रमेश चन्द्र दत्त धन बहिर्गमन विचारधारा के प्रवर्तक तथा महान् शिक्षाशास्त्री थे।

रमेश चन्द्र दत्त धन बहिर्गमन विचारधारा के प्रवर्तक तथा महान् शिक्षाशास्त्री थे।

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

जन्मदिवस पर विशेष

आर.सी. दत्त अंग्रेज़ी और बंगला भाषा के जाने-माने प्रशासक, आर्थिक इतिहासज्ञ और लेखक थे. वे ‘धन के बहिर्गमन’ की विचारधारा के प्रवर्तक तथा महान शिक्षा-शास्त्री थे. इसके अतिरिक्त इन्होने रामायण व महाभारत का अनुवाद भी किया था. भारतीय राष्ट्रवाद के पुरोधाओं में से एक आर.सी. दत्त के आर्थिक सिद्धान्तों का इतिहास में प्रमुख स्थान है. दादाभाई नौरोज़ी और मेजर बी.डी. बसु के साथ ये ब्रिटिश शासन के तीसरे आर्थिक चिंतक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के प्रामाणिक विवरण पेश किये और विख्यात ‘ड्रेन थियरी’ का प्रतिपादन किया. इन्होंने बताया की इस सिद्धांत का मतलब यह है कि अंग्रेज़ अपने लाभ के लिए निरंतर निर्यात थोपने और अनावश्यक अधिभार वसूलने के ज़रिये भारतीय अर्थव्यवस्था को निचोड़ रहे थे.

वर्ष 1899 में इन्होंने ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ के लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता की थी. इनकी रचनाओं में ‘ब्रिटिश भारत का आर्थिक इतिहास’, ‘विक्टोरिया युग में भारत’ और ‘प्राचीन भारतीय सभ्यता का इतिहास’ आदि शामिल हैं. इन्होंने अनेक उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्य किया. लेकिन इनकी ख्याति मौलिक लेखक और इतिहासवेत्ता के रूप में ही अधिक है. इन्होंने अपने तीन वर्षों के इंग्लैंड प्रवास के विषय में एक पुस्तक ‘थ्री ईयर्स इन इंग्लैड’ लिखी.

वे आर्थिक इतिहासकार के अलावा एक प्रतिभाशाली और कुशल सांस्कृतिक इतिहासकार भी थे. इन्होंने ‘बंगीय साहित्य परिषद्’ के संस्थापक अध्यक्ष रहने के साथ-साथ महाभारत और रामायण का अंग्रेज़ी में संक्षिप्त अनुवाद भी किया था.

प्रारम्भ में आर.सी. दत्त ने अंग्रेज़ी भाषा में भारतीय संस्कृति और इतिहास पर स्तरीय ग्रंथों की रचना की. बाद में बंकिमचंद्र चटर्जी के प्रभाव में आने के बाद ये अपनी मातृ-भाषा बंगला में रचनाएं करने लगे. इनके चार प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास हैं- (1) बंग विजेता (1874), (2) माधवी कंकण (1877), (3) महाराष्ट्र जीवन प्रभात (1878) (4) राजपूत जीवन संध्या (1879).

कुछ विद्वान इनके ऐतिहासिक उपन्यासों से अधिक महत्त्व दो सामाजिक उपन्यासों ‘संसार’ (1886) तथा ‘समाज’ (1894) को देते हैं. ग्राम्य जीवन का चित्रण इन उपन्यासों की प्रमुख विशेषता है. इसके अलावा इनके द्वारा लिखित अन्य रचनाएं निम्न हैं-

‘ए हिस्ट्री ऑफ सिविलाइज़ेशन इन एन्शिएन्ट इंडिया’ (तीन खंड), ‘लेटर हिंदू सिविलाइज़ेशन’, ‘एकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’, ‘इंडियंस इन द विक्टोरियन एज’, ‘ए हिस्ट्री ऑफ द लिटरेचर ऑफ बंगाल’, ‘द महाभारत ऐंड द रामायण’, ‘लेज़ ऑफ एन्शिएन्ट इंडिया’, ‘ग्रेट एपिक्स ऑफ एन्शिएन्ट इंडिया’, ‘शिवाजी’ (अंग्रेजी और बंगला), ‘लेक ऑफ पाम्स’, ‘द स्लेव गर्ल ऑफ आगरा’, ‘थ्री ईयर्स इन इंग्लैंड’, ‘दि पेजैंट्री ऑफ बंगाल’, ‘ऋग्वेद’ (बंगला अनुवाद), तथा ‘इंग्लैड ऐंड इंडिया’.

30 नवम्बर, 1909 को आर.सी. दत्त का देहान्त बड़ौदा (गुजरात) में हुआ.

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