“प्लाटून कमांडर विंग” परिवार को समर्पित काव्य संग्रह, “स्मृतियों का सिपाही” का भव्य लोकार्पण
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, छपरा (बिहार):

सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा प्लाटून कमांडर विंग, (ग्यारह कुमाऊं), सुपुत्र बलबीर सिंह (पी टी आई), माता जी विजय देवी, जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा), अपनी परंपरा को निरंतर बरकरार रखते हुए, एक बार फिर अपनी स्वरचित पुस्तक “स्मृतियों के सिपाही (काव्य संग्रह), को अपने साहित्यिक गुरु आदरणीय डॉ. मनोज भारत और जूनियर लीडर विंग के समस्त अधिकारीगण एवं द्रोणाचार्यों के मार्गदर्शन से, अपने पूरे प्लाटून कमांडर विंग परिवार के साथ, लोकार्पण एवं विमोचन समारोह को सफल बनाने का एक बार फिर पुन: सौभाग्य प्राप्त हुआ।
सबसे बड़ी खुशी और गौरव की बात तो यह है कि जिस पुस्तक का लोकार्पण जिस परिवार के साथ किया जा रहा है, वह पुस्तक भी उसी परिवार को समर्पित है। यानी सोने पर सुहागा, यह पुस्तक “प्लाटून कमांडर विंग” को सादर समर्पित की गई है, और आज इस पुस्तक का लोकार्पण भी जूनियर लीडर विंग कमांडर मेजर जनरल राकेश मनोचा सेना मैडल, विशिष्ट सेवा मेडल के हाथों, प्लाटून कमांडर कोर्स के सफल समापन सम्बोधन समारोह के दौरान किया गया है, जिसमें प्लाटून कमांडर विंग के सभी अधिकारीगण एवं द्रोणाचार्यों के साथ भारतीय सेना के सभी जूनियर लीडर उपस्थित थे, जो प्लाटून कमांडर कोर्स 290 का हिस्सा थे।
सूबेदार नफे सिंह ने इससे पहले प्लाटून कमांडर विंग को ” पी सी विंग बैटल किंग” गान भी समर्पित किया है, जो… एक ऐतिहासिक यादगार के रूप में एकलव्य मैस की गैलरी वॉल पर लगाया गया है। सुबेदार नफे सिंह इस उपलब्धि का सम्पूर्ण श्रेय अपने वरिष्ठ अधिकारियों एवं साथी द्रोणाचार्यों को देते हैं, जिन्होंने समय-समय पर मार्गदर्शन किया और सकारात्मक माहौल भेंट किया।
अपने दादा एवं दादी, माता और पिता सहित गुरुजनों का आशीर्वाद, परिवारजनों का प्रेम तथा शुभचिंतकों की दुआओं से आज सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा अपने सपनों को साकार करने में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने अभी तक कुल 30 किताबें लिखी हैं। जिनमें एकल संग्रह की ग्यारह पुस्तकें देश की बात (2017), मंजिल से पहले रुकना मत(2018), मौत से मस्ती (2019), कातिल कोरोना (2020), ऐसे कैसे मर जाऊँगा (2021), किसके बिन है कौन अधूरा (2022), सबर किया है सबरी कि ज्यों(2023), बारूद और भावनाएँ (2024), जल्दी घर तुम आना बेटा (2025), सूखा समंदर (2025) और “स्मृतियों का सिपाही” (2026), है। इसके साथ-साथ प्रकाशित पुस्तकें सांझा संकलन की 19 पुस्तकें लिखी हैं, जिसमें, काव्य संग्रह की 13 पुस्तकें, कहानी संग्रह की 03 पुस्तकें, लघुकथा की संग्रह 02 पुस्तकें और संस्मरण संग्रह की 01 पुस्तक हैं।
इसके अलावा हिंदी साहित्य के पत्र पत्रिकाओं में 25 साल से रचनाओं का निरंतर प्रकाशन व हिंदी साहित्य के सैकड़ो संस्थानों एवं समूहों द्वारा अनेकों बार पुरस्कृत एवं सम्मानित होने का सौभाग्य भी प्राप्त किया है। नफे सिंह योगी मालड़ा अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुवर डॉ मनोज भारत जी, परिवारजन, डबल फर्स्ट फैमिली, शुभचिंतक एवं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन देने वाले सभी मित्रगण, सहयोगी एवं रिश्तेदारों को देता है।
इसके साथ-साथ डबल फर्स्ट बटालियन, पी सी विंग परिवार और अपने गाँव की हवा, पानी, धूल एवं मिट्टी को भी शत शत नमन करते हुए आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने तन में ताकत, हृदय में हिम्मत और किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का सामर्थ्य प्रदान किया। उनका कहना है कि… अगर माँ सरस्वती का आशीर्वाद इसी प्रकार से रहा तो आजीवन साहित्य सृजन से माँ भारती की सेवा करता रहूँगा।
सुबेदार नफे सिंह योगी मालड़ा
प्लाटून कमांडर विंग (ग्यारह कुमाऊं)
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