अररिया जिले को कालाजार मुक्त करने के लिये छिड़काव अभियान की हुई शुरुआत

अररिया जिले को कालाजार मुक्त करने के लिये छिड़काव अभियान की हुई शुरुआत

जिले के चिह्नित 152 गांवों के 2.85 लाख घरों में होगा एसपी दवा का छिड़काव

श्रीनारद मीडिया, अररिया,  (बिहार ):

बिहार के अररिया जिले को कालाजार रोग से मुक्त करने के उद्देश्य छिड़काव का कार्य शुक्रवार से शुरू हुआ। अभियान के तहत कालाजार प्रभावित जिले के कुल 152 गांवों को चिह्नित किया गया है। अभियान के तहत चिह्नित गांवों के दो लाख 85 हजार 848 घरों में सिंथेटिक पैराथायराइड (एसपी) दवा का छिड़काव किया जायेगा। लगभग तीन माह तक चलने वाले इस अभियान में जिले के कुल 14 लाख 28 हजार लोग लाभान्वित होंगे। अभियान का विधिवत उद्घाटन जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह द्वारा अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज में किया गया। मौके पर केयर की डीटीएल पर्णा चक्रवती, वीबीडीसी सुरेंद्र बाबू, वीडीसीओ ललन कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान डीवीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह ने छिड़काव कर्मियों को इससे संबंधित जरूरी दिशा निर्देश दिये। छिड़काव का कार्य फिलहाल जोकीहज्ञट व पलासी प्रखंड को छोड़ कर शेष छह प्रखंडों में किया गया। छूटे हुए प्रखंडों में छिड़काव का कार्य दूसरे चरण में किया जायेगा।

जन जागरूकता व सामूहिक भागीदारी जरूरी: डीवीडीसीओ
छिड़काव कार्य के उद्घाटन के मौके पर डीवीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि कालाजार रोग को पूरी तरह खत्म करने के लिये हर स्तर पर जरूरी प्रयास की जरूरत है। सभी विभाग के आपसी समन्वय व आम लोगों के सहयोग से ही इस रोग से पूरी तरह निजात पाना संभव है। कालाजार उन्मूलन को लेकर संचालित छिड़काव अभियान की सफलता में उन्होंने जन प्रतिनिधियों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जन-जागरुकता व सामूहिक भागीदारी से ही इस रोग को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

पंद्रह दिन से अधिक दिनों तक बुखार रहने पर कालाजार की जांच जरूरी: वीबीडीसी
रोग से संबंधित जानकारी देते हुए वीबीडीसी सुरेंद्र बाबु ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी के काटने से फैलता है। बालू मक्खी नमी व अंधेरे स्थानों पर ज्यादा तेजी से विकसित होता है। 15 दिनों से अधिक समय तक जिनका बुखार मलेरिया व एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से दूर नहीं हो रहा हो उन्हें कालाजार संबंधी अपनी जांच जरूर करानी चाहिये। भूख की कमी, पेट का बड़ा होना व शरीर का काला पड़ना रोग के अन्य लक्षण हैं। इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर लोगों को नजदीकी अस्पताल में अपनी जांच कराते हुए कालाजार का इलाज शुरू कराना जरूरी है।

श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित राशि देने का है प्रावधान:
वीडीसीओ
वीडीसीओ ललन कुमार ने बताया कि कालाजार मरीजों के इलाज की सुविधा सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। कालाजार मरीजों को सरकारी अस्पताल में अपना इलाज कराने पर क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 71 सौ रुपये राशि दिये जाने का प्रावधान है। पीकेडीएल के मरीजों को पूर्ण इलाज के बाद चार हजार रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाता है।

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