बलिदानियों के बलिदान व त्याग को स्मरण कर ही 21वीं सदी में नए भारत का निर्माण कर सकते हैं: कुलपति

बलिदानियों के बलिदान व त्याग को स्मरण कर ही 21वीं सदी में नए भारत का निर्माण कर सकते हैं: कुलपति

श्रीनारद मीडिया‚ हरियाणा डेस्क – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक ( छाया – सुकान्त पण्डित )

चंद्रयान -2 नए व विकसित भारत के संकल्प की ओर बढ़ता कदम है कुलपति।

शहीदों के बलिदान को याद रखें युवा।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित।

संगीत विभाग, सीनियर मॉडल स्कूल, आईआईएचएस के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम।

हरियाणा कुुरुक्षेत्र, 15 अगस्त :- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा है कि देश के लोग हमेशा उन बलिदानी महापुरूषों के ऋ़णी रहेंगे जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। देश की युवा शक्ति को उन महापुरूषों की शहादत को नमन कर उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। बलिदानियों के बलिदान व त्याग को स्मरण कर ही 21वीं सदी में नए भारत का निर्माण कर सकते हैं। आजादी के इस दिवस पर प्रत्येक देशवासी को संकल्प लेने की आवश्यकता है कि वे अपने आचार-व्यवहार व कार्य से हमेशा देश की गरिमा को बढ़ाने का काम करेंगे। वे गुरूवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आडिटोरियम प्रांगण में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।


इस मौके पर संगीत एवं नृत्य विभाग, सीनियर मॉडल स्कूल व आईआईएचएस संस्थान के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति पूर्ण बना दिया।
कुलपति ने कहा कि 15 अगस्त का दिन अपनी लोकतांत्रिक विकास यात्रा के निर्बाध गति से अधिक परिपक्वता के साथ निरन्तर आगे बढ़ते जाने के कारण भी प्रत्येक देशवासी के लिए गर्व व उल्लास का अवसर है। भारत की मजबूती का पता इससे चलता है कि अपने पड़ोसियों की तुलना में देश ने ज्यादा पारदर्शी लोकतंत्र, स्थिर सरकारें, आर्थिक विकास की मजबूत बुनियाद और सभी लोगों के समान विकास की सोच को पुष्टता दी है। अपने बारे मे हीं नहीं सभी के बारे में सोचना यही भारत की सोच व संस्कृति है। उसी संकल्प के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रत्येक भारतीय को इस पर गर्व करने की आवश्यकता है।


उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस इस वर्ष विशेष है। देश का मुकुट कहे जाने वाले राज्य जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में ऐतिहासिक निर्णय हुआ है। अब सम्पूर्ण भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही राष्ट्रीय ध्वज, एक ही विधान और एक ही संविधान की व्यवस्था से देश की एकता और एकात्मकता का गौरवशाली अनुभव सभी भारतवासी कर रहे हैं। इस फैसले के फलस्वरूप हमारे वीर सैनिक असाधारण परिस्थितियों में अत्यंत स्वाभिमान से काम कर रहे हैं। मैं अपने सैनिकों के धैर्य, पराक्रम व उनके साहस को नमन करता हं। सरदार पटेल ने अखंड भारत के लिए जो सपना देखा था, 70 वर्ष बाद सरकार ने उनके सपने को पूरा करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश को आजादी लम्बे संघर्ष, बड़ी कुर्बानियों व समर्पण के बाद मिली है। आजादी का जज्बा हम सभी के दिलों में बना रहे और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का स्मरण हमारे मस्तिष्क में रहे और वर्तमान और भविष्य की पीढिय़ों को इसका पुण्य स्मरण करवाते रहना हमारा दायित्व है। हम जब स्वतंत्रता सेनानियों की इस देश के लिए की गई शहादत को याद रखेंगे तो व्यक्तिगत व सार्वजनिक जीवन में देश के लिए अच्छा ही करेंगे। शहीदों की उन कुर्बानियों को याद रखकर ही हम एक संगठित व मजबूत राष्ट्र की महान विरासत को आने वाले पीढियों को सौंप सकेंगे।
कुलपति ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरू, सावरकर, अस्फाक उल्लाह खां, दुर्गा भाभी, चाफेकर बंधु जैसे हजारों लाखों लोगों ने अपना सर्वस्व बलिदान किया और परिणाम स्वरूप भारत आज फिर से दुनिया के सामने एक गौरवशाली राष्ट्र के रूप में सामने खड़ा है। अगस्त का महीना प्रत्येक भारतीय के लिए सबसे पावन महीना है। महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजो के खिलाफ भारत छोड़ो का ऐतिहासिक आन्दोलन प्रारम्भ हुआ और वर्षों के संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को हमे आजादी मिली और यहीं से भारत के पुनर्निमाण की यात्रा का प्रारम्भ हुआ। इन महापुरुषों ने देश के लिए जो किया, शायद वैसा हम कभी न कर सकें क्योंकि मातृभूमि पर मर मिटने का अवसर सौभाग्यशाली लोगों को मिलता है परन्तु मातृभूमि के लिए जीवन जीने का संकल्प तो हम कर ही सकते हैं।
आज भारत अपने गौरवशाली अतीत, सुदृढ़ लोकतांत्रिक मूल्यों और महान् सांस्कृतिक विरासत के साथ पुन: विश्वगुरू के अपने स्थान की ओर अग्रसर हो रहा है। अनेकों लोगों द्वारा विविध क्षेत्रों में नए-नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत अग्रणी पंक्ति में खड़ा हो गया है। भारत का दूसरा चन्द्रयान मिशन सफल रहा है। 20 अगस्त को यह चन्द्रमा की कक्षा में होगा। जब यह अपने गंतव्य पर पहुंचेगा तो यह प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का दिन होगा। चन्द्रमा पर हमारी यह उड़ान हमारे परिश्रम व विकास को बताने के लिए एक उदाहरण है। हम आज विज्ञान, सूचना तकनीक, कृषि, उद्योग, व्यापार, खेल, कला, संस्कृति हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। यह भारत की मेधा शक्ति का प्रकटीकरण है। नए भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही युवा शक्ति इन सभी सफलताओं के लिए बधाई की पात्र है।
एक भारतीय के रूप में आज हम आधुनिक हैं, प्रगतिशील हैं और श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों के साथ वसुधैव कुटुंबकम के संस्कारों को निरन्तर जीवन में अवतरित करते हैं। हमें एक व्यक्ति, समाज व देश के रूप में स्वयं के पुर्ननिर्माण के निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए। इसी से देश आगे बढ़ते हुए सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण की दिशा में उत्तरोत्तर बढ़ता जाएगा।
इसी मार्ग के कारण भारत की दुनिया में एक अलग पहचान बनी है लेकिन पिछले कुछ समय में देखने में आया है कि कतिपय लोग अपने अतार्किक आलोचनाओं व विरोधों से समाज की शक्ति को क्षीण करने की हद तक प्रयास करते हैं। समाज की समस्त सज्जन शक्ति को इस पर विचार करने की आवश्यकता है। देश व राष्ट्र धर्म ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य व संकल्प होता है। इसी भावना के साथ हम आगे बढ़ेंगे तो यह राष्ट्र निकट भविष्य में ही अपने स्थान को पुन: प्राप्त कर लेगा।
भारत की शिक्षा की इस उद्देश्य की दृष्टि से महती भूमिका है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भी अपनी इस भूमिका को सराहनीय ढंग से निभाता आया है। आज यह विश्वविद्यालय देश के सर्वोत्तम शिक्षण संस्थानों में स्थान रखता है। देश के मानकों के स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। परन्तु इसे और आगे जाना है। अब यह विश्वविद्यालय सही अर्थों में विद्यार्थी केन्द्रित शोध आधारित उत्कृष्ट संस्थान का स्थान प्राप्त करने की ओर बढ़ रहा है। परन्तु इस गति को बढ़ाने के लिए सभी को अपने योगदान को भी बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के रूप में हम अपने कार्य की गुणवत्ता को बढ़ाते हुए इसकी उत्कृष्टता के लिए अपनी ओर से कुछ न कुछ जोड़ते रहेंगें। राष्ट्र प्रथम की भावना राष्ट्र जीवन की ऊंचाईयां को बढ़ाती है। विश्वविद्यालय प्रथम की भावना से विश्वविद्यालय को शिखर पर पहुंचा सकती है। हम बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाएं, राष्ट्र निर्माताओं द्वारा बनाई गई राह पर इसी तरह चलते रहे तो कोई भी चुनौती हमारा रास्ता नहीं रोक सकेगी।
इस मौके पर कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी, प्रो. रजनीश शर्मा, प्रो. श्याम कुमार, प्रो. पवन शर्मा, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. सीपी सिंह, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. भगवान सिंह, प्रो. नीरा वर्मा, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. मनोज जोशी, प्रो. एसएस बूरा, प्रो. मोहिन्द्र चांद, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. हितेन्द्र त्यागी, डॉ. चांद जिलोवा, डॉ. परमेश कुमार, डॉ. महावीर, प्रिंसीपल प्रोमिला बतरा, डॉ. विरेन्द्र पाल, डॉ. सुकमरमवती, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, डॉ. हरविन्द्र राणा, सूरजभान मलिक, डॉ. राजेश सोबती, डॉ. सुशील टाया, डॉ. जयवीर, रवि थापा, राजकुमार सरदाना, विनोद कुमार, डॉ. जितेन्द्र कुमार, बलबीर, विरेन्द्र कुण्डू, अफगानी छात्र बहराम रमेश, मोहम्मद नदीम सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
94161-91877

Leave a Reply