नागर जी की कृतियों ने हिन्दी साहित्य की गरिमा बढ़ायी है।

नागर जी की कृतियों ने हिन्दी साहित्य की गरिमा बढ़ायी है।

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

जन्मदिवस पर विशेष

अमृतलाल नागर हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्होंने नाटक, रेडियोनाटक, रिपोर्ताज, निबन्ध, संस्मरण, अनुवाद, बाल साहित्य आदि के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें साहित्य जगत् में उपन्यासकार के रूप में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त हुई तदापि उनका हास्य-व्यंग्य लेखन कम महत्वपूर्ण नहीं है। अमृतलाल नागर ने एक छोटी सी नौकरी के बाद कुछ समय तक मुक्त लेखन एवं हास्यरस के प्रसिद्ध पत्र ‘चकल्लस’ के सम्पादन का कार्य 1940 से 1947 ई. तक कोल्हापुर में किया इसके बाद बम्बई एवं मद्रास के फ़िल्म क्षेत्र में लेखन का कार्य किया। यह हिन्दी फ़िल्मों में डबिंग कार्य में अग्रणी थे। दिसम्बर, 1953 से मई, 1956 तक आकाशवाणी, लखनऊ में ड्रामा, प्रोड्यूसर, उसके कुछ समय बाद स्वतंत्र लेखन का कार्य किया।

भाषा के क्षेत्रीय प्रयोगों को विविध वर्गों में प्रयुक्त भिन्नताओं के साथ ज्यों का त्यों उतार देने में नागर जी को कमाल हासिल है। बोलचाल की सहज, चटुल, चंचल भाषा गम्भीर दार्शनिक सामाजिक प्रसंगों की गुरुता एवं अंतरंग प्रणय प्रसंगों की कोमलता का निर्वाह करने के लिए किस प्रकार बदल जाती है, इसे देखते ही बनता है। सचमुच भाषा पर नागर जी का असाधारण अधिकार है। नागर जी शिल्प के प्रति उदासीन हैं। अपने पुराने शिल्प से आगे बढ़ने की चेष्टा बराबर करते रहे हैं। ‘बूँद और समुद्र’ में पौराणिक शिल्प के अभिनव प्रयोग के अनन्तर ‘अमृत और विष’ में अपने पात्रों की दुहरी सत्ताओं के आधार पर दो-दो कथाओं को साथ-साथ चलाना, ‘मानस का हंस’ में फ़्लैश बैक के दृश्य रूप का व्यापक प्रयोग करना उनकी शिल्प सजगता के उदाहरण हैं। फिर भी यह सत्य है कि उनके लिए कथ्य ही मुख्य है शिल्प नहीं।

नागर जी को ‘बूँद’ और ‘समुद्र’ पर काशी नागरी प्रचारिणी सभा का बटुक प्रसाद पुरस्कार एवं सुधाकर रजत पदक, ‘सुहाग के नूपुर’ पर उत्तर प्रदेश शासन का ‘प्रेमचन्द पुरस्कार’, ‘अमृत और विष’ पर साहित्य अकादमी का 1967 का पुरस्कार एवं सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार 1970 तथा साहित्यिक सेवाओं पर युगान्तर का 1972 का पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।

कहानी एवं रेखाचित्र
सन कृतियाँ
1935 ‘वाटिका’
1938 ‘अवशेष’
1939 ‘नवाबी मसनद’
1941 ‘तुलाराम शास्त्री’
1947 ‘आदमी नहीं, नहीं’
1948 ‘पाँचवाँ दस्ता’
1955 ‘एक दिन हज़ार दास्ताँ’
1956 ‘एटम बम’
1963 ‘पीपल की परी’
1973 ‘कालदंड की चोरी’
1970 ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’
1970 ‘पाँचवाँ दस्ता और सात अन्य कहानियाँ’
उपन्यास
सन कृतियाँ
1942-1943 ‘महाकाल’
1944 ‘सेठ बाँकेमल’
1956 ‘बूँद और समुद्र’
1959 ‘शतरंज के मोहरे’
1960 ‘सुहाग के नूपुर’
1966 ‘अमृत और विष’
1968 ‘सात घूँघटवाला मुखड़ा’
1971 ‘एकदा नैमिषारण्ये’
1972 ‘मानस का हंस’
बाल साहित्य
सन कृतियाँ
1947 ‘नटखट चाची’
1950 ‘निंदिया आजा’
1969 ‘बजरंगी नौरंगी’
1969 ‘बजरंगी पहलवान’
1970 ‘इतिहास झरोखे’
1971 ‘बाल महाभारत’
1971 ‘भारत पुत्र नौरंगी लाल’
अनुवाद
सन कृतियाँ
1935 ‘बिसाती’ (मोपासाँ की कहानियाँ)
1937 ‘प्रेम की प्यास’ (गुस्ताव फूलाबेर कृत ‘मदाम बोवारी’ का संक्षिप्त भावानुवाद)
1939 ‘काला पुरोहित’ (एटन चेखब की कहानियाँ)
1948 ‘आँखों देखा गदर’ (विष्णुभट्ट गोडसे कृत ‘माझा प्रवास’)
1955 ‘दो फक्कड़’ (कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के तीन गुजराती नाटक)
1956 ‘सारस्वत’ (मामा वरेरकर का मराठी नाटक)
भेंटवार्ता एवं संस्मरण
सन कृतियाँ
1957 ‘गदर के फूल’
1961 ‘ये कोठेवालियाँ’

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