सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज की बिहार का चुनाव रद कर नये सिरे से चुनाव कराने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।कोर्ट ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह याचिका और कुछ नहीं बल्कि समग्र रूप से चुनाव याचिका है जिसमें पूरे राज्य का चुनाव रद करने की मांग की गई है।

चुनाव याचिका व्यक्तिगत तौर पर दाखिल की जाती है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपको चुनाव में कितने वोट मिले? जब जनता ने नकार दिया तो आप न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि बाद में कोर्ट ने जन सुराज को हाई कोर्ट जाने की छूट देते हुए याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट का जन सुराज की याचिका पर सुनवाई से इनकार

ये आदेश और टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने जनसुराज पार्टी की याचिका पर कीं। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग की थी।

याचिका में कहा गया था कि चुनाव के दौरान बिहार सरकार ने गैरकानूनी तरीके अपनाए। इसलिए चुनाव रद्द कर दुबारा कराए जाएं।याचिका में कहा गया था कि राज्य में जब आदर्श आचार संहिता लागू थी तब महिला वोटरों को 10,000 रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर किए गए जो कि गलत था।

जनसुराज के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान जनसुराज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने जैसे ही दलीलें रखना शुरू किया, तभी कोर्ट ने सीधा सवाल किया यह याचिका कैसे हो सकती है आपको चुनाव याचिका दाखिल करनी चाहिए।पीठ के न्यायाधीश जोयमाल्या बाग्ची ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 100 के किस प्रविधान के तहत पूरे चुनाव को रद करने की मांग की जा सकती है?

वकील सीयू ।सिंह ने कहा कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मुफ्त रेवडि़यां बांटने के मामले में सुनवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे आर्थिक रूप से कमजोर राज्य में बिना बजटीय प्रविधान के हजारों करोड़ रुपये की घोषणा से लेबल प्लेइंग फील्ड डिस्टर्ब होता है।

सीयू ।सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तरह 15600 करोड़ रुपये बांटे जिससे दूसरे राजनीतिक दलों को बराबरी का मौका नहीं मिला। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यह याचिका एक तरह से चुनाव याचिका है जिसमें पूरे राज्य का चुनाव रद करने की मांग की गई है।उन्होंने कहा कि चुनाव रद करने के लिए प्रत्येक प्रत्याशी के खिलाफ ठोस आरोप और कथित भ्रष्ट आचरण का विवरण जरूरी होता है। ऐसे मामलों में सही उपाय यह है कि हर विधानसभा क्षेत्र को लेकर अलग अलग चुनाव याचिकाएं दायर की जाएं।

हाई कोर्ट जाने की छूट के साथ याचिका वापस ली

कोर्ट ने पूछा कि हाई कोर्ट क्यों नहीं गए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की क्या जरूरत थी। याचिका में कोई अखिल भारतीय मुद्दा नहीं उठाया गया है। इस याचिका पर तो हाई कोर्ट भी सुनवाई कर सकता है। ।सिंह ने कहा कि याचिका में आचार संहिता के उल्लंघन के व्यापक मुद्दे को उठाया गया है।बिना किसी ठोस जांच के करीब डेढ़ करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ देने की घोषणा चुनाव से ठीक पहले की गई, जो साफ तौर पर चुनावी लाभ पहुंचाने का मामला है।

कोर्ट ने कहा कि अगर योजना पर आपत्ति थी तो उसे चुनौती देनी चाहिए थी लेकिन उसे चुनौती नहीं दी गई है। कोर्ट का नकारात्मक रुख देखते हुए वकील ने हाई कोर्ट जाने की छूट मांगते हुए याचिका वापस ले ली।

उच्चतम न्यायालय ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के कहने पर बिहार विधानसभा चुनाव को पूरी तरह रद्द करने का व्यापक निर्देश जारी नहीं कर सकता। पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक कल्याणकारी योजना के कथित दुरुपयोग के विरोध में राज्य में नए सिरे से चुनाव कराए जाने का अनुरोध किया था।

बिहार सरकार के फैसले को चुनौती

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। याचिका में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए थे। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के कहने पर पूरे राज्य के लिए व्यापक निर्देश जारी नहीं किया जाता।

पटना उच्च न्यायालय में जाने की सलाह

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह को इस आधार पर पटना उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा कि यह मुद्दा सिर्फ एक राज्य से संबंधित है।

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