जनरल नरवणे की किताब में चीन पर ऐसा क्या लिखा है?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

जनरल नरवणे 31 दिसंबर 2019 से लेकर 30 अप्रैल अप्रैल 2021 तक ये इस अपने पद पे रहे थे। 2 साल का इनका कार्यकाल था और उसके बाद में जब वो रिटायर हो के आए हैं तो उन्होंने पहली अपनी किताब लिखी उसका नाम था फोर स्टार ऑफ़ डेस्टिनी।
चीनी टैंक कैलाश रेंज पर आ गए थे?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक किताब जनवरी 2025 तक छपकर पब्लिक डोमेन में आने वाली थी। लेकिन फिर इसे रिव्यू के लिए भेज दिया गया। क्योंकि वह सेना प्रमुख थे तो आर्मी और रक्षा मंत्रालय के पास किताब रिव्यू के लिए भेजी गई। इस बात को 2 साल हो गए। इसी बीच पिछले दिनों caravan मैगजीन में इस अप्रकाशित किताब में लिखी बातों का जिक्र करते हुए एक डिटेल लेख छापा गया।
उसमें लिखा कि भारतीय सेना की नॉर्थ कमान के तत्कालीन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को 31 अगस्त 2020 की रात 8:15 बजे एक फोन कॉल आया। चार चीनी टैंक, पैदल सैनिकों के साथ पूर्वी लद्दाख के रेचिन ला की ओर ऊपर बढ़ रहे थे। चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय सेना की पोस्ट से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे।
इसके बाद जनरल नरवणे ने देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को फोन करना शुरू किया। वे यही पूछ रहे थे कि मेरे लिए क्या ऑर्डर है। इसमें लिखा है कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई साफ निर्देश नहीं मिला। चीनी टैंक रुके नहीं थे। वे चोटी से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर रह गए थे। किताब में नरवणे ने लिखा है कि मेरी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। रात 10:30 बजे रक्षा मंत्री का फोन आया। टॉप लीडरशिप से निर्देश सिर्फ एक पंक्ति का था ‘जो उचित समझो, वो करो।’
‘गलवान झड़प अचानक या अप्रत्याशित?
किताब के हवाले से कहा गया है कि अगस्त 2020 में गलवान की झड़प कोई अचानक या अप्रत्याशित घटना नही थी, बल्कि यह चीन की ओर से कई हफ्तों तक बढ़ती आक्रामकता का नतीजा थी। स्थानीय कमाडर पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थे और उन्होंने स्थिति को कमतर दिखाने की कोशिश की। ये भी लिखा है कि हमारे कई जवान जो या तो रास्ता भटक गए थे या फिर PLA की ओर से कुछ समय के लिए बिना खाना और इलाज दिए रोके गए थे, वापस अपने बेस पर लौट आए।
किताब को क्लियरेंस क्यों नहीं मिला?
पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ क्या रिलीज होगी या नहीं? जब से ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की रिलीज रूकी तबसे ही यह सवाल बार बार पूछा जा रहा है कि क्यों यह रूकी और कब पब्लिश होगी। पिछले साल अक्टूबर में खुशवत सिह लिट फेस्ट में जब एक गेस्ट की तरफ से जनरल नरवणे से ये पूछा गया कि आपकी किताब अभी तक क्लियर क्यों नहीं हुई और पब्लिश क्यों नहीं हुई जो जनरल नरवणे ने हसते हुए जवाब दिया कि मैं भी ये जानना चाहता हुये .
पब्लिशर का काम है कि वे रक्षा मंत्रालय से परमिशन लें। ये अभी अडर रिव्यू है। लेकिन क्या रक्षा मंत्रालय इसका रिव्यू कर रहा है और इसकी क्या प्रक्रिया होती है? इसका मंत्रालय की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। न ही भारतीय सेना ने इसका जवाब दिया कि क्या उन्हें इस किताब से कोई आपत्ति है।
ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट वजह
एक अधिकारी ने बताया कि हर सरकारी कर्मचारी जिसमें सशस्त्र सेनाओं के लोग भी शामिल होते हैं, वे ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट से बंधे होते हैं। सर्विस में रहते हुए और रिटायर होने के बाद भी उन्हें इसका पालन करना होता है। अगर वे ऐसी कोई बातें लिखते हैं या ऐसा कुछ बनाते हैं जो उनकी सर्विस से जुड़ा हुआ है तो इसके लिए उन्हें सभी जरूरी इजाजत लेनी होती है। ये किताब या लेख या जो भी वे प्रड्यूज कर रहे है उसके कंटेंट पर निर्भर करता है।

