महान कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि पर समाजसेवी धर्मवीर सिंह ने किया नमन

महान कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि पर समाजसेवी धर्मवीर सिंह ने किया नमन

श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार)

सीवान जिले के गोरेयाकोठी विधानसभा के भावी प्रत्याशी व समाजसेवी धर्मवीर सिंह ने अपनी पूरी समस्त कार्यकर्ताओं के तरफ से महान कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया व उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला।
सिंह ने बताया कि ‘झांसी की रानी’ से “वसंत के नायकों की तरह” “जलियांवाला बाग में वसंत” और कदंब वृक्ष भारत के इतिहास और संस्कृति जैसे कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का नेतृत्व करने वाली काव्यात्मक कविताओ को याद किया जाएगा।


“चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी ..
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी ..
ख़ूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी..”
वीर रस से ओत प्रोत इन पंक्तियों की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान को ‘राष्ट्रीय वसंत की प्रथम कोकिला’ का विरुद दिया गया था .. यह वह कविता है जो जन-जन का कंठहार बनी.. कविता में भाषा का ऐसा ऋजु प्रवाह मिलता है कि वह बालकों-किशोरों को सहज ही कंठस्थ हो जाती हैं.. कथनी-करनी की समानता सुभद्रा जी के व्यक्तित्व का प्रमुख अंग है.. इनकी रचनाएँ सुनकर मरणासन्न व्यक्ति भी ऊर्जा से भर सकता है ..
सुभद्रा कुमारी चौहान की आज (15 फरवरी, 1948) पुण्यतिथि है … हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं..
उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए, पर उनकी प्रसिद्धि ‘झाँसी की रानी’ कविता के कारण है.. सुभद्रा जी राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रहीं, किन्तु उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अनेक बार जेल यातनाएँ सहने के पश्चात् अपनी अनुभूतियों को कहानी में भी व्यक्त किया .. वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण उनकी रचना की सादगी हृदयग्राही ह

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