विरासत को जीवंत रखना हमारी परंपरा है -महराज बहादुर

विरासत को जीवंत रखना हमारी परंपरा है -महराज बहादुर
सबका मंगल हो हमारी कामना
राजपरिवार के रिस्तेदार व वीर धज्जु बाबू के वंशज हुए शरीक ।
हजारों लोगों ने दशहरा चक्र में की शिरकत ।
हाथी ,घोड़ा ,ऊंट व बघी दिला रहा राजसी परम्परा का याद ।
और जब महारानी ने दी थी सम्पूर्ण भारत के महिलाओं के लिये मेडिकल एड फण्ड ।
महराज के दर्शन के लिये आये है वृद्ध

श्रीनारद मीडिया‚  अंकित कुमार सिंह‚ जीरादेई सीवान (बिहार) :

 

सारण कमिशनरी का हथुआ राज अपनी विरासत के संयोजन में सदैव उत्सुक रहते है जिसका ज्वलंत उदाहरण विजयादशमी के चक्र पूजा के अवसर पर मंगलवार को देखने को मिला ।उत्सव की तैयारी में राज के कर्मचारी मनोयोग से लगे थे ।आगत अतिथियों की सत्कार राजकीय परम्परा के अनुरूप दिखी ,वही महराज बहादुर मृगेन्द्र प्रताप साही सभी अतिथियों से मिल उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे थे ।महराज के सगे संबंधियों के साथ वीर योद्धा बाबू धज्जु सिंह के वंशज आयोजन का शोभा बढ़ा रहे थे ।राज के दीवान एस एन शाही व अतुल शाही तथा संजय ठाकुर आयोजन का कमान संभाले थे ,सभी आगत अतितियों व राज्य कर्मचारी राजकीय पगड़ी बांधे थे ।महराज बहादुर आसन पर विराज पत्रकारों के सवाल के जबाब में कहा कि यह परम्परा हमारे पूर्वजों की पहचान है ,जब राजतन्त्र था तो खुद महाराजा नगर का भ्रमण कर आमजन का आशीष लेते व आशीर्वाद देते ।मृगेन्द्र प्रताप ने बताया कि महाराजा जब हाथी से चलते तो चारो तरफ ऊँची ऊँची दीवाल बना रहता था ताकि नगर के किसी भवन का आंगन दिखाई न दे ।उन्होंने बताया कि सभी प्रजा की इज्जत राजा की इज्जत होती थी ये हमारे पूर्वज राजाओं की पहचान थी ।महराज बहादुर ने सबके कल्याण के लिये मंगलकामना किया ।

 

 

 

ततपश्चात राजकीय परम्परा के द्वारा महारानी पूनम साही ने वैदिक मंत्रोचारण के साथ दशहरा चक्र में सम्मलित हाथी का पूजा अर्चना कर नगर भ्रमण के लिये रथ रवाना किया ।महराज बहादुर ,युवराज ,युवरानी ,राज रिस्तेदार अवधकिशोर राय व मृत्युंजय राय तथा धज्जु बाबू के वंशज मौके का शोभा बढ़ा रहे थे । पत्रकारों की टोली राजपरिवार की परंपरा व स्थापना को जानने को ले उत्सुक दिख रही थी ,उसी क्रम में मझौली राज से ताल्लुक रखने वाले अध्यापक ,इतिहासकार व वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार सिंह पर पत्रकारों की नजर पड़ी ।कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि इस राज की परंपरा सदियों पुरानी है ,उन्होंने बताया कि हथुआ राज की स्थापना तो मात्र 1791 ई में हुआ पर इसके पूर्व हुस्से पुर में राज था ।इतिहासकार ने बताया कि इस राज के पूर्वज मझौली राज से ही आते है तथा पूर्व में यह मल्ल जातियां थी जो भगवान बुद्ध के परम अनुयायी व भगवान के दाह संस्कार भी सम्पन्न कराये थे ।पत्रकारों के जबाब में श्री सिंह ने बताया कि हथुआ को पर्यटन बनाने की योजना राज परिवार की है इसके विरासत व बुद्ध से जुड़े तथ्यों को क्रमबद्ध कर दिया जाय तो यह नगर विदेशी पर्यटकों को भी लुभाने लगेगा क्योंकि विदेशी बौद्ध भिक्षुक मल्ल वंशज से काफी प्रेम करते है तथा उनका पूजा अर्चना भी करते है ।श्री सिंह ने बताया कि हथुआ राज परिवार आमजन व महिला कल्याण के लिये पूर्व से ही वचनबद्ध है उन्होंने बताया कि 1898 व 1900 ई में हथुआ महारानी ने भारत के महिलाओं के मेडिलक एड में एक लाख पच्चास हजार रुपये डोनेट की थी । उन्होंने बताया कि आज भी महारानी पूनम साही अपनी राजमाता की परम्परा को जीवंत रखने हेतु अनेक महिला कल्याण योजनाओं को संचालित कराकर जन कल्याण का कार्य करती रहती है जिनका अनुसरण करने में युवरानी व युवराज भी उत्सुक दिखे । इतिहासकार ने बताया कि गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद इसी राज परिवार के उपज है क्योंकि उनके पूर्वज चौधुर लाल जी इस राज में दिवान थे ।इस राज परिवार ने धज्जु बाबू के वंशजों को भी बड़ी बड़ी जागीर दी थी ।
वही इस चक्र कार्यक्रम को देखने नगर के एक वृद्ध इतना उत्सुक दिखे कि दौड़े हुए चक्र परिक्रमा की ओर जा रहे थे कि काश महराज का दर्शन हो जाता ,उनकी उत्सुकता व व्याकुलता इस बात को बता रहा है कि लोकतंत्र में भी राजा से प्रेम ,आदर की भावना जनता में है ।अब राजपरिवार का दायित्व बनता है कि अपनी पूर्वजों की धरोहर को कायम रख जनमानस की भावनाओं को संकल्प के साथ जोड़े रहे ।
नगर के परिक्रमा के बाद चक्र कार्यक्रम राजमहल परिसर में सम्पन्न हुआ जहाँ आगत अतितियों को अल्पाहार के बाद विदा किया गया ।इस मौके पर धज्जु बाबू के वंशज संजय सिंह ,प्रो गिरीश सिंह ,राजेश सिंह ,राजनारायण सिंह ,अंकित सिंह ,अंकुर सिंह ,गोलू सिंह ,वरिष्ठ पत्रकार क्रमशः धनन्जय सिंह ,शम्भू प्रसाद , कैलाश कश्यप ,बंटी ,सुरेंद्र कुमार जय सिंह ,सहित हजारों नगरवासी उपस्थित थे ।

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