जब पहली बार अटल जी के साथ पुतिन से मिले थे नरेंद्र मोदी

जब पहली बार अटल जी के साथ पुतिन से मिले थे नरेंद्र मोदी

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत-रूस शिखर वार्ता में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचने वाले हैं. वे अपने 30 घंटे के दौरे में पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू समेत देश के दिग्गज उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे. उनकी इस यात्रा के साथ ही हिंदुस्तान-रूस रिश्तों की कहानी में एक पुराना चैप्टर फिर से ताजा हो गया है. वह चैप्टर है पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती का. इस दोस्ती की शुरुआत होती है

वर्ष 2001 से. जब गुजरात के नए-नवेले मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार वैश्विक मंच पर कदम रख रहे थे. वे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रतिनिधिमंडल के रूप में उनके साथ रूस दौरे पर गए थे. यह पुतिन और मोदी की पहली औपचारिक मुलाकात थी. हालांकि इस शुरुआती मुलाकात ने ही मोदी–पुतिन के व्यक्तिगत समीकरणों की नींव रख दी.

साथ ही आने वाले दशकों में भारत-रूस संबंधों के नए अध्याय की भी चुपचाप शुरुआत कर दी. आज, 25 साल बाद, जब दोनों नेता फिर आमने-सामने होंगे तो राजनीति की वही पुरानी यादें एक बार फिर ताजा हो सकती हैं.
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राजनीति से जुड़े जानकार बताते हैं कि 2001 में मॉस्को के क्रेमलिन परिसर पहुंचने में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया गया. तब पीएम मोदी ने पहली बार रूस की शक्ति, उसके इतिहास और वैश्विक प्रभाव को करीब से महसूस किया. रूसी राष्ट्रपति कार्यालय की विशाल लाल दीवारें, बड़े-बड़े कमरे और गूंजती हुई लकड़ी की पुरानी फर्श को तत्कालीन सीएम मोदी ध्यान से देख रहे थे. ऐसा लग रहा था,

जैसे हर चीज उस साम्राज्य की कहानी कह रही थी जिसने सदियों तक दुनिया की राजनीति को प्रभावित किया था. उस यात्रा में युवा मुख्यमंत्री मोदी पहली बार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले. यह मुलाकात छोटी जरूर थी, लेकिन प्रभाव गहरा था. पुतिन ने गुजरात में विकास की संभावनाओं को लेकर मोदी से कुछ सवाल पूछे.

मोदी ने उन्हें सरल लेकिन दृढ़ आवाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘भारत के हर राज्य में क्षमता अपार है, बस नेतृत्व ईमानदार और लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए. यह जवाब सुनकर पुतिन के चेहरे पर हल्की मुस्कान उभर आई थी. शायद उन्हें अंदाजा हो गया था कि यह व्यक्ति भविष्य में कोई साधारण नेता नहीं रहने वाला है.’ उस यात्रा के दौरान मोदी ने मॉस्को की तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक मॉडल को भी ध्यान से देखा.

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