बंगाल में SIR प्रक्रिया में मान्य नहीं होगा डोमिसाइल सर्टिफिकेट
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया में डोमिसाइल सर्टिफिकेट (अधिवास प्रमाणपत्र) मान्य नहीं होगा।
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि एसआइआर की सुनवाई के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में जमा किए गए डोमिसाइल प्रमाणपत्र को फिलहाल वैध नहीं माना जाएगा। जिन लोगों ने पहले ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र जमा कर दिया है, उन्हें सुनवाई के लिए फिर से बुलाया जा सकता है।
एसआइआर के तहत स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में राज्य द्वारा जारी स्थायी पता या निवास प्रमाणपत्र शामिल हैं, लेकिन डोमिसाइल प्रमाणपत्र इस श्रेणी में नहीं आते हैं। डोमिसाइल प्रमाणपत्र उस मानदंड को पूरा नहीं करता है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक राज्य डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी करने के लिए विशिष्ट सरकारी आदेशों का पालन करता है। राज्य में नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार डोमिसाइल प्रमाणपत्र मुख्य रूप से कुछ श्रेणियों को जारी किए जाते हैं, जिनमें सेना और अर्धसैनिक बलों में नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले गैर-बंगाली उम्मीदवार शामिल हैं।
इस बीच एसआइआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 10,000 नए जारी किए गए मतदाता पहचान पत्र वापस लौटा दिए गए हैं। आगामी 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उचित प्रक्रिया के बाद कार्ड उन्हें दोबारा भेज दिए जाएंगे।
आयोग ने यह भी कहा है कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए आने की जरुरत नहीं होगी। इसी तरह पढ़ाई, नौकरी, चिकित्सा अथवा अन्य विशेष कारणों से अस्थायी रूप से विदेश में रह रहे लोगों को भी सुनवाई के लिए आना नहीं पड़ेगा। वे अपने परिवार के किसी सदस्य को भेज सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने निर्देश जारी किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2010 के बाद जारी अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्रों को विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी मसौदा मतदाता सूची में दावों और आपत्तियों के निपटान के दौरान वैध पहचान दस्तावेज नहीं माना जाएगा। यह कदम पिछले वर्ष 24 दिसंबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद आया है जिसमें 2010 से 2024 के बीच जारी 113 समुदायों के अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र कानूनी वैधता पूरी न होने के कारण रद्द कर दिए थे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के लोग पात्र मतदाता है, लेकिन 2010 के बाद के उनके प्रमाण-पत्रों को चुनाव संबंधी मामलों में पहचान या समुदाय वर्ग के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘एसआईआर ढांचे के तहत, केवल राज्य सरकार द्वारा स्थायी निवास के प्रमाण के रूप में अधिसूचित दस्तावेज ही स्वीकार्य हैं। अधिवास प्रमाण पत्र उस मानदंड को पूरा नहीं करता है।’
उन्होंने बताया कि प्रत्येक राज्य अधिवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए विशिष्ट सरकारी आदेशों का पालन करता है।
राज्य में नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार, अधिवास प्रमाण पत्र मुख्य रूप से कुछ श्रेणियों को जारी किए जाते हैं, जिनमें सेना और अर्धसैनिक बलों में नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले गैर-बंगाली उम्मीदवार भी शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा कि इस बीच, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 10,000 नए जारी किए गए मतदाता पहचान पत्र वापस लौटा दिए गए।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक इस मामले में तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ”एक बार अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाने के बाद, उचित प्रक्रिया के बाद कार्ड उन्हें दोबारा भेज दिए जाएंगे।”

