धनतेरस 18 अक्टूबर शनिवार को मनाई जायेगी। इस दिन लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा करें।
श्रीनारद, मीडिया, दारौंदा, सिवान (बिहार)।
सिवान जिला सहित दारौंदा प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में
धन त्रयोदशी (धनतेरस) 18 अक्टूबर शनिवार को प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि में सम्पन्न होगी।
यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती हैं। इस साल धनतेरस 18 अक्टूबर शनिवार को मनाया जाएगा।
इस दिन लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरि की पूजा होती हैं।
आज ही सायंकाल में मृत्यु नाश हेतु यम के लिए गृहद्वार पर चार बत्तियों वाला दीप जलायें जिसे यम को दीपदान कहा जाता है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धनवंतरी त्रयोदशी भी कहा जाता हैं। “धनतेरस” शब्द की उत्पति दो शब्दों से मिलकर हुई हैं ‘धन’ और ‘तेरस’ यानि धन का तेरह गुना होना।
धनतेरस रोशनी, उमंग और खुशियों के पर्व दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है। पांच दिवसीय पर्व दीपावली का प्रथम दिन होता हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी समुद्र मंथन से अपने हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे।

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी की पूजा के साथ – साथ धन धान्य की देवी मां लक्ष्मी, गणेश और धन के देव कुबेर की इस दिन पूजा करने से धन में वृद्धि होती हैं। सुख समृद्धि एवं वैभवपूर्ण जीवन की कामना के लिए धनतेरस का दिन श्रेष्ठ होता हैं।
गोधूली वेला शाम में करें खरीदारी।
धनतेरस के दिन क्या खरीदे –
सोने या चांदी, लक्ष्मी – गणेश की प्रतिमा, पीतल के बर्तन, खरीदना बेहद शुभ माना जाता हैं।
झाडू खरीदने से आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता हैं।
साबुत धनियां, इन सभी चीजों को घर लाने से व्यक्ति पर भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती हैं।
पूजन का मुहूर्त –
धन ऐश्वर्य में वृद्धि की कामना से संध्या के समय शुभ मुहूर्त में आज महालक्ष्मी की विधिवत् पूजन स्थिर लग्न वृष में रात्रि 7:16 से 9:12 के मध्य किया जायेगा।
मां लक्ष्मी को मखाने और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं।
कुबेर देवता को सफेद मिठाई और धनवंतरी देव को पीली मिठाई प्रसाद के रूप में भोग लगाएं।
धनतेरस के दिन अकाल मृत्यु से बचने के लिए यम देवता की पूजा की जाती है।
यम दीपक दक्षिण दिशा में जलाएं जाते हैं इसे ही यम दीप कहा जाता है इस दिन यम दीपक जलाने से यमदेव प्रसन्न होते है और समस्त परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता हैं।
मास शिवरात्रि – 19 अक्टूबर रविवार को होगा और
हनुमत जयंती – 19 अक्टूबर रविवार को सायं मेष लग्न में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जायेगा।

