बिहार के सबसे बड़े साइबर ठगी का खुलासा, पटना यूनिवर्सिटी की रिटायर्ड महिला प्रोफेसर बनी थीं निशाना
श्रीनारद मीडिया, स्टेट डेस्क:

बिहार के पटना के कदम कुआं थाना क्षेत्र में रहने वाली एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से डिजिटल अरेस्टके नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इस हाई प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले में ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य शुभम राय को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगी करने वाला गिरफ्तार: आरोपी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सहारनपुर इलाके का रहने वाला है, जिसे कल्याणी साइबर थाना की टीम ने दबोचा है. पुलिस के अनुसार, शुभम राय को बंगाल पुलिस पहले से ही डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ रुपये की ठगी के एक अन्य मामले में तलाश रही थी.
डिजिटल अरेस्ट कर साइबर फ्रॉड: गिरफ्तारी के दौरान पूछताछ में उसके नेटवर्क और पुराने मामलों की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पटना में रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से हुए 3 करोड़ की ठगी के मामले का भी खुलासा हुआ. इसकी सूचना पश्चिम बंगाल पुलिस ने पटना साइबर थाना को दी है.
रिमांड पर लेकर होगी गहन पूछताछ: पटना साइबर थाना की पुलिस अब आरोपी शुभम राय को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है. इसके लिए जल्द ही पटना पुलिस की एक टीम पश्चिम बंगाल जाएगी. साइबर थाना का मानना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद ठगी की रकम के लेन-देन, बैंक खातों और पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं.
नवंबर 2024 का है मामला: बताया जा रहा है कि यह मामला नवंबर 2024 का है. उस समय साइबर अपराधियों ने पटना विश्वविद्यालय की 78 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर ज्योति वर्मा को फोन कर खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया था. मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर मामलों में नाम आने का डर दिखाकर महिला को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया. आरोपियों ने करीब 48 घंटे तक महिला को मानसिक दबाव में रखा और किसी से संपर्क न करने की चेतावनी दी.
3 करोड़ रुपये की हुई थी ठगी: डर और तनाव के चलते महिला प्रोफेसर ने अपनी एफडी तुड़वाकर और अलग-अलग खातों से करीब 3 करोड़ रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए. यह मामला उस समय काफी चर्चा में भी रहा था.
यूपी और महाराष्ट्र के तीन अन्य आरोपी:साइबर थाना प्रभारी नीतीश चन्द धारियां ने बताया कि “इस ठगी में शुभम राय के अलावा तीन अन्य साइबर फ्रॉड भी शामिल थे. ये आरोपी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पुलिस ने तीनों की पहचान कर ली है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी हासिल कर लिया गया है. उनकी गिरफ्तारी के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस से सहयोग लिया जा रहा है.
“”देशभर में साइबर अपराधियों के खिलाफ दर्ज मामलों में सबसे ज्यादा केस डिजिटल अरेस्ट और निवेश में मुनाफा देने के झांसे से जुड़े हैं. लोगों से अपील है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की कोई प्रक्रिया नहीं होती. ऐसे कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं. फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह की गिरफ्तारी और ठगी की रकम की रिकवरी के लिए लगातार कार्रवाई में जुटी है.”- नीतीश चन्द धारियां, साइबर थाना प्रभारी
यह भी पढ़े
पटना में युवक की हत्या, खरीदने के लिए जमीन देखने गया था, अपराधियों ने मारी गोली; विरोध में बवाल
गौरीचक पुलिस ने 2 तस्कर गिरफ्तार किया:हंडेर गांव में छापेमारी के दौरान कार्रवाई हुई, प्राथमिकी दर्ज
पुलिस का ‘सुपरफास्ट’ एक्शन: 5 घंटे में लूट का खेल खत्म, सलाखों के पीछे अंतरजिला लुटेरे
बिहार सरकार ने 25 आईपीएस अधिकारियों का तबादला और प्रमोशन किया है
विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज है
गोली लगने से मासूम की मौत, 7 लोगों पर मामला दर्ज
देशरत्न डा0 राजेंद्र प्रसाद के आवास परिसर में तिरंगा लगाने को ले सीवान डीएम से मिले नीतीश कुमार


