क्या होगा आवारा कुत्तों का भविष्य?

क्या होगा आवारा कुत्तों का भविष्य?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में गुरुवार को एक अहम कदम सामने आया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद वकीलों से लिखित दलीलें जमा करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े एक पुराने मामले में बदलाव की मांग को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

कोर्ट कब सुनाएगा फैसला?

कोर्ट ने सभी वकीलों से कहा है कि वे एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करें। इसके बाद अदालत इस मामले में फैसला सुनाएगी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने की।

सुनवाई के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े सभी पक्षों ने अपनी बात कोर्ट के सामने रखी। इनमें डॉग लवर्स, कुत्तों के काटने से प्रभावित लोह, पशु अधिकार कार्यकर्ता और केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से पेश वकील शामिल थे।

पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने आवारा कुत्तों को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट को दी। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के वकील की भी दलीलें सुनीं, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा कुत्तों को हटाने और सड़कों की सही तरीके से फेंसिंग करने के प्रयासों पर बात की गई।

SC का AWIB को निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWIB) को भी साफ निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जो NGO पशु आश्रय गृह या एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर चलाने की अनुमति मांग रहे हैं, उनके आवेदन जल्द निपटाए जाएं। कोर्ट ने AWIB से कहा, या तो आवेदन मंजूर करें या खारिज करें, लेकिन इसमें देरी न करें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो राज्य सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का पालन करने में नाकाम रहे हैं, उन्हें ‘ठीक से फटकार’ लगाई जाएगी। कोर्ट ने राज्यों की ओर से दाखिल हलफनामों को ‘आंखों में धूल झोंकने’ वाला और ‘फर्जी आंकड़ों’ से भरा बताया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की पीठ ने राज्यों के जवाबों की समीक्षा करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। कोर्ट विशेष रूप से झारखंड के हलफनामे से हैरान था, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले दो महीनों में लगभग 1.9 लाख कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की गई। पीठ ने कहा कि झारखंड सरकार के पास मौजूद संसाधन और कर्मचारी इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों की नसबंदी नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को आदेश जारी किया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने ABC नियमों को लागू करने के लिए कदम उठाए। इसी के तहत उन्होंने ‘1.89 लाख कुत्तों’ की नसबंदी का दावा किया। इसकी तुलना में दिल्ली जैसे राज्य एक साल में लगभग एक लाख कुत्तों की नसबंदी करते हैं। पीठ ने कहा, ‘यह सब फर्जी आंकड़े हैं… सभी राज्य अस्पष्ट बयान देते हैं। यह आंखों में धूल झोंकने जैसा है। उन्हें ठीक से फटकार लगाई जाएगी।

  • एमिकस क्यूरी (न्यायालय के सहायक) वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने राज्यों की ओर से दाखिल किए गए हलफनामों की जांच के बाद कोर्ट को उनकी कमियों के बारे में बताया।
  • कोर्ट को यह भी पता चला कि असम में 2024 में 1.66 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए, जबकि राज्य में केवल एक ही डॉग सेंटर है। कोर्ट ने कहा, ‘यह चौंकाने वाला है। 2024 में 1.66 लाख कुत्ते के काटने के मामले थे। और, 2025 में सिर्फ जनवरी में, 20,900 मामले थे। यह बहुत चिंताजनक है।’
  • राज्यों की ओर से दिए गए जवाबों में कई महत्वपूर्ण जानकारी गायब थी। इनमें आवारा कुत्तों की संख्या, डॉग पाउंड (कुत्तों को रखने की जगह), ABC सेंटर और संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए नियुक्त मानव संसाधन जैसे मुद्दे शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में निर्देश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों/डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इन जगहों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की जानी चाहिए।

यह आदेश इसलिए दिया गया था क्योंकि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाली समस्याओं, जैसे कि कुत्तों के काटने की घटनाएं, को लेकर चिंता जताई गई थी। कोर्ट चाहता है कि राज्य इन नियमों का गंभीरता से पालन करें और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। राज्यों के ढीले रवैये से कोर्ट नाखुश है और अब उनसे कड़े कदम उठाने की उम्मीद कर रहा है।

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