“स्वामी विवेकानंद मेरे लिए, मैंने उन्हें कैसे देखा है” विषय पर वर्चुअल गोष्ठी का आयोजन

“स्वामी विवेकानंद मेरे लिए, मैंने उन्हें कैसे देखा है” विषय पर वर्चुअल गोष्ठी का आयोजन

श्रीनारद मीडिया ब्यूरो प्रमुख / सुनील मिश्रा वाराणसी (यूपी)

वाराणसी / बीएचयू के टीचिंग लर्निंग सेंटर, आईआईटी में मंगलवार को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती मनायी गई। इस अवसर पर “स्वामी विवेकानंद मेरे लिए, मैंने उन्हें कैसे देखा है” के विषय पर वर्चुअल लाइव गोष्ठी का आयोजन हुआ।कार्यक्रम में 35 से अधिक संकाय सदस्यों और संस्थान के 70 छात्रों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किया गया कि उनकी शिक्षा और दृष्टिकोण अभी भी 21 वीं सदी में प्रासंगिक हैं और युवाओं को प्रेरित करती हैं। इस बात पर जोर दिया गया कि स्वामी जी ने राष्ट्र निर्माण और सार्वभौमिक भाई-चारे के लिए युवा शक्ति को बहुत महत्व दिया। शिक्षा को जारी रखने का उनका दृष्टिकोण एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें जीवन के सभी पहलुओं जैसे शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक, नैतिक और आध्यात्मिक को एकीकृत होना चाहिए।स्वामी विवेकानंद जी की शिक्षा को वर्तमान राष्ट्रीय और वैश्विक सामाजिक-राजनैतिक संदर्भ में पुनर्वालोकन करने की आवश्यकता बताई गई। स्वामी जी की अंतर्दृष्टि नई शिक्षा नीति, सांप्रदायिक सौहार्द, इंजीनियरिंग छात्रों की नौकरी के परिदृश्य और युवाओं के वैश्विक विकल्पों के लिए कितने महत्वपूर्ण है यह विचार भी व्यक्त किये गए।टीचिंग लर्निंग सेंटर के समन्वयक डॉ. एनएस राजपूत ने संकाय सदस्यों और छात्रों का स्वागत किया और मौजूदा राष्ट्रीय और वैश्विक स्थिति और नीतियों पर विचार-विमर्श करने का अनुरोध किया। प्रो. ए. के. त्रिपाठी, प्रो. आर. के. मिश्रा, प्रो. एस. एस. मंडल, डॉ. पुनीत बिंदलिश, डॉ. विनीता चंद्रा, डॉ. किशोर सरवडेकर, डॉ. चंदन उपाध्याय और अन्य ने छात्रों को प्रेरित करने के लिए अपने विचार और राय प्रस्तुत की।छात्रों ने स्वामी जी की शिक्षाओं के बारे में उनकी समझ को भी साझा करते हुये कहा कि स्वामी जी ने निरंतर युवा पीढ़ी को उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया है। डॉ. ए के मिश्रा सह-समन्वयक, टीएलसी ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

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