गेमिंग ऐप के जरिए साइबर ठगी के रैकेट का राजफाश, दो गिरफ्तार; 9 मोबाइल और लैपटॉप जप्त

गेमिंग ऐप के जरिए साइबर ठगी के रैकेट का राजफाश, दो गिरफ्तार; 9 मोबाइल और लैपटॉप जप्त

श्रीनारद मीडिया, स्‍टेट डेस्‍क:

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बिहार के  भोजपुर जिले में अवैध ऑनलाइन गेमिंग व साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना मृत्युंजय पांडेय समेत तीन–चार अन्य की तलाश जारी है। यह जानकारी सोमवार की शाम साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने प्रेस वार्ता में दी।

 

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान पिपरपांती निवासी आयुष श्रीवास्तव व शाहपुर थाना क्षेत्र के कनैली गांव निवासी मोहित कुमार पांडेय के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, मृत्युंजय व आयुष इस गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड हैं। छापेमारी के दौरान नौ मोबाइल फोन, तीन बैंक पासबुक और दो लैपटॉप बरामद किए गए हैं। इस संबंध में दारोगा गांधी नाथ पाठक के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

 

जांच में रैकेट के तार विदेश से भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। गुप्त सूचना के आधार पर शाहपुर थाना पुलिस ने कनैली गांव स्थित मृत्युंजय कुमार पांडेय के घर छापेमारी की। इस दौरान आयुष और मोहित को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पूछताछ में साइबर अपराध में संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलने पर दोनों को बरामद सामान के साथ साइबर थाना, आरा लाया गया।

गेम के नाम पर प्रतिदिन 11 से 12 लाख रुपये का लेन-देन

साइबर डीएसपी ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपित अवैध रूप से ऑनलाइन गेम खिलवाकर लोगों से पैसे लगवाने और निकालने का काम करते थे। जांच में सामने आया कि प्रतिदिन करीब 11 से 12 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से गेम ऐप पर मंगवाए जाते थे। वहीं, गेम जीतने के नाम पर चार से पांच लाख रुपये यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए खिलाड़ियों को भेजे जाते थे। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर अवैध लेन-देन किया जा रहा था।

 

जो खिलाड़ी अधिक रकम जीत लेता था, उसे ब्लॉक कर दिया जाता था ताकि मुनाफा बना रहे। खिलाड़ियों को जोड़े रखने के लिए प्रलोभन स्वरूप कुछ राशि भी दी जाती थी। मध्यप्रदेश से प्रशिक्षण लेकर आया था आयुष साइबर डीएसपी के अनुसार आयुष पिछले दो वर्षों से इस रैकेट से जुड़ा हुआ था। वह मध्यप्रदेश से प्रशिक्षण लेकर आया था और यहां नए युवकों को ट्रेनिंग देकर गिरोह में शामिल करता था।

 

गैंग को बढ़ाने और उसके संचालन में आयुष और मोहित की अहम भूमिका रही है। साइबर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल और लैपटॉप की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल, सौ से अधिक खिलाड़ियों के बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जा रहे हैं।

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