शिक्षकों की समस्याएं बैक फुट पर, फ्रंट पर लाने के लिए महासंघ सीएम को सौंपेगा ज्ञापन
श्रीनारद मीडिया, चमन श्रीवास्तव, सीवान (बिहार):

शिक्षा विभाग में आवास भत्ता के नाम पर वर्षों से खेल जारी है। जिला के 8 किलोमीटर की परिधि में तैनात तमाम नियमित व नियोजित शिक्षक शहरी आवास भत्ता का लाभ उठा रहे हैं। वह भी एक-दो साल नहीं बल्कि दशकों से। परंतु नियोजित से विशिष्ट शिक्षक बनते ही आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न का खेला शुरू हो गया।
यूं ही पिछले एक वर्ष तक आवास भत्ता के तहत 6 फीसदी आर्थिक दोहन का सामना करना पड़ा है। सरकार के द्वारा बार-बार निर्देशित करने के बावजूद भी सीवान जिले के संबद्ध विशिष्ट शिक्षकों का पूर्ण वेतन संरक्षण का लाभ तो दिया गया। परंतु शहरी आवास भत्ता हो या देहाती, सभी क्षेत्रों के भुगतान में 5 फीसदी की हकमारी भी की जा रही है, जो काफी खेदजनक व विभागीय निर्देशों के विपरीत है।
📝 विभिन्न समस्याओं के निष्पादन के लिए महासंघ ने दिया डीईओ को ज्ञापन
जिले के विशिष्ट शिक्षकों की मांग पर शुक्रवार को परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ के जिला महासचिव रामपृत विद्यार्थी ने डीईओ राघवेंद्र प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपकर संबंधित समस्या का त्वरित निष्पादन करने की मांग की है। साथ ही नियोजित शिक्षकों की 12 वर्ष पूरा होने पर प्रोन्नति व विभिन्न मदों के बकाया एरियर का अविलंब भुगतान करने हेतु अनुरोध भी किया गया है। संघ के जिलाध्यक्ष राजीव श्रीवास्तव द्वारा सकारात्मक परिणाम की संभावनाएं जताई जा रही है।
📝 संघ की लंबी लड़ाई का फलाफल है 10 फीसदी आवास भत्ता
उल्लेखनीय है कि विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 के तदनुरूप बेहतर सेवा व राज्य कर्मी की चाह में 90 फ़ीसदी से अधिक नियोजित शिक्षक साक्षमता परीक्षा उत्तीर्णोपरांत विशिष्ट शिक्षक बन गए। परंतु जिस विद्यालय में नियोजित रहते हुए सड़क से सदन तक की एक लंबी लड़ाई व संघर्ष के बाद शिक्षकों को 10 फ़ीसदी शहरी आवास भत्ता का भुगतान किया जा रहा था, उसी विद्यालय में विशिष्ट शिक्षक बनते ही पिछले एक वर्ष से 4 फीसदी की दर से भुगतान किया जा रहा था।
📝 ₹1,250 से ₹2,000 तक का प्रतिमाह हो रहा नुकसान
फिलहाल सभी विशिष्ट शिक्षकों को ग्रामीण भत्ता के अनुरूप 5 फ़ीसदी की दर से आवास भत्ता मिल रहा है। जबकि 10 फ़ीसदी की दर से मिलना चाहिए। इस प्रकार शहरी व ग्रामीण भत्ते में 1250 से लेकर 2000 रुपये तक प्रति माह नुकसान हो रहा है। नियोजित शिक्षकों की प्रोन्नति, आवास भत्ता व विभिन्न बकाया एरियर जैसी टेढ़ी चाल पर शासन की निगाहें पड़ गईं हैं। यदि जिला मुख्यालय द्वारा संबंधित कार्य का त्वरित निष्पादन नहीं होता है तो ऐसे में महासंघ को शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को फ्रंट फुट पर लाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की विवशता होगी।
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