सर्दी के मौसम में कान का रखें खास ख्याल, लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए

सर्दी के मौसम में कान का रखें खास ख्याल, लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सर्दी-खांसी के कारण संक्रमण का बढ़ना और यहां तक कि प्रदूषण भी कान की समस्या का कारण बन रहा है। बीएमसी द्वारा संचालित सेठ आत्मासिंह जेसीसिंह बांकेबिहारी कान-नाक-गला अस्पताल ने 15 महीनों के 1600 हजार सर्जरी की। हर महीने ऐसे 100 मामले आते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मामले ईयर इंफेक्शन के हैं। हेडफोन का बढ़ता उपयोग, प्रदूषण भी इसका कारण है। लेकिन अधिकांश मामले ठंड के कारण इंफेक्शन के आते हैं।

हमेशा देखने में आता है कि कान के दर्द को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है। सिओन का रहने वाले 12 साल के एक बच्चे रमेश नायर को ठंड के मौसम में सीजनल वायरल इंफेक्शन हो गया था। बुखार के अलावा उसे शरीर में दर्द होता और फिर कुछ समय में उसे कान में दर्द भी होने लगा। उसे पेरेंट्स उसे पीडियाट्रीशन के पास ले गए जिसने फ्लू को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों दे दी लेकिन उसके कान के दर्द पर गौर नहीं किया। उसका बुखार भी उतर गया लेकिन एक सप्ताह बाद, उसके कान में फिर दर्द उठा जो कि इतना गंभीर था कि वह रातभर सो नहीं पाया। यह बात ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. सुधा मित्रा ने कही। वे कहती हैं, जब उसे मेरे पास लाया गया को मैंने ईयरड्रम पर्फोरेशन डायग्नोज किया जो कि ठंड की वजह से था।

मेडिकल ऑफिल डॉ. अतुल ने बताया कि हमें हर महीने कान से संबंधित 100 से ज्यादा मामले मिलते हैं। 90 प्रतिशत मामलों में में गले और नाक की शिकयतों से ज्यादा कान की शिकायत ज्यादा मिलती है। सबसे आम समस्या है कान में से पानी निकलना जो कि अधिकांश रूप से ठंड, प्रदूषण और सबसे महत्वपूर्ण ध्वनि प्रदूषण से होती है।

ठंड में कान का खास ख्याल रखना जरूरी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस तरह करें ठंड में कानों की केयर:

– हमेशा कान को ढंक कर रखें।

– कान में तेल न डाले।

– तेज आवाज में म्यूजिक न सुनें।

– चलती गाड़ियों में खिड़की के पास न बैठे।

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