भाषाई सौहार्दता के परिप्रेक्ष्य में भारतीय भाषाओं की महत्ता
लोग अंग्रेजी भाषा बोलने में अपनी शान समझते हैं, अपनी मातृभाषा अपनी पहचान
भाषा जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं!
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

विश्व हिंदी दिवस के पावन अवसर पर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी और भारतीय भाषा केंद्र द्वारा संचालित फैकल्टी एनरिचमेंट प्रोग्राम के समापन समारोह में सम्मिलित होकर ताशकंद से आए विद्वान अध्यापकों एवं शोधार्थियों को संबोधित किया।
हिंदी की वैश्विक यात्रा, भारतीय ज्ञान-परंपरा और भाषा के सांस्कृतिक ध्वनिचित्र पर संवाद के दौरान प्रतिभागियों की आँखों में जिज्ञासा के साथ अपनापन भी झलका मानो भाषा ने सबके बीच कोई अदृश्य डोर बाँध दी हो।
ताशकंद के प्रतिभागियों द्वारा हिंदी में किए गए संवाद सचमुच मन को छू लेने वाले थे। उच्चारण भिन्न था, पर भाव वही जानने, सीखने और निकट आने के। उसी क्षण लगा कि भाषा दूरी नहीं देखती; वह हृदयों को जोड़ती है और देशों को एक सांस्कृतिक परिवार में बदल देती है। यही “वसुधैव कुटुम्बकम्” का जीवंत अर्थ है।
संस्थानों और सांस्कृतिक स्थलों के अवलोकन के माध्यम से इन विद्वानों ने भारतीय सभ्यता, भाषा और ज्ञान-परंपरा को निकट से समझा। यह अनुभव भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच भाषिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाला है। इस सार्थक पहल के लिए ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी, भारतीय भाषा केंद्र, जे.एन.यू. और सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई।
विश्व हिंदी दिवस की समस्त विश्व को और विशेष तौर से समस्त विश्व में हिंदी को बोलने वालों को , समझने वालों को और लिखने वालों को हार्दिक बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं । विश्व में हिंदी के विकास , हिंदी साहित्य के महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सर्वप्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1974 को नागपुर में आयोजित हुआ था । इसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियो ने भाग लिया था । वर्तमान में हिंदी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा का रूप ले रही है ।

1975 में विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने किया था और इसमें भारत ,मॉरीशस , यूनाइटेड किंगडम , त्रिनिदाद और टोबैगो और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से प्रतिनिधि आए थे और बाद में इन देशों में भी हिंदी सम्मेलन आयोजित किए गए । हिंदी हमारी राजभाषा है और हमारी सांस्कृतिक चेतना व राष्ट्रीय एकता का मूल आधार होने के साथ-साथ प्राचीन सभ्यता व आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है ।
हिंदी भारत माता का स्वर्णिम आभूषण है । हिंदी भारत की संस्कृति , गौरव और अभिमान है । राजभाषा और मातृभाषा हिंदी की उन्नति में समाज का विकास निहित है। हिंदी दुनिया भर में लगभग 35 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है । हिंदी साहित्य ज्ञान से ओत प्रोत है और हिंदी पूरी दुनिया को ज्ञान देकर एक नई दिशा दे सकती है , इससे समाज को ऋषि मुनियों और ऐतिहासिक धर्म ग्रंथो की गहरी जानकारी मिल सकती है ।
विश्व हिंदी दिवस 2026 की थीम है , “हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक” है । विश्व हिंदी दिवस पर मैं उन सभी लगभग 150 संस्थाओं, जो हिंदी के विकास में लगी हुई है और विश्व में हिंदी के सभी कवियों , लेखकों , साहित्यकारों का हार्दिक अभिनंदन करता हूं , जिनकी बदौलत आज हिंदी की समस्त विश्व में अलग पहचान है और हिंदी विश्व भाषा बनने की तरफ अग्रसर है ।
आओ आज विश्व हिंदी दिवस पर हम सब शपथ लें कि हम हिंदी के विकास में अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं आने देंगे और हिंदी को विश्व भाषा बनाने की दिशा में हम अपने प्रयास जारी रखेंगे । एक बार फिर से विश्व हिंदी दिवस की समस्त विश्व को हार्दिक बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं ।

