World marriage Day: ये बंधन है प्यार का, कभी टूटे न रिश्तों की डोर…

World marriage Day: ये बंधन है प्यार का, कभी टूटे न रिश्तों की डोर…

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

दिवस पर विशेष

समाज को जोडऩे की पहली पाठशाला परिवार होता है। परिवार में समन्वय बनाकर जीवन को जीने वाला व्यक्ति समूह के साथ चलकर भी सबको जोडऩे की कूवत रखता है। संयुक्त परिवार उसी का सशक्त उदाहरण है। विकास के इस दौर में जब हम स्मार्ट हो गए हैं तो इस रिश्ते को संजोए रखने की चुनौती भी कम नहीं है। आपसी सामंजस्य से इस रिश्ते की डोर को और सशक्त बना सकते हैं। परिवार जैसी संस्था को बचाने और रिश्तों की डोर को मजबूती प्रदान करने वाला बताया।

सामाजिक तानेबाने में शादी को अहम हिस्सा माना गया है। सामाजिक मान्यता के इस रिश्ते को वर्षों तक निभाने के लिए आपसी समन्वय बहुत जरूरी है।  मुझे लगता है कि आप अपने जीवनसाथी की बात को जरूर सुने। एक दूसरे से बात करने पर कभी भी आपसी मनमुटाव नहीं होगा। पति-पत्नी के बीच प्यार का जो रिश्ता है उसे सदैव जवां रखना चाहिए। इसके आप कहीं घूमने जरूर जाएं। बच्चों के साथ समय बिताएं। इससे न केवल आपका मन बदलेगा बल्कि रिश्तों में नई ताजगी भी आएगी।

सुनने की सहनशीलता 

आप कोई गलती करते हैं या फिर आपकी पत्नी कोई गलती करती है तो आप इस गलती को सुनने के लिए तैयार रहें। शादी के बंधन को मजबूत बनाने के लिए यह बहुत जरूरी है।दोनों के बीच आपसी समझ से परिस्थिति के अनुरूप समझौता होता रहा और जीवन चलता रहा। बच्चों को लेकर हम दोनों के बीच कभी मनमुटाव नहीं हुआ। शादी के बंधन की यही सबसे बड़ी खासियत है कि आप खुद के साथ समझौता करना सीख जाएं, रिश्ते मजबूत हो जाएंगे।

सोच मिलने से चलती है जिंदगी

आपका जीवन साथी कैसा है? उसका व्यवहार कैसा है? यह पता चलने के बाद आपके रिश्तों की बुनियाद को मजबूत होती है। आपसी सोच उससे मिलती है और जिंदगी की डोर आगे बढ़ती रहती है।

प्रेम और विश्वास बहुत जरूरी

बदलते परिवेश में रिश्तों को निभाने की चुनौती के बावजूद आपसी प्रेम और विश्वास आपके शादी के बंधन को मजबूती प्रदान कर सकता है।  दोनों के बीच कभी भी किसी भी बात को लेकर कहासुनी नहीं हुई। शादी में यह बात शायद समाज को हजम न हो, लेकिन यह सच्चाई है।

वचनों का पालन करने से श्रेष्ठ बनेगा बंधन 

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अग्नि के सात फेरे लेकर जीवन जीने के सात वचन को निभाने की कसम खाई जाती है। इसे निभाने की उत्सुकता और समन्वय वैवाहिक जीवन को खुशहाल बना देता है। मुझे लगता है कि प्रजा, यज्ञ और काम तीनों का समन्वय शादी की डोर को मजबूत करता है। एक दूसरे के समझने के चक्कर में नामसमझी वर्तमान समय में इस रिश्ते को कमजोर कर रहा है। सामाजिक मान्यता के इस रिश्ते को सामाजिक मर्यादा के साथ ही आगे बढ़ाया जाय तो इस विवाह जैसे पवित्र बंधन को निभाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

इसलिए मनाया जाता है विश्व विवाह दिवस

शादी परिवार की स्थापना की पहली सीढ़ी है। इसकी मजबूती को बनाए रखने और इसका सम्मान करने के लिए इस रिश्ते को सामाजिक मान्यता भी दी गई है। समाज की सबसे प्रगाढ़ इस रिश्ते की डोर मजबूत बनाए रखने के लिए हर साल फरवरी महीने के दूसरे रविवार को विश्व शादी दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई थी। 2012 से विश्व स्तर पर इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन शादी शुदा लोग अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए आयोजन करते हैं।

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