संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले में टीआरएफ की भूमिका का हुआ खुलासा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले में टीआरएफ की भूमिका का हुआ खुलासा

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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अमेरिका के बाद अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक रिपोर्ट में भी पहलगाम आतंकी हमले के दोषी आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) की भूमिका का राजफाश किया गया है। यूएनएससी द्वारा आतंकी गतिविधियों की निगरानी करने के लिए गठित एक मानिटरिंग टीम की रिपोर्ट में लश्कर के इस मुखौटा संगठन का उल्लेख किया गया है।

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब यूएनएससी का अस्थाई सदस्य पाकिस्तान इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा गया है -‘ यूएनएससी के एक सदस्य ने टीआरएफ के लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ संबंधों को खारिज किया और कहा है कि एलईटी अब निष्क्रिय है।’

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

इस बीच विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यह एक पंक्ति पाकिस्तान के आतंकी चरित्र को उजागर करने के लिए पर्याप्त है। इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने टीआरएफ को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित किया था। यूएनएससी 1267 (आइसीआइएस, अलकायदा) प्रतिबंध समिति की इस रिपोर्ट को 21 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया और इसे बुधवार को सार्वजनिक किया गया।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट में कहा गया है –  22 अप्रैल को पांच आतंकियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला किया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए। उसी दिन टीआरएफ ने हमले की जिम्मेदारी ली और हमले के स्थल की एक तस्वीर प्रसारित की। अगले दिन जिम्मेदारी का दावा दोहराया गया, लेकिन 26 अप्रैल को टीआरएफ ने अपनी जिम्मेदारी के दावे को वापस ले लिया। इसके बाद टीआरएफ की ओर से कोई और संचार नहीं हुआ। किसी अन्य समूह ने भी जिम्मेदारी नहीं ली। क्षेत्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है और आतंकी समूह इन तनावों का फायदा उठा सकते हैं।

एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था और टीआरएफ और एलईटी के बीच संबंध है। एक अन्य सदस्य देश ने कहा कि हमला टीआरएफ ने किया जो लश्कर के समान है। हालांकि, एक सदस्य देश ने इन विचारों को खारिज करते हुए कहा कि एलईटी अब अस्तित्व में नहीं है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक हार

इस रिपोर्ट में टीआरएफ का उल्लेख सीधे तौर पर पाकिस्तान की कूटनीतिक हार है, खासकर तब जबकि वह यूएनएससी का सदस्य है और इस महीने इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद पहली बार मानिटरिंग समिति की रिपोर्ट में पाकिस्तान के आतंकी संगठन का उल्लेख किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने संसद में यह दावा किया था कि पहलगाम हमले के बाद यूएनएससी की तरफ से जारी बयान में टीआरएफ का नाम हटाने में उन्हें सफलता मिली है।

भारत के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के मंसूबे हुए उजागर

भारत की खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यूएनएससी की रिपोर्ट ने टीआरएफ की आड़ में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को सामने ला दिया है। पाकिस्तान ने काफी सोच-समझकर एलईटी और जैश के आतंकियों को मिलाकर टीआरएफ और पीपुल अगेंस्ट फासिस्ट फ्रंट जैसे नाम वाले संगठनों का गठन किया है। इनका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाओं को स्थानीय रूप देना है।

भारत का विदेश मंत्रालय 2023 से ही टीआरएफ को लेकर वैश्विक बिरादरी को सतर्क कर रहा है। मई 2024 में भारत के अधिकारियों ने यूएनएससी के सभी सदस्यों के समक्ष टीआरएफ की गतिविधियों पर जानकारी दी थी। इस संदर्भ में विशेष कूटनीतिक दल भी भेजे गए हैं। नई दिल्ली में कई देशों के राजदूतों को समय-समय पर इस विषय में जानकारी दी जाती रही है। भारत को अमेरिका और फ्रांस से विशेष सहयोग मिल रहा है।

अमेरिका के बाद अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में भी पहलगाम आतंकी हमला के दोषी आतंकी संगठन द रेसिटेंस फ्रंट (टीआरएफ) की भूमिका का पर्दाफाश किया गया है।

यह पर्दाफाश यूएनएससी की तरफ से आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी करने और इस पर लगाम लगाने पर सिफारिश देने के लिए गठित एक मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में की गई है।यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त टीम की रिपोर्ट तब आई है जब यूएनएससी का अस्थाई सदस्य पाकिस्तान अभी दुनिया की इस सबसे बड़ी पंचायत की अध्यक्षता कर रहा है।

पाकिस्तान की ओर किया गया इशारा

रिपोर्ट में परोक्ष तौर पर पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए कहा गया है कि, “यूएनएससी के एक सदस्य ने टीआरएफ के लश्करे-तैयबा (एलईटी) के साथ संबंधों को खारिज किया और कहा है कि एलईटी अब निष्क्रिय है।”

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह एक पंक्ति पाकिस्तान के आतंकी चरित्र को सामने लाने के लिए काफी है। इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया गया है। कुछ दिन पहले अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने टीआरएफ को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन घोषित किया था।

पहलगाम हमले की तस्वीर किया था प्रकाशित

यूएनएससी 1267 (आइसीआइएस, अल-कायदा) प्रतिबंध समिति की यह रिपोर्ट 21 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया है जिसे बुधवार को सार्वजनिक किया गया।

इसमें कहा गया है कि, “22 अप्रैल को, पांच आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला किया। इसमें छब्बीस नागरिक मारे गए। उसी दिन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली और साथ ही हमले के स्थल की एक तस्वीर प्रकाशित की। अगले दिन जिम्मेदारी का दावा दोहराया गया।

हालांकि, 26 अप्रैल को टीआरएफ ने अपनी जिम्मेदारी के दावे को वापस ले लिया। टीआरएफ की ओर से इसके बाद कोई और संचार नहीं हुआ, और किसी अन्य समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली। क्षेत्रीय स्तर पर काफी तनाव है। आतंकवादी समूह इन क्षेत्रीय तनावों का फायदा उठा सकते हैं।

LeT के समर्थन के बिना हमला मुमकिन नहीं

एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था और टीआरएफ और एलईटी के बीच संबंध है। एक अन्य सदस्य देश ने कहा कि हमला टीआरएफ ने किया, जो एलईटी के समान है। एक सदस्य देश ने इन विचारों को खारिज करते हुए कहा कि एलईटी अब अस्तित्व में नहीं है।”

उक्त रिपोर्ट में टीआरएफ का उल्लेख सीधे तौर पर पाकिस्तान की कूटनीतिक हार है। यह खास तौर पर तब और जबकि वह यूएनएससी का सदस्य है और जिस महीने वह इस संगठन की अध्यक्षता (जुलाई, 2025) कर रहा है उसी महीने यह रिपोर्ट आई है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद पहली बार मोनिटरिंग समिति की रिपोर्ट में पाकिस्तान के आतंकी संगठन का जिक्र किया गया है। इसमें टीआरएफ का नाम आना ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने देश के संसद में यह बयान दिया था कि पहलगाम हमले के बाद यूएनएससी की तरफ से जारी बयान में टीआरएफ का नाम हटाने में उन्हें सफलता मिली है।

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि 22 अप्रैल, 2025 को भारत के पहलगाम में जो हमला हुआ था कि उसकी जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है, भारत ने कई बार यह बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी यह बात पिछले दिनों संसद में पहलगाम हमले व आपरेशन सिंदूर पर जारी बहस के दौरान लोकसभा में कही थी।

पाकिस्तान के नापाक मंसूबों से उठाया पर्दा

भारत की खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि यूएनएससी की रिपोर्ट में टीआरएफ की आड़ में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को सामने ला दिया है।

पाकिस्तान ने काफी सोच समझ कर एलईटी व जैश के जुड़े आतंकियों को मिला कर टीआरएफ या पीपुल एगेंस्ट फासिस्ट फ्रंट जैसे नाम वाले आतंकी संगठनों का गठन कर रहा है। इसका मकसद जम्मू व कश्मीर में आतंकी घटनाओं को स्थानीय रूप देना है। भारत का विदेश मंत्रालय वर्ष 2023 से ही टीआरएफ को लेकर वैश्विक बिरादरी को सतर्क कर रहा है।

मई, 2024 में भारत के अधिकारियों ने यूएनएससी के सभी सदस्यों के समक्ष टीआरएफ की गतिविधियों पर जानकारी दी थी। यूएनएससी के सदस्यों और दूसरे देशों को समझाने के लिए इस बारे में विशेष कूटनीतिक दल भेजे गये हैं। नई दिल्ली में भी कई देशों के राजदूतों को इसके बारे में समय समय पर जानकारी दी जाती रही है। भारत को अमेरिका और फ्रांस से खास तौर पर काफी अच्छी मदद मिल रही है।

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