लिपस्टिक में छिपा है बंदूक, छाता है मशीनगन, जानें क्या है पूरा मामला

लिपस्टिक में छिपा है बंदूक, छाता है मशीनगन, जानें क्या है पूरा मामला

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

-वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय जासूसी संग्रहालय की नयी जगह पर शुरुआत
तीन साल तक बंद रहने के बाद वाशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय जासूसी संग्रहालय एक बार फिर से इस सप्ताहांत लोगों के लिए खुलने जा रहा है. इस संग्रहालय में आने के बाद लोग अमेरिका की सीआइए और पूर्व सोवियत संघ की केजीबी जैसी विश्व प्रसिद्ध जासूस एजेंसियों ने पूरी दुनिया में कैसे-कैसे जासूसी उपकरणों का इस्तेमाल किया है, जानकर हैरान हो जायेंगे. जानलेवा छतरी से लेकर लिपस्टिक बंदूक तक का इस्तेमाल इन एजेंसियों ने किया है.

ये सभी चीजें वाशिंगटन में दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय जासूसी संग्रहालय के रिनोवेशन के बाद आम जनता के लिए रख दी गयी हैं. जिन अद्भुत चीजों को देखने के लिए रखा गया है, उनमें से एक अखबार भी है, जिसमें छिपाये गये दो छोटे जहरीले तीरों से यूक्रेन के दो विद्रोहियों को मारा गया था. सीआइए के कुछ सफल अभियानों का पूरा ब्योरा भी यहां देखा जा सकता है, इनमें 1979 में ईरान के अमेरिकी दूतावास में बंधक बनाये गये छह राजनयिकों को छुड़ाने का अभियान भी है.

अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा बलों ने जर्मनी के शहर पूर्वी बर्लिन मे तत्कालीन सोवियत संघ के सैन्य मुख्यालय में घुसने के लिए जैसी सुरंग बनायी थी, वैसी ही सुरंग इस संग्रहालय में भी तैयार की गयी है. इस संग्रहालय का नियंत्रण निजी हाथों में है. लेकिन, अमेरिका की गुप्तचर सेवा के पूर्व प्रमुख विलियम वेबस्टर और केजीबी के पूर्व जनरल ओलेग कॉलगेन इसके निदेशक मंडल के सदस्य हैं.

जेम्स बॉन्ड से प्रभावित, फिल्में देखने का था निर्देश
जासूसी के लिए सीआइए ने अपने अधिकारियों से जेम्स बॉन्ड की फिल्में देखकर उनमें से कुछ तरीके अपनाने के लिए कहा था. यहां तक कि सीआइए के एक पूर्व निदेशक वीलियम केसी ने जेम्स बॉन्ड की एक फिल्म में चेहरा पहचानने के यंत्र को देखकर इसे तैयार करने के आदेश दिये थे.
 
साधारण चीजों को बना दिया जाता था हथियार
संग्रहालय में ऐसी छतरी देखी जा सकती है, जिसे मशीनगन के तौर पर इस्तेमाल किया गया था. लिपस्टिक बंदूक भी लोगों के लिए रखी गयी है. इनके अलावा कई ऐसे हथियार भी हैं, जिन्हें टॉर्च, लाइटर या सिगरेट का पैकेट समझने की भूल की जा चुकी है. प्रदर्शनी मे दिखायी जा रही कुछ चीजें तो जासूसी एजेंसियों के अधिकारियों ने अपने पास संभाल कर रखी हुई थीं, और कुछ खुले बाजार से खरीदी गयीं हैं.

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