क्या है मुंबई का आरे कॉलोनी विवाद?

क्या है मुंबई का आरे कॉलोनी विवाद?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

मुंबई शहर जिसे न जाने कितने नामों से पुकार जाता है। मायानगरी, सपनों का शहर, हादसों का शहर और न जाने क्या-क्या। मायानगरी मुंबई एक बार फिर चर्चा में है। वजह कोई फिल्म नहीं, पर्यावरण और मुंबई मेट्रो है। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने आरे मेट्रो कारशेड के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी लोगों पर से केस हटाने का निर्णय किया है। साथ ही सीएम ने मेट्रो कारशेड कांजुरमार्ग पर शिफ्ट करते हुए आरे की 800 एकड़ जमीन को वन भूमि भी घोषित कर दिया।

एनसीपी और कांग्रेस के सहारे राज्य की सत्ता पर काबिज उद्धव ठाकरे ने  इससे एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो अपना वादा पूरा कर लिया और दूसरा, भाजपा को पटखनी भी दे दी।  आरे में मेट्रो कारशेड का मुद्दा दोनों पार्टियों भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में खटास की मुख्य जड़ रही है।

आरे के जंगल में मेट्रो कारशेड बनाने की योजना तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की थी। जिसका शिवसेना ने साफतौर पर विरोध किया था। आज के इस विश्लेषण में इस पूरे विवाद की बात करेंगे। साथ ही बताएंगे कि क्या है आरे जंगल विवाद और उद्धव सरकार के इस फैसले से मेट्रो परियोजना पर क्या असर पड़ेगा।

पंडित नेहरू ने रखी थी कॉलोनी की नींव

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की परिधि में आने वाला आरे का जंगल मुंबई के लिए प्राणवायु भी कहा जाता है।  देश की आजादी के चौथे साल में चार मार्च 1951 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पौधारोपण कर डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरे मिल्क कॉलोनी की नींव रखी थी। पीएम के पौधारोपण के बाद इस इलाके में इतने पेड़ रोपे गए कि 3166 एकड़ क्षेत्रफल में फैले भूभाग ने कुछ ही सालों में जंगल का रूप ले लिया।

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

मुंबई को ऑक्सीजन देने वाले आरे पर खतरा तब मंडराना शुरु हुआ जबकि मायानगरी में मेट्रो ने दस्तक दी। साल 2014 में वर्सोवा से घाटकोपर तक मेट्रो की शुरुआत हुई। इसी के साथ मेट्रो का जाल बढ़ाने की बात होने लगी और मेट्रो को कार पार्किंग के लिए जगह की जरूरत महसूस हुई।  इसके लिए आरे में करीब 2000 से ज्यादा पेड़ काटकर मेट्रो के लिए हजारों करोड़ की परियोजना शुरु करने की बात हुई। हर तरफ पेड़ों को काटे जाने का विरोध होने लगा।

पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में काम करने वालीं कई संस्थाओं और लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई लेकिन वन विभाग की ओर से कहा गया कि आरे का इलाका कोई जंगल नहीं है। जब इसकी स्थापना हुई थी तो इसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की ही योजना बनाई गई थी। बीएमसी ने साल 2019 में मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को 2600 पेड़ काटने की इजाजत दे दी।

शिवसेना ने भी तब जताया था विरोध

मेट्रो शेड के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध उस वक्त बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना ने भी किया था। आदित्य ठाकरे ने खुद इस पर विरोध जताते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘कैसा होगा मुंबई मेट्रो के अफसरों को क्या PoK में तैनात कर दिया जाये तो? पेड़ों की जगह उन्हें आतंकवादी अड्डों को नेस्तनाबूद करने का काम दिया जाना चाहिये।

शिवसेना और बॉलीवुड हस्तियों के पेड़ों की कटाई के विरोध के बीच बीजेपी के छोड़ कर बाकी दलों के नेताओं ने भी विरोध में ट्वीट किये। शेड बनाने के लिए खुला मैदान चाहिए था और इसके लिए जरूरी थी पेड़ों की कटाई। विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने मेट्रो कंपनी से कोई और लोकेशन देखने को भी कहा, लेकिन मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर जहां लोगों को रहने के लिए एक बिस्तर का स्थान तलाशने में जद्दोजहद करनी पड़ती है, मेट्रो शेड के निर्माण की जगह भला कहां मिलती। लौटकर चिड़िया फिर उसी डाल पर आ गई।

कोर्ट पहुंचा मामला

बाद हाईकोर्ट में सितंबर 2019 में याचिका दायर की गई कि इस इलाके के पेड़ नहीं काटे जाएं और इसे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण इलाका घोषित किया जाए। कई फिल्मी कलाकारों ने भी इसका समर्थन किया। अक्टूबर महीने में हाईकोर्ट की ओर से यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी गई कि आरे जंगल नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने इलाके में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। लोगों ही नहीं, मीडिया के प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी गई

शिवसेना ने बनाया था चुनावी मुद्दा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने भले ही मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन आरे को लेकर दोनो में साफतौर पर मतभेद सामने आए थे। उस समय शिवसेना ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। चुनाव के बाद खंडित जनादेश आया। शिवसेना ने पलटी मार दी। विपक्षी दल एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सूबे में महाविकास आघाड़ी सरकार बनाई। शिवसेना इस सियासी खेल से बीजेपी को तगड़ा झटका लगा। इधर उद्धव ठाकरे की सीएम पद की ताजपोशी हुई और उधर अगली ही सुबह नई सरकार ने मेट्रो कारशेड का काम रोक दिया।

आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट रद्द

11 अक्टूबर को महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने विवादों में रहे आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया। राज्य सरकार अब कांजूर मार्ग पर नया शेड बनाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने आरे कार शेड का विरोध कर रहे लोगों पर दर्ज मुकदमों को भी वापस ले लिया। सीएम उद्धव ठाकरे ने घोषणा करते हुए कहा कि हम जब सत्ता में नहीं थे तो हमने आरे कार शेड प्रोजेक्ट का विरोध किया था। पर्यावरण की चिंता करने वाले लोगों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी और इस प्रोजेक्ट को रद्द करने की मांग की थी। अब हमने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमने आरे की 600 एकड़ जमीन को जंगल घोषित कर दिया है। इस प्रोजेक्ट को यहां से वापस ले लेने के बाद यहां पर जंगल का क्षेत्र बढ़कर 800 एकड़ हो गया है।

कांजुरमार्ग में नया शेड

सीएम उद्धव ने एक वेबकास्ट में घोषणा की कि आरे कार शेड को अब कांजुरमार्ग में ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वहां पर सरकारी जमीन है जिसका इस्तेमाल मेट्रो कार शेड बनाने के लिए किया जाएगा। ये सरकार मुंबई मेट्रो को मुफ्त में दी जाएगी।

मेट्रो कार शेड की जगह बदलने से होगा अतिरिक्त खर्च

वर्तमान सीएम ने उस वक्त के सीएम और पुराने सहयोगी के फैसले को पलटा तो उस पर पूर्व मुख्यमंत्री का बयान आना तो लाजमी था। बयान आया भी। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में मेट्रो कार शेड परियोजना को आरे कॉलोनी से कांजूरमार्ग ले जाने के शिवसेना नीत महाराष्ट्र सरकार के फैसले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताय। फडणवीस ने कहा कि यह फैसला केवल किसी के अहम को संतुष्ट करने के लिए लिया गया है जिससे परियोजना की लागत में कम से कम 4,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा।

मेट्रो परियोजना की लागत और नुकसान

मुंबई मेट्रो 3 परियोजना में 27 स्टेशन होंगे, जिनमें से 26 अंडरग्राउंड होंगे। वर्तमान में, टनलिंग का लगभग 78% काम पूरा हो चुका है। कार शेड के शिफ्ट होने से मेट्रो प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है। 2015 में, यह परियोजना 23,000 करोड़ रुपये की थी, लेकिन आरे में अभी भी निर्माण पर रोक लगे रहने के साथ, विशेषज्ञों का अनुमान है कि MMRCL को हर दिन देरी के लिए 4.2 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

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