ट्रंप ने वेनेजुएला वाली गलती भारत के साथ दोहराने की कोशिश की तो…..
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

वाशिंगटन के व्हाइट हाउस में बैठे डोनाल्ड ट्रंप शायद यह भूल गए हैं कि दुनिया का नक्शा बदल चुका है। वेनेजुएला के तेल के कुंओं पर कब्जा करना और एक कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश को अपनी दादागिरी से डराना एक बात है।भारत का वह आत्मविश्वास है जो आज अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी महाशक्ति से टकराने का माद्दा रखता है।
अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। वहां की सरकार को गिरा दिया। कड़े प्रतिबंध लगाए और अपनी नौसेना भेजकर वहां के तेल भंडारों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश जारी है। वेनेजुएला जो अपनी अंदरूनी राजनीति और खराब अर्थव्यवस्था से जूझ रहा था। अमेरिका के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाया। इस आसान जीत ने शायद ट्रंप के अहंकार को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
लेकिन अमेरिका का इतिहास उठाकर देख लीजिए। वो ऐसे किसी देश पे आक्रमण नहीं करता जो जरा भी मजबूत हो। वो कमजरो देशों पर तीर मार के दुनिया में भौकाल बनाता है। वेनेजुएला के साथ भी वही किया पहले लंबे समय तक सेंशंस वगैरह लगा के रखा चारों तरफ से उसको बांध दिया और तब अभी भी अमेरिका की ये हिम्मत नहीं है कि डायरेक्ट ईरान से भिड़ जाए इतने लगातार लंबे अरसे तक सेंशंस लगाने के बावजूद इसलिए वो इजराइल को आगे कर रहा है।
अमेरिका को पता है किससे हाथ मिलाना, किससे जंग करना
भारत सिर्फ ऐसा नहीं कि सिर्फ परमाणु शक्ति संप किसी भी परमाणु शक्ति संपन्न देश के खिलाफ अमेरिका नहीं बोलता चाहे वो किम जोंग उन ही क्यों ना हो किम जोंग उन के पास आज परमाणु बम नहीं होता ना तो उसकी हालत वेनेजुएला वाले की तरह कर देते। डोनाल्ड ट्रंप जैसे शख्स को समझाने के लिए एक किम जोंग उन ही चाहिए जो उसकी भाषा में जब बात करे। अमेरिका को पता है कि किसको छड़ी मारनी है और किससे हाथ मिलाना है।
भारत के पास वो जज्बा है जो 1971 में अमेरिका के सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी से वापस भेजने पर मजबूर कर चुका है और 2026 का भारत तो उस समय से 100 गुना ज्यादा ताकतवर है। मान लीजिए अमेरिकी नौसेना अपने विमान वाहक पोतों के साथ अरब सागर में प्रवेश करती है। उनका मकसद है भारत पर दबाव बनाना। बिल्कुल वैसे ही जैसे उन्होंने वेनेजुएला में किया। लेकिन यहां उनका स्वागत फूलों से नहीं बल्कि दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से होगा।
भारत की तट रेखा पर तैनात ब्रह्मोस की बैटरीियां और हमारे सुखोई 30 एमकेआई फाइटर जेट्स अमेरिकी जहाजों को समुद्र के बीचों-बीच ही कब्रिस्तान बना देंगे। वेनेजुएला के पास अपनी रक्षा के लिए कोई खास तकनीक नहीं थी। लेकिन भारत के पास S400 एयर डिफेंस सिस्टम है जो अमेरिकी F35 और F22 जैसे स्टील फाइटर जेट्स को भी हवा में ही भस्म करने की क्षमता रखता है। रक्षा विशेषियों का मानना है कि अरब सागर अमेरिका के लिए वियतनाम से भी बुरा साबित होगा।
अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान को मोहरा बना खेल करता रहा
तनाव की मुख्य वजह हाल ही में हुआ भारत-पाकिस्तान संघर्ष। जब भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर दिया और पीओके को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की तो अमेरिका को मिर्ची लगना स्वाभाविक था। अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान को अपना मोहरा बनाकर एशिया में संतुलन बनाए रखना चाहता था।
पाकिस्तान की हार को अमेरिका अपनी रणनीतिक हार मान रहा है। इसीलिए ट्रंप प्रशासन अब भारत को सबक सिखाने की बात कर रहा है। लेकिन वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भारत ने पाकिस्तान को हराया है। इसका मतलब यह है कि भारत की युद्ध क्षमता अपने चरम पर है। हमारी सेना बैटल हार्ड है। यानी उसे युद्ध का ताजा अनुभव है।
ट्रेड डील होना ही है!
जब ट्रंप की तरफ से भारत पर टेरिफ लगाया गया तो अमेरिका में विरोध शुरू हो गया। तमाम नेता ट्रंप के खिलाफ चले गए। तमाम लोग ट्रंप के खिलाफ आ गए और ट्रंप खुद बैकफुट पर आ गए। इसलिए नहीं अमेरिका के लिए ज्यादा बड़ा टारगेट चाइना है। इंडिया नहीं है। भारत अमेरिका के खिलाफ वाली लॉबी में नहीं है। बल्कि बहुत सारे लोग तो ये बोलते हैं कि एशिया में अमेरिका का बिगेस्ट एसेट भारत ही है। यही तो ट्रंप डिप्लोमेसी है। भारत में मोदी डिप्लोमेसी चल रही है। दोनों में से जो जितना एक दूसरे से गिव एंड टेक कर सके करे। अंत में हाथ मिला के गोल्डन हैंडशेक होगा। ट्रेड डील होना ही होना है।
अगर ट्रंप ने वेनेजुएला वाली गलती भारत के साथ दोहराने की कोशिश की तो अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

