शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार- ज्ञानेश कुमार

शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार- ज्ञानेश कुमार

16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर विशेष

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

WhatsApp Image 2026-01-02 at 12.09.56 PM
previous arrow
next arrow
WhatsApp Image 2026-01-02 at 12.09.56 PM
WhatsApp Image 2026-01-02 at 12.09.56 PM
previous arrow
next arrow

देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी चर्चाओं के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख साफ किया है। आयोग ने एसआईआर को लेकर विपक्ष के सवालों के बीच बुधवार को कहा कि शुद्ध मतदाता सूची ही लोकतंत्र को मजबूत करने की कुंजी है। यह बात मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रबंधन संगोष्ठी (IICDEM-2026) के उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि बिहार में पिछले साल हुए मतदाता सूची संशोधन के दौरान किसी भी मतदाता की शामिल या हटाने की कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों में किसी भी एक लाख मतदान केंद्रों पर एक भी री-पोलिंग (दोबारा मतदान) की जरूरत नहीं पड़ी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि कानून के अनुसार हर मतदाता को शामिल करने वाली शुद्ध मतदाता सूची ही लोकतंत्र को मजबूत करती है और इसके आधार पर आयोजित सभी चुनाव निष्पक्ष होंगे।

विपक्ष के सवाल और ज्ञानेश कुमार का जवाब
ज्ञानेश कुमार ने आगे बताया कि बिहार में मतदाता सूची संशोधन और चुनाव संचालन में स्थानीय चुनाव मशीनरी ने बहुत दक्षता दिखाई। विपक्षी दल इस विशेष मतदाता सूची संशोधन पर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं कि यह वोटों में हेरफेर का एक प्रयास है, लेकिन सरकार और आयोग ने इसे खारिज कर दिया है।

एसआईआर का दूसरा चरण
बता दें कि विशेष मतदाता सूची संशोधन का दूसरा चरण 4 नवंबर, 2025 से अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था। असम में अलग से ‘विशेष संशोधन’ जारी है। आयोग का कहना है कि एसआईआर का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच कर अवैध प्रवासियों को हटाना है, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को।

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह ने क्या कहा?
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि नागरिकों का चुनाव प्रबंधन संस्थाओं पर रखा विश्वास अनमोल है। हर चुनाव के केंद्र में नागरिक होता है और यह सुनिश्चित करना चुनाव प्रबंधन संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि उनके चुनावी अधिकारों का सम्मान हो।

दूसरी ओर आयोग के सदस्य विवेक जोशी ने कहा कि IICDEM-2026 सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन निकाय, शोधकर्ता और छात्र भाग ले रहे हैं, जो चुनावों के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर अपने-अपने संस्थानों में योगदान देंगे।  गौरतलब है कि इस सम्मेलन में लगभग 100 प्रतिनिधि करीब 70 देशों से शामिल हुए हैं, और यह भारत में लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन है।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसी) के लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए कुमार ने कहा कि बिहार के चुनावों ने भारत और अन्य जगहों पर चुनाव प्रबंधन निकायों से अपेक्षित प्रशासनिक सटीकता के स्तर को प्रदर्शित किया।

कुमार ने कहा, “पहला कदम मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण था, जिसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल थे। चुनावी कानूनों के तहत, किसी भी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता को अपील दायर करने का प्रावधान है ताकि कोई गलत नाम शामिल न हो और कोई सही नाम छूट न जाए। 75 लाख मतदाताओं में से अपील की संख्या शून्य थी।”

कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य समकालीन चुनावी चुनौतियों का विस्तार से अध्ययन करना था।

कुमार ने कहा कि इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप व्यापक रूप से और कई भाषाओं में प्रकाशित होने वाली रिपोर्टें तैयार की जाएंगी। उन्होंने विभिन्न देशों में चुनावी प्रणालियों और लोकतांत्रिक प्रथाओं का तुलनात्मक मानचित्रण करने वाले दस्तावेज़ “लोकतंत्र का एटलस” पर हुई प्रगति की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, “मसौदा लगभग तैयार है और इसे सुधार और संशोधन के लिए सदस्य देशों के साथ साझा किया जाएगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!