बिहार में मोतिहारी जिला प्रशासन द्वारा जॉर्ज ऑरवेल आश्रम का किया गया निरीक्षण
मोतिहारी में जॉर्ज ऑरवेल का भुला दिया गया घर
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

जिला प्रशासन द्वारा जॉर्ज ऑरवेल आश्रम का निरीक्षण, विरासत संरक्षण की कार्य योजना का निर्माण किया जाएगा
27 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी श्री सौरभ जोरवाल, नगर आयुक्त श्री आशीष कुमार एवं अनुमंडल पदाधिकारी, सदर मोतिहारी श्री निशांत सिहारा के द्वारा मोतिहारी नगर निगम वार्ड संख्या-19 में अवस्थित ऐतिहासिक जॉर्ज ऑरवेल आश्रम का संयुक्त रूप से भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।
प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक जॉर्ज ऑरवेल, जिन्होंने ‘1984’ और ‘एनिमल फार्म’ जैसी विश्व प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियां लिखीं, का यह आश्रम ऐतिहासिक एवं साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है।
जिला प्रशासन द्वारा इस पुरातात्विक धरोहर के सभी स्थलों का बारीकी से गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उपस्थित पदाधिकारीयों को निर्देश दिया गया कि इस धरोहर को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से किस प्रकार संरक्षित किया जाए, इसकी एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करें।
जिला पदाधिकारी के द्वारा इस स्थल की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने, इसे स्वच्छ एवं पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाए रखने तथा स्थल को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए भी सख्त निर्देश दिए गए।

जॉर्ज ऑरवेल आश्रम के उचित रखरखाव एवं संरक्षण से न केवल साहित्यिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि यह स्थल देश-विदेश के पर्यटकों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र भी बन सकेगा।
स्थानीय नागरिकों से अपील की जाती है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा, संरक्षण एवं स्वच्छता में अपना सहयोग प्रदान करें।
जॉर्ज ऑरवेल की मकबूलियत को देखते हुए कई लेखक, पत्रकार, कलाकार जब मोतिहारी शहर आते हैं तो वहां जाने की कोशिश करते हैं. पूर्वी चंपारण जिले का पर्यटन विभाग भी बड़े गर्व से बताता है कि उसका शहर जॉर्ज ऑरवेल की जन्मस्थली है. लेकिन अगर आप वहां पहुंचना चाहें तो जाने का रास्ता न स्थानीय लोग बता पाएंगे और न ही गूगल मैप आपको वहां तक पहुंचा पाएगा. ऐसे ज्यादातर लोगों को इस संरक्षित स्मारक तक पहुंचाने का काम मोतिहारी के युवा पत्रकार विश्वजीत मुखर्जी करते हैं, जिन्होंने जॉर्ज ऑरवेल के मोतिहारी कनेक्शन को लेकर एक डॉक्यूमेंटरी बनाई है और वे जॉर्ज के दत्तक पुत्र रिचर्ड ब्लेयर के संपर्क में भी रहते हैं.
ऑरवेल ने लिखा, “निस्संदेह शराब, तंबाकू आदि ऐसी चीजें हैं जिनसे एक संत को बचना चाहिए, लेकिन संतत्व भी एक ऐसी चीज है जिससे मनुष्य को बचना चाहिए।”

