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Tarek Fatah:पंजाब के शेर हिन्दुस्तान के बेटे,लेखक तारेक फतेह का हुआ निधन! - श्रीनारद मीडिया

Tarek Fatah:पंजाब के शेर हिन्दुस्तान के बेटे,लेखक तारेक फतेह का हुआ निधन!

Tarek Fatah:पंजाब के शेर हिन्दुस्तान के बेटे,लेखक तारेक फतेह का हुआ निधन!

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श्रीनारद मीडिया की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक और स्तंभकार तारेक फतेह का निधन हो गया। वह 73 साल के थे। वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी बेटी नताशा ने तारिक के निधन की पुष्टि की है।

बड़ा हीं कष्टदायक है यह सुनना कि तारिक साहब नहीं रहे। अपने आप में एक पूरी बौद्धिक संस्था थे …तारिक फतेह। दुनिया भर की जानकारी अगर किसी single storage में समायी हुई थी तो वह तारिक फतेह का दिमाग था। बद्र से लेकर जिब्राल्टर तक की जंग हो …या बंगलादेश निर्माण के समय पाक लेना का नरसंहार, कट्टर सोच के खिलाफ हमेशा बेबाक रहे तारिक फतेह।

संसार की सांस्कृतिक विभिन्नता के बीच अपनी जड़ों से जुड़ी मानवीय संवेदना को लीलने के लिए तैयार कट्टरता के खिलाफ हमेशा ….आगाह करते रहे तारिक फतेह। यहीं कारण था ….कि कट्टरता की बुनियाद पर खड़ी पाकिस्तान नामक सोच ने तारिक साहब को हमेशा निशाने पर रखा। पाकिस्तान के सैन्य शासन से जीवन के खतरे को भांप कर कनाडा में शरण ली ..लेकिन उनके दिल में भारत हीं बसता था।

लाहौर और सिंध को सांस्कृतिक रूप से हमेशा भारत का मानते रहे तारिक साहब …और भारत की नई पीढ़ी को यह हमेशा याद दिलाते रहे कि लाहौर श्रीराम के बेटे लव की नगरी है …तो सिंध राजा दाहिर की। वे …भारत में राजा दाहिर को उचित सम्मान के लिए लालायित रहे।
तारिक फतेह पंजाबी थे, सिंधी थे, बलूची थे, बंगाली थे….लेकिन कभी पाकिस्तानी नहीं थे …क्योंकि पाकिस्तान कोई देश नहीं …चंद लुटेरों की जमात है जिसने भारत माता के टुकड़े कर मानवता के विरूद्ध जघन्य अपराध किया है। अखंड भारत हीं तारिक साहब का सपना था। तारिक साहब के अनुसार…भारत है …तभी सभ्यता है। तभी मानवता बची हुई है।

पाकिस्तान नामक सोच को भारत हीं नष्ट कर सकता है। बर्बर हिंसक सोच से भारत हीं दुनिया को बचा सकता है। इसीलिए …पाकिस्तानी होकर भी तारिक फतेह हमेशा भारत को अपना देश मानते रहे। भारत एवं खासकर सनातन धर्म के जबरदस्त प्रशंसक तारिक साहब भारत के उदार चरितानाम्….. वसुधैव कुटुम्बकम् वाली भावना का गलत फायदा उठाने वालों से भारत को आगाह भी करते रहे।

भारत की मधुर वासंतिक बयार को मैला करती अरबी रेगिस्तानी हवा से बखूबी वाकिफ थे …तारिक फतेह। जिस मुल्क ने शरण दी … उसी को तबाह करने वाली मानसिकता को समय-समय पर उजागर करते रहे तारिक फतेह। क्रूसेड, दुनिया पर कब्जा करने की लोलुपता, शिया-सुन्नी-कुर्द के आपसी द्वेष से तबाह व बरबाद कई मुल्क, बंगलादेश बनने के समय पाक सेना की बर्बरता, भारत की 1971 वाली डिप्लोमेटिक गलती, अरब स्प्रिंग, बलूचिस्तान की आजादी आदि विषयों पर बड़ा ही मौलिक एवं यथार्थ चिंतन है तारिक साहब का।

पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या …उसका अपने जड़ भारत से कटा होना है। भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम का भविष्य ….अरब की नकल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का अनुसरण है। इंडोनेशिया इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक स्वतंत्र देश के रूप में बलूचिस्तान तारिक साहब का सपना था।

माता हिंगलाज तारिक साहब के सपने को जल्द से जल्द पूरी करें ….एवं उन्हें अपने चरणों मे स्थान दें। अखंड भारत हीं तारिक साहब का है….और तारिक साहब अखंड भारत के हैं। अब…जयपुर डायलॉग में संजय दीक्षित के साथ संसामयिक विषयों पर मजेदार चुहलबाजी के साथ गंभीर टिप्पणी का भले हीं पटाक्षेप हो गया हो, लेकिन तारिक साहब बौद्धिक क्रांति के धरोहर बने रहेंगे…!

तारेक फतह का जन्म 1949 में पाकिस्तान में हुआ था और बाद में 1980 के दशक की शुरुआत में कनाडा चले गए। उन्होंने कनाडा में एक राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार और टेलीविजन होस्ट के रूप में काम किया है और कई किताबें लिखी हैं, जिनमें “चेज़िंग ए मिराज: द ट्रैजिक इल्यूजन ऑफ ए इस्लामिक स्टेट” और “द ज्यू इज नॉट माई एनीमी: अनवीलिंग द मिथ्स द फ्यूल मुस्लिम एंटी” शामिल हैं।

फतह इस्लाम पर अपने प्रगतिशील विचारों और पाकिस्तान पर उग्र रुख के लिए जाने जाते थे। उन्होंने खुद को ‘पाकिस्तान में पैदा हुआ भारतीय’ और ‘इस्लाम में पैदा हुआ पंजाबी’ कहा।

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