पिछड़ों को घोखा देने वालों को कर्पूरी जयंती मनाने का अधिकार नहीं– सुशील मोदी

पिछड़ों को घोखा देने वालों को कर्पूरी जयंती मनाने का अधिकार नहीं– सुशील मोदी

श्रीनारद मीडिया‚ पटना (बिहार)

भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित जननायक कर्पूरी ठाकुर की 96 वीं जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भारत सरकार से स्व. कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की उपाधि से नवाजे जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बाद के दिनों में अतिपिछड़ों की सूची में करीब दो दर्जन नई जातियों को जोड़ा गया है, इसलिए आने वाले दिनों में पंचायत में अति पिछड़ों के कोटा को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता हंै। पिछड़ों-अतिपिछड़ों को घोखा देने वाले राजद को कर्पूरी जयंती मनाने का अधिकार नहीं है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का आयोजन ।
बालिकाओं ने लगाई दौड़ ।
बेटी नहीं तो सृष्टि नहीं
जीरादेई प्रखण्ड क्षेत्र के जयप्रकाश उच्च विद्यालय विजयीपुर के परिसर में नेहरू युवा केन्द्र सिवान व पंचशील के संयुक्ततत्वावधान में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर दौड़ का आयोजन कर बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के बढ़ावा पर जोर दिया गया ।नेहरू युवा केन्द्र के कार्यक्रम प्रभारी ईश्वर देव यादव ने कहा कि बालिका नही तो सृष्टि नहीं ।उन्होंने कहा कि बेटी के प्रति सामाजिक नजरिया में बदलाव की अहम आवश्यकता है ।जिला समन्वयक ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बेटी ,बेटा से कम नहीं है ।पंचशील के सचिव कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि नारा व अभियान जो हो पर सच्चाई यह है कि बढ़ती दहेज ही बेटी के प्रति उदासीनता की मुख्य कारण है। छात्रा मुस्कान कुमारी ने कहा कि समाज का दायित्व बनता है कि बालिका का सुरक्षा प्रदान करें ।उन्होंने कहा कि बालिकाओं का चीरहरण सामाजिक कलंक है जिसे बहसी समाज के उदण्डों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा । इस मौके पर एनवाईवी क्रमशः रविरंजन सिंह ,जयप्रकाश यादव,लोकेश कुमार,पुरुषोत्तम कुमार साह, पप्पू कुमार,सोनू कुमार,मनीष कुमार ,अमित कुमार ,गगन कुमार ,राम प्रवेश कुमार , वरीय शिक्षक वृजकिशोर यादव शिक्षिका वंदना सिन्हा ,अर्चना सिन्हा ,घनश्याम सिन्हा, अंगद प्रसाद,विकेश सिंह,दिग्विजय सिंह,रामप्रवेश यादव आदि उपस्थित थे।

पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वाले राजद-कांग्रेस ने हमेशा पिछड़ों को धोखा दिया है। 1952 में गठित काका कालेलकर कमिटी की रिपोर्ट 1953 में आ गई थी मगर कांग्रेस को उसे लागू करने की हिम्मत नहीं हुई थी। इसी प्रकार जनसंघ के सहयोग से 1977 में बनी मोरारजी की सरकार ने मंडल कमीशन का गठन किया मगर 10 वर्षों तक कांग्रेस उसकी रिपोर्ट को लागू नहीं कर पाई।

जननायक कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने सरकारी नौकरियों में पिछड़ों को आरक्षण दिया जिसमें जनसंघ के कैलाशपति मिश्र भी शामिल थे। मंडल कमीशन की रिपोर्ट भी भाजपा के समर्थन से चलने वाली बी पी सिंह की सरकार ने लागू की। बिहार में जब 2005 में एनडीए की सरकार बनी तब जाकर स्थानीय निकायों में अति पिछड़ों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। नतीजतन आज अतिपिछड़ा समाज के 1600 से ज्यादा मुखिया चुन कर आए हैं। राजद-कांग्रेस ने तो 2003 में आरक्षण का प्रावधान किए बिना 27 वर्षों के बाद हुए पंचायत चुनाव में पिछड़ों की हकमारी की।

नरेन्द्र मोदी द्वारा सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का विरोध करने वाला राजद ने कर्पूरी ठाकुर द्वारा ऊंची जाति के गरीबों को दिए गए 3 प्रतिशत आरक्षण को सत्ता में आने के बाद खत्म कर दिया था। बिहार की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक 25 अतिपिछड़ों को टिकट दिया जिनमें से 12 जीत कर आए। जदयू के 7 के साथ आज विधान सभा में एनडीए के 19 विघायक अतिपिछड़ा समाज से हैं। राजद-कांग्रेस ने मात्र 5 को टिकट दिया था जिनमें से 3 जीते थे। लोकसभा में एनडीए के 7 सांसद अतिपिछड़ा वर्ग सेे हैं। भाजपा अतिपिछड़ों की हमेशा से हितैषी रही है।

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