मोतिहारी में भाजपा ने बारहों सीट पर जीत दर्ज की
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पूर्वी चंपारण जिले की अहम विधानसभा सीट मोतिहारी में ‘कमल’ खिला है। इस सीट से बीजेपी के प्रत्याशी प्रमोद कुमार ने जीत हासिल कर ली है। प्रमोद कुमार ने राजद प्रत्याशी देवा गुप्ता को 13563 वोटों से हराया है। चुनाव में प्रमोद कुमार को कुल 106080 वोट मिले। वहीं देवा गुप्ता को कुल 92517 वोट मिले। जनसुराज पार्टी को कुल 6592 वोट मिले। चोथे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी दिव्याशु भारद्वाज रहे।
पूर्वी चंपारण जिले की अहम सीट मोतिहारी में ‘कमल’ खिला है। इस सीट से बीजेपी के प्रत्याशी प्रमोद कुमार ने जीत हासिल कर ली है। प्रमोद कुमार ने राजद प्रत्याशी देवा गुप्ता को 13563 वोटों से हराया है। चुनाव में प्रमोद कुमार को कुल 106080 वोट मिले। वहीं देवा गुप्ता को कुल 92517 वोट मिले। जनसुराज पार्टी को कुल 6592 वोट मिले। चोथे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी दिव्याशु भारद्वाज रहे।
चिरैया सीट से भी बीजेपी ने दर्ज की जीत
पीपरा सीट पर भी बीजेपी की जीत
नरकटिया सीट पर JDU ने दर्ज की जीत
हरसिद्धि में BJP के कृष्णनंदन ने दर्ज की जीत
केसरिया सीट पर जदयू की शालिनी मिश्रा जीतीं
गोविंदगंज में भी NDA उम्मीदवार जीते
मधुबन सीट पर बीजेपी ने दर्ज की जीत
पीपरा सीट पर बीजेपी की बढ़त बरकरार
पूर्वी चंपारण जिले में 71.55 प्रतिशत वोटरों ने बंपर मतदान किया। पूर्वी चंपारण में दूसरे और आखिरी चरण में मतदान हुआ था। पूर्वी चंपारण को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में NDA ने 12 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि महागठबंधन 3 सीटों पर ही जीत पाई थी। महागठबंधन ने सुगौली, नरकटिया और कल्याणपुर में जीत हासिल की थी।
साल 2020 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां बीजेपी के प्रमोद कुमार इस चुनाव में 92,733 वोट मिले थे। उस चुनाव में आरजेडी ने ओम प्रकाश चौधरी को टिकट थमाया था। ओम प्रकाश चौधरी को 78,088 वोट मिले थे। इस बार राजद ने अपना प्रत्याशी बदला है। मोतिहारी विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोट डाले गए थे। इस सीट पर कुल 71.61 प्रतिशत वोट पड़े थे।
मोतिहारी का देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में खास स्थान रहा है। वर्ष 1917 में दक्षिण अफ्रीका से लौटने के करीब 2 साल बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मोतिहारी पहुंचे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ पहला सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा था। उन्होंने यहां नील की खेती के खिलाफ विद्रोह शुरू किया था। मोतिहारी ने 17 बार बिहार विधानसभा के लिए अपना प्रतिनिधि चुना है। शुरू में यह कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। बाद में यह कम्युनिस्ट पार्टी और फिर वर्ष 2005 के बाद बीजेपी का मजबूत किला बन गया।

