई आरोप लगाए हैं जिससे मेरी छवि धूमिल हो । और मुझे प्राचार्य पद से हटाया जा सके। परंतु मैंने अपने कार्यों से छात्र-छात्राओं अभिभावकों एवं सदस्यों को संतुष्ट करने का काम किया है और आगे भी मैं कॉलेज के विकास के लिए हर संभव प्रयास करता रहूंगा।

shrinarad media

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