बिहार में फार्मर रजिस्ट्री अब 11 फरवरी तक होगी
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में किसानों को डिजिटल पहचान देने के लिए फार्मर रजिस्ट्री महाअभियान का तीसरा चरण चल रहा है. किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है. अब किसान 11 फरवरी तक फार्मर रजिस्ट्री करा सकते हैं. यह अभियान पूरे राज्य में मिशन मोड में चलाया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना से जोड़ा जा सके.
कैसे रजिस्ट्रेशन करवाएं
फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है. किसान अपने नजदीकी सीएससी या वसुधा केंद्र पर जाकर मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. आमतौर पर लगने वाला 15 रुपये का सेवा शुल्क भी इस अभियान के दौरान नहीं लिया जा रहा है. इसका खर्च विभाग खुद उठा रहा है.
खुद भी कर सकते है रजिस्ट्रेशन
फार्मर आईडी बनवाने के लिए किसानों के पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अपने नाम की जमीन की जमाबंदी होना जरूरी है. किसान अपने पंचायत के कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार या राजस्व कर्मचारी से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा किसान चाहें तो स्वयं फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर जाकर भी अपनी फार्मर आईडी बना सकते हैं.
किसानों को मिलेंगे कई लाभ
फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को कई फायदे मिलेंगे. इससे किसानों को फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, सरकारी अनुदान और फसल नुकसान की भरपाई जैसी योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर मिल सकेगा. इस डिजिटल पहचान से यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही और पात्र किसानों तक पहुंचे और किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें.
- पीएम-किसान सम्मान निधि: सीधे बैंक खातों में 3 किस्तों में कुल ₹6,000 की वित्तीय सहायता, जिससे खाद, बीज और खेती का खर्च पूरा होता है। बिहार में अतिरिक्त ₹3,000 के साथ यह सहायता बढ़ रही है।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): खेती की आवश्यकताओं के लिए बहुत ही कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा।
- फसल बीमा (PMFBY): फसल की बर्बादी या कम पैदावार होने पर बीमा कवर।
- दाल मिलों पर सब्सिडी: क्लस्टर स्तर पर दाल मिल स्थापित करने पर सरकार द्वारा ₹25 लाख तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
- प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना: 60 वर्ष की आयु के बाद लघु एवं सीमांत किसानों के लिए ₹3,000 मासिक पेंशन का प्रावधान।
- अन्य लाभ: मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card), जैविक खेती के लिए (PKVY), और कृषि यांत्रिकीकरण (SMAM) जैसी योजनाओं के माध्यम से खेती को आधुनिक और उत्पादक बनाना।
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