बिजली चोरी करने वाले कि गूगल अर्थ से ट्रेस होगी लोकेशन

बिजली चोरी करने वाले कि गूगल अर्थ से ट्रेस होगी लोकेशन

श्रीनारद मीडिया सेन्ट्रल डेस्क

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अब बिजली चोरी वालों पर तकनीक से नजर रखी जाएगी. बिहार बिजली विभाग अब हाईटेक हो गया है. उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब बिहार में भी बिजली चोरी पकड़ने के लिए गूगल अर्थ (Google Earth) और स्मार्ट प्रीपेड मीटर का इस्तेमाल शुरू हो गया है. अब किसी लाइनमैन की मुखबिरी की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सैटेलाइट और डिजिटल मैप खुद बताएंगे कि किस घर में बिजली की चोरी हो रही है.

कैसे पता चलेगा कहां हो रही चोरी

अब बिजली विभाग को सिर्फ लाइनमैन या मैसेजिंग सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना होगा. स्मार्ट प्रीपेड मीटर से मिलने वाला डाटा खुद गलत करने वालों की पहचान करेगा. जिन घरों में असामान्य रूप से जीरो यूनिट या बहुत कम खपत दिखेगी, वे सीधे निगरानी सूची में आ जाएंगे. ऐसे मामलों में यह साफ माना जाएगा कि या तो मीटर से छेड़छाड़ हुई है या फिर अवैध कनेक्शन से बिजली इस्तेमाल की जा रही है.

इस नई व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी जूनियर इंजीनियरों का मोबाइल है. उनके फोन में एक विशेष एप इंस्टॉल किया जाएगा, जिसमें कंज्यूमर आईडी डालते ही उपभोक्ता की सटीक लोकेशन सामने आ जाएगी. स्मार्ट मीटर में लगे चिप के जरिए घर की पहचान होगी और गूगल अर्थ मैप पर उस मकान के ऊपर लाल निशान दिखेगा. यह संकेत होगा कि यहां बिजली चोरी की आशंका है.

लाल निशान दिखा तो होगी छापेमारी

गूगल अर्थ पर लाल रंग से चिह्नित घरों की सूची बनाकर विभाग विशेष छापेमारी टीम भेजेगा. मौके पर जांच के दौरान यदि बिजली चोरी पकड़ी जाती है तो तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे कार्रवाई ज्यादा तेज, सटीक और प्रभावी होगी.

गूगल अर्थ एप से पहले उन इलाकों की पहचान होगी जहां चोरी की संभावना ज्यादा है. इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी. पूरा डाटा विभाग के पास उपलब्ध रहेगा, जिससे यह समझना आसान होगा कि कहां वास्तविक खपत नहीं दिख रही और कहां गड़बड़ी है.

बिजली चोरों को सख्त चेतावनी

इंजीनियर ने साफ कहा है कि अब बिजली चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए हर गतिविधि विभाग तक पहुंच रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल निगरानी के इस दौर में चोरी करने वाले खुद ही अपने खिलाफ सबूत छोड़ रहे हैं.

इस डिजिटल निगरानी में जूनियर इंजीनियरों की भूमिका अहम होगी। उनके मोबाइल में एक विशेष एप इंस्टॉल किया जाएगा, जिसमें कंज्यूमर आईडी डालते ही उपभोक्ता का सटीक लोकेशन सामने आ जाएगा। स्मार्ट मीटर में लगे चिप के जरिए घर की पहचान होगी और गूगल अर्थ मैप पर उस मकान के ऊपर लाल निशान दिखाई देगा। यह संकेत करेगा कि इस घर में बिजली चोरी की संभावना है।

गूगल अर्थ पर लाल निशान वाले घरों की सूची बनाकर विभाग विशेष छापेमारी टीम भेजेगा। मौके पर यदि चोरी पकड़ी जाती है तो कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे कार्रवाई तेज, सटीक और प्रभावी होगी।

इसके अलावा गूगल अर्थ एप से पहले ही उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां चोरी की संभावना अधिक है। इन इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। पूरा डेटा विभाग के पास उपलब्ध रहेगा, जिससे यह समझना आसान होगा कि वास्तविक खपत कहां नहीं दिख रही और कहां गड़बड़ी हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस हाईटेक प्रणाली से बिजली चोरी पर नियंत्रण पाने में काफी मदद मिलेगी। डेटा विश्लेषण कर यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कौन से इलाके में चोरी अधिक है और वहां विशेष कार्रवाई होगी। इससे चोरी कम होने के साथ-साथ विभाग की वसूली भी बढ़ेगी।

नई तकनीक से बिजली चोरी की पहचान के बाद कार्रवाई में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। पहले जहां शिकायतों और लाइनमैन की रिपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था, अब वास्तविक समय में डेटा के जरिए सही कार्रवाई संभव होगी।

संक्षेप में, बिहार अब बिजली चोरी के खिलाफ डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा है। स्मार्ट मीटर और गूगल अर्थ के इस सिस्टम से बिजली चोरी पर सटीक निगरानी संभव होगी। अब चोरी करने वाले किसी बहाने का सहारा नहीं ले पाएंगे और विभाग तेजी से कार्रवाई कर सकेगा। यह पहल न केवल चोरी रोकने में मदद करेगी बल्कि बिहार के बिजली नेटवर्क को मजबूत और पारदर्शी बनाएगी।

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