जानिए कब और कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा ?

जानिए कब और कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा ?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

कार्तिक मास के सोमवार को अक्षय आंवला नवमी मनाई जाएगी। आंवला नवमी के दिन विशेष तौर पर आंवले के पेड़, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विधान है। इस दिन आमले के पेड़ की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। आंवला वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है। यह विष्णु प्रिय है और इसके स्मरण से ही गोदान के बराबर फल मिलता है। आंवले के पेड़ के नीचे श्रीहरि विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है। अक्षय नवमी की पूजा संतान प्राप्ति एवं सुख, समृद्धि एवं कई जन्मों तक पुण्य क्षय न होने की कामना से किया जाता है। इस दिन अमला के पेड़ को घर मे लगाया जाता है। आंवले के पेड़ के नीचले भाग में ब्रह्मा जी, बीच मे भगवान विष्णु जी और ताने में भगवान शिव का वास मन गया है।

इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाया जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश होता है। यदि आमले का पेड़ न मिले तो आंवले के पेड़ की टहनी लेकर भी पूजा की जा सकती है। आंवला नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके आंवले के पेड़ की जड़ में दूध, रोली, अक्षत, फूल, गंध चढ़ाए। फिर आंवले के पेड़ की कम से कम सात बार और अधिक से अधिक 108 बार परिक्रमा करें और दीये जलाएं। इसके बाद कथा पढ़ें। इस दिन अगर आप किसी वजह से आंवले के पेड़ की पूजा या उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण नहीं कर पाएं तो इस दिन आंवला जरूर खाएं।

आंवले के पेड़ की पूजा करने के एक कारण यह भी है कि आंवला स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी होता है। विभिन्न रूपों में इसका सेवन बीमारियों को दूर करता है। घर में आंवले का पेड़ होने से सकारात्मकता बनी रहती है।

इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, आरोग्यता और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि आंवला नवमी पर आंवले के पेड़ के नीचे पूजा और भोजन करने की प्रथा की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी। कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी पृथ्वी पर घूमने के लिए आईं। धरती पर आकर मां लक्ष्मी सोचने लगीं कि भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा एक साथ कैसे की जा सकती है। तभी उन्हें याद आया कि तुलसी और बेल के गुण आंवले में पाए जाते हैं। तुलसी भगवान विष्णु को और बेल शिवजी को प्रिय है।

उसके बाद मां लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ की पूजा करने का निश्चय किया। मां लक्ष्मी की भक्ति और पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिवजी साक्षात प्रकट हुए। माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन तैयार करके भगवान विष्णु व शिवजी को भोजन कराया और उसके बाद उन्होंने खुद भी वहीं भोजन ग्रहण किया। मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी के दिन अगर कोई महिला आंवले के पेड़ की पूजा कर उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण करती है, तो भगवान विष्णु और शिवजी उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन महिलाएं अपनी संतना की दीर्घायु तथा अच्छे स्वास्थ्य लेकर कामना करती हैं।

आंवला नवमी पर विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और यह कथा सुनी जाती है। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से व्रत रखने वाली महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी भी उनके परिवार पर प्रस्नन होती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। महिलाओं सूर्योदय से पूर्व स्नान करने के आंवले पेड़ की पूजा करती हैं। इसके बाद पूरा परिवार आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करता है।

 

Rajesh Pandey

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