पटना हाई कोर्ट का आदेश हू-ब-हू लागू करें सरकार -: चतुर्वेदी

पटना हाई कोर्ट का आदेश हू-ब-हू लागू करें सरकार -: चतुर्वेदी

श्रीनारद मीडिया, चमन श्रीवास्‍तव, सीवान (बिहार):

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले को पलट कर नियोजित शिक्षकों के जीवन में भूचाल ला दिया। बिहार की शिक्षा व शिक्षा नीति को तहस-नहस कर दिया है। केंद्र व राज्य सरकार की संयुक्त कुटिल चाल ने शिक्षकों को बेगारी खटने पर मजबूर कर दिया है। राज्य के तमाम शिक्षक साजिश भरी न्यायादेश से हताश व निराश हैं। इतिहास गवाह है जो न्याय कोर्ट से नहीं मिला है वह अहिंसात्मक जोरदार आंदोलन से प्राप्त हुआ है। ये बातें प्रोजेक्ट कस्तूरबा बालिका उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज पंजवार रघुनाथपुर के प्रांगण में बुधवार को प्रभारी प्रधानाध्यापक विश्वंभर नाथ दुबे की अध्यक्षता में आयोजित सभा के दौरान कहीं गई। यह सभा नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए न्याय निर्णय के विरुद्ध था। इसमें सभी कोटी (नियमित एवं नियोजित) के शिक्षकों ने एक स्वर में न्याय निर्णय के विरुद्ध आवाज उठाई। सर्वप्रथम प्लस टू के वरीय शिक्षक त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार एवं न्यायपालिका की मिलीभगत से नियोजित शिक्षकों के विरुद्ध ऐसा न्याय निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाया गया। इस तरह की तुगलकी फरमान के विरुद्ध सभी नियोजित शिक्षकों की एकजुटता से सरकार के खिलाफ महाआंदोलन शुरु करने की बात जोरदार ढंग से रखी गई। प्रभारी प्रधानाध्यापक ने श्री चतुर्वेदी की बातों का समर्थन करते हुए आंदोलन में अग्रणी रहते हुए हर संभव साथ देने की बात दुहराई। उन्होंने 31 अक्टूबर 2018 को पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित न्यायादेश समान काम का समान वेतन अतिशीघ्र लागू करने की बात कहीं। वरीय शिक्षक मो० कामिल रजा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार यदि नियोजित शिक्षकों के भविष्य के बारे में गंभीरता से विचार करते हुए समान काम समान वेतन देने पर विचार नहीं करती है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा। प्लस टू के शिक्षक भूषण तिवारी ने न्यायाधीशों की भर्त्सना करते हुए मरते दम तक सरकार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कहीं। माध्यमिक शिक्षक अरविंद कुमार दुबे ने लोकतंत्र को राजतंत्र की उपमा देखते हुए कहा कि यह कैसा लोकतंत्र है जिसमें सरकार ने मनमाने ढंग से अपने अन्यायपूर्ण निर्णय को नियोजित शिक्षकों पर ठोपने का काम किया है। प्लस टू के भूगोल शिक्षक मनोज कुमार यादव ने इस निर्णय को संविधान के विरुद्ध करार देते हुए कहा कि यह संविधान के मौलिक अधिकारों का हनान है। ऐसी स्थिति में यह कहना बिल्कुल तर्कसंगत है कि लोकतंत्र एवं संविधान खतरे में हैं। शिक्षिका निरुपमा कुमारी एवं विभा कुमारी ने इस आवाज को बुलंद करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन हेतु शंखनाद करने की बात कहीं। मौके पर शिक्षक संजय कुमार सिंह, रामप्रवेश सिंह, प्रतिभा सिंह, इंदु कुमारी छोटन राय, नुरुलहोदा अंसारी आदि मौजूद थे।

Leave a Reply