प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान नरसिंह चतु‌र्दशी मनाई

प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान नरसिंह चतु‌र्दशी मनाई

श्रीनारद मीडिया, हरियाणा डेस्क – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक ( छाया- सुकान्त पण्डित)

हरियाणा कुरुक्षेत्र 17 मई:- सन्निहित सरोवर स्थित प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में शुक्रवार को भगवान नरसिंह चतु‌र्दशी धूमधाम से मनाई गई। मंदिर के महंत विजय गिरि के सान्निध्य में व्यवस्थापक स्वामी अनूप गिरि महाराज के साथ श्रद्धालुओं ने सुबह भगवान लक्ष्मीनारायण एवं भगवान नरसिंह की विधिविधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद भक्ति प्रवचनों में स्वामी अनूप गिरी ने कहा कि भगवान नरसिंह श्री हरि विष्णु के उग्र और शक्तिशाली अवतार माने जाते हैं। अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने पांचवां नरसिंह अवतार ‌लिया। इनका प्राकट्य खंभे से गोधूलि वेला के समय हुआ था। इनकी उपासना करने से हर प्रकार के संकट और दुर्घटना से रक्षा होती है और शत्रु शांत होते हैं। भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु का अपने जांघों पर लिटाकर नाखूनों से संहार किया, क्योंकि हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान लिया था कि वह किसी देवता, मनुष्य अथवा पशु-पक्षी से न मारा जाए। न दिन में न रात में और न ही किसी अस्त्र-शस्त्र से। हिरण्यकशिपु के अत्याचार से पूरा ब्रह्मांड भयभीत था। वह अपने राज्य में भगवान विष्णु का नाम नहीं लेने देता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था। अत्याचार जब सभी सीमाएं लांघ गए, तब नरसिंह भगवान ने खंभे से प्रकट होकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस अवसर पर स्वामी रोशनपुरी, पंडित बलराज कौशिक, पंडित पिनाकी शर्मा, दीपक शर्मा, मोका बाबा, पवन शर्मा पहलवान, जितेंद्र शर्मा, रविंद्र पलवल, सुरेंद्र शर्मा, देवेंद्र शर्मा, शिव शंकर गिरी सहित अन्य शामिल रहे।
प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा करते स्वामी अनूप गिरि महाराज एवं अन्य।

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