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फाइलेरिया से बचाव की दवा सामूहिक सेवन अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगा मेगा कैंप

फाइलेरिया से बचाव की दवा सामूहिक सेवन अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगा मेगा कैंप
• जीविका दीदी और उनके परिवार के सदस्यों को खिलायी गयी दवा
• दवा खाने के चक्कर आना, उल्टी होना शुभ संकेत, घबराने की जरूरत नहीं
• 27 फरवरी तक चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
• जिलास्तरीय पदाधिकारियों ने किया अभियान की मॉनिटरिंग

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर/छपरा (बिहार):

 


छपरा  जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी से 27 फरवरी तक संचालित सर्वजन दवा सेवन अभियान को गति देने के उद्देश्य से बुधवार को विशेष मेगा कैंप का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बूथ स्थापित कर लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति में फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया गया। अभियान के दौरान जीविका दीदियों, उनके परिजनों एवं अन्य पात्र लाभार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक लाभार्थी दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही करे। मेगा कैंप के सफल संचालन के लिए जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों ने विभिन्न केंद्रों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अभियान की सघन मॉनिटरिंग की।

चक्कर-उल्टी से न घबराएं, यह शुभ संकेत है
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि फाइलेरिया (हाथीपांव) एक गंभीर मच्छर जनित बीमारी है, जो शरीर के लसीका तंत्र को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय नियमित रूप से फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा खाने के बाद यदि किसी व्यक्ति को हल्की उल्टी, चक्कर या असहजता महसूस होती है, तो यह घबराने की बात नहीं है। यह संकेत है कि दवा शरीर में मौजूद माइक्रो फाइलेरिया परजीवियों पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

मेगा ड्राइव की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया था, जो अभियान की प्रगति पर सतत नजर रख रहा है। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीएमओ डॉ. भूपेंद्र कुमार, जिला वीबीडी सलाहकार सुधीर कुमार, वीडीसीओ, डीपीसी रमेश चंद्र कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारी और सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि शामिल थे।

खाली पेट नहीं खानी है दवा:
जिला वीबीडी सलाहकार सुधीर कुमार ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इन्हें खाली पेट नहीं लेना है। अभियान के दायरे से 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को बाहर रखा गया है। शेष सभी पात्र नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सहयोग करें और अपने सामने दवा का सेवन सुनिश्चित करें।

27 फरवरी तक चलने वाले इस सर्वजन दवा सेवन अभियान के माध्यम से जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने कहा कि यदि लगातार निर्धारित अवधि तक दवा का सेवन किया जाए, तो फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। जिलेभर में चल रहे इस अभियान को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय है तथा आमजन की सहभागिता को इसकी सफलता की कुंजी बताया गया है।

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