मेघालय की अवैध कोयला खदान में विस्फोट, 16 मजदूरों की मौत
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के एक सुदूरवर्ती इलाके में गुरुवार को एक अवैध कोयला खदान में भीषण डायनामाइट विस्फोट होने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि मलबे में और भी मजदूर फंसे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
विस्फोट की सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता, फोरेंसिक विशेषज्ञ, राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन सेवा की टीमें स्थिति का जायजा लेने के लिए मयन्संगट थांगस्को क्षेत्र में पहुंच गईं। ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि यह एक डायनामाइट विस्फोट था। उन्होंने बताया कि खदान से अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि झुलसे हुए एक घायल व्यक्ति को इलाज के लिए शिलांग रेफर किया गया है।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, एक पहाड़ी पर अवैध खनन किया जा रहा था। यह विस्फोट के कारण ढह गई, जिससे वहां काम कर रहे कई खनिक दब गए। इससे पहले 23 दिसंबर, 2025 को भी थांगस्को गांव में एक विस्फोट हुआ था, जिसमें दो खनिकों की जान चली गई थी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अप्रैल 2014 में मेघालय में खतरनाक ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर इसके अवैध और अवैज्ञानिक स्वरूप के कारण प्रतिबंध लगा दिया था। मेघालय हाई कोर्ट द्वारा कोयले से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए नियुक्त किए गए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद काटाके ने कहा था कि सरकार के ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के आश्वासन के बावजूद, राज्य में अवैध कोयला खनन और ट्रांसपोर्टेशन जारी है। हालांकि मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने उस समय दावा किया था कि जिला प्रशासन सतर्क है और अवैध खनन से जुड़े 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
रैट होल माइनिंग में बहुत संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं
रैट-होल माइनिंग में बहुत संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिनकी ऊंचाई आमतौर पर 3-4 फीट होती है। मजदूर इन्हीं सुरंगों में घुसकर कोयला निकालते हैं। ये सुरंगें इतनी छोटी होती हैं कि उनमें एक समय में केवल एक व्यक्ति ही जा सकता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2014 में मेघालय में रैट-होल कोयला खनन और अन्य अवैज्ञानिक खनन तरीकों पर रोक लगा दी थी। यह रोक पर्यावरण को होने वाले नुकसान और मजदूरों की सुरक्षा को देखते हुए लगाई गई थी। साथ ही, ऐसे तरीकों से निकाले गए कोयले के अवैध परिवहन पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रतिबंध को बरकरार रखा और केवल वैज्ञानिक, नियंत्रित और पर्यावरण सुरक्षा के नियमों के तहत ही खनन की अनुमति दी।
जब पूछा गया कि क्या खदान अवैध रूप से संचालित की जा रही थी, तो कुमार ने कहा, ‘‘हां, ऐसा ही लगता है.” उन्होंने कहा कि विस्फोट की वजह का पता अभी नहीं चला है, और इसकी जांच की जाएगी. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 2014 में मेघालय में ‘रैट-होल’ कोयला खनन तथा खनन के दूसरे अवैज्ञानिक तरीकों पर प्रतिबंध लगा दिया था.

