हिंदी को इन लोगों ने, विदेशों में भी दिलाया सम्मान

हिंदी को इन लोगों ने, विदेशों में भी दिलाया सम्मान

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

दिवस पर विशेष

हिंदी भाषा की खासियत यह है कि यह लोगों को आपस में जोड़ती है. हिंदी भाषा ने अपने अंदर कई भाषाओं के शब्दों को स्थान दिया है और निरंतर सर्व स्वीकार्यता की ओर आगे बढ़ती जा रही है. हिंदी में संस्कृत, अरबी, फारसी के अतिरिक्त अवधी, ब्रज और भोजपुरी भाषा के शब्द भी खूब चलते हैं. हिंदी आज सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी बोली जाती है और इसके प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है. देश में कई ऐसे नाम भी हैं, जिन्होंने हिंदी को बढ़ावा देने और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, आज चर्चा कुछ ऐसी ही शख्सीयतों की-

अमिताभ बच्चन : बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की हिंदी बहुत ही अच्छी है और उनकी शैली भी इतनी प्रभावकारी है कि उन्हें सुनने वाला हिंदी से प्रेम कर बैठता है. अमिताभ बच्चन के अंदर यह खूबी उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की वजह से आयी है, क्योंकि वे हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि थे. ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीरियल में भी अमिताभ प्रतिभागियों से हिंदी में इतनी अच्छी हिंदी में बात करते हैं कि कार्यक्रम देखने वाला उनका सानी बन जाता है.
 
गुलजार : गुलजार हिंदी फिल्मों के ऐसे गीतकार हैं, जिन्हें चाहने वाले विदेशों में भी खूब हैं. गुलजार की कविताएं और गीत ना सिर्फ हिंदी भाषा बल्कि गैर हिंदी भाषियों में भी खूब लोकप्रिय हैं. उनके प्रेमगीतों को लोग इतना पसंद करते हैं कि वे हिंदी को अपनी भाषा के रूप में स्वीकार करने लगे.

नामवर सिंह : नामवर सिंह हिंदी साहित्य का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नयी दिशा दी. कई नये प्रयोग उनके नाम रहे. उन्हें व्याख्यान को सुनने हजारों लोग आते थे. नामवर सिंह ने हिंदी की बड़ी सेवा की और इसका खूब विस्तार भी किया.

अटल बिहारी वाजपेयी : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को हिंदी से काफी प्रेम था. जनता पार्टी की सरकार में जब वे विदेश मंत्री थे, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपना संबोधन हिंदी में देकर एक शुरुआत की थी और हिंदी को आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया था. वे हिंदी में कविताएं भी लिखते थे, जिन्हें वर्तमान दौर में काफी पसंद किया जा रहा है. वे इतने शानदार वक्ता थे कि सुनने वाला उन्हें सुनता रह जाता था.
मुरारी बापू : मुरारी बापू एक ऐसे कथावाचक हैं, जिन्होंने विदेशों में भी हिंदी में रामकथा सुनायी और खूब चर्चित हुए. उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा और वेटिकन सिटी में भी हिंदी में रामकथा सुनायी और लोगों को मंत्रमुग्ध किया. उनके कथावाचन में विदेशी भी शामिल होते थे और उनसे प्रभावित होते थे. उन्होंने 800 से अधिक बार रामकथा कही है.
राजकपूर : एक समय था जब राजकपूर की फिल्म ‘आवारा’ का संगीत देश ही नहीं विदेशों में भी खूब प्रचलित हुआ. मेरा जूता है जापानी विदेशी भी गुनगुनाते नजर आते थे. राजकपूर हिंदी फिल्मों के शोमैन थे, जिनकी फिल्में भारत से बाहर रुस में सबसे ज्यादा चलती थीं, उनकी फिल्मों के कारण हिंदी भाषा का काफी विस्तार हुआ और विदेशों से लोग हिंदी सीखने भारत भी आये.
कुमार विश्वास : कुमार विश्वास आज के दौर के कवि हैं और उनकी कविताएं युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं. वे ना सिर्फ अपनी कविताओं का पाठ करते हैं, बल्कि हिंदी साहित्य के वरिष्ठ कवियों की कविताओं का पाठ भी दूसरे देशों में करते हैं. वे अबतक अमेरिका, दुबई, जापान, स्वीडन और उज्बेकिस्तान जैसे देशों में जाकर हिंदी कविताओं का पाठ कर चुके हैं और वाह-वाही बटोर चुके हैं.
नीरज : बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार नीरज के गीतों ने भी देश से बाहर काफी धूम मचाई और हिंदी का प्रचार किया. कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे गीत ने भारत से बाहर भी काफी प्रसिद्धि बटोरी थी. गोपालदास नीरज के गीत अलग हटकर होते थे और लोगों की भावनाओं को स्पर्श करते थे.

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