मकर संक्रांति ऋतु परिवर्तन का उत्सव: धर्मेंद्र रस्तोगी
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, सारण (बिहार):

मकर संक्रांति सूर्य के दक्षिण से उत्तर दिशा अर्थात उत्तरायण गति के प्रारंभ का दिन है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य की गति के आधार पर वर्ष को दो भागो में (उत्तरायण और दक्षिणायन) बांटा गया है। ऐसा माना जाता है कि उत्तरायण में पृथ्वी प्रकाशमय होती है, जबकि दक्षिणायन में अंधकारमय।
इसीलिए खरमास के बाद से ही मांगलिक कार्य आरंभ होता है। महाभारत में उत्तरायण का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इसके छह प्रकाशमय महीनों में शरीर त्यागने वाला व्यक्ति पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है। ठीक इसके उलट दक्षिणायन के छह अंधकारमय महीनों में शरीर छोड़ने वाले को पृथ्वी पर फिर से जन्म लेना पड़ता है। कर्मकांड के अनुसार आज के दिन पवित्र नदियों के जल में स्नान के बाद दान- पुण्य करने से श्रद्धालुओं को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
हमारे जैसे लोगों को जिन्हें न ज्योतिष की समझ है, न कर्मकांड में विश्वास और न ही इस खूबसूरत पृथ्वी पर जन्म- मरण के चक्र से मुक्ति की कोई आकांक्षा, सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन गति से फर्क नहीं पड़ता है। हमारे लिए यह ऋतु परिवर्तन का उद्घोष मात्र है।
हमारी पृथ्वी पर जो भी जीवन, सौंदर्य और रंग है वह सूर्य के ही कारण है। सूर्य पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध में ज्यादा चमक बिखेरे अथवा उत्तरी गोलार्द्ध में, वह तो सदा प्रकाशवान और जीवनदायी है। आज के दिन का अर्थ हमारे लिए दही- चूड़ा- गुड़, लाई, तिलकुट, खिचड़ी और पतंगबाजी के साथ सूर्य के बदले तेवर और ऋतु परिवर्तन का उत्सव मनाने के सिवाय और कुछ नहीं। आप सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की अशेष शुभकामनाएं।।

